24 जनवरी 2026,

शनिवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

90 दिन बाद भी निलंबन न बढाने पर कर्मचारी बहाली का पात्र, आवेदन निराकृत करने के निर्देश

  बिलासपुर। दुर्ग निवासी डॉ. वंदना भेले मुख्य अस्पताल अधीक्षक के पद पर जिला बेमेतरा में पदस्थ थीं। उनके द्वारा स्थानांतरित स्थल, जिला-दुर्ग में विलंब से ज्वाइनिंग दिए जाने पर सचिव, स्वास्थ्य विभाग, रायपुर द्वारा 13 फरवरी 2023 को सेवा से निलंबित कर दिया गया। उसके पश्चात् 21 मार्च 2023 को सचिव, स्वास्थ्य विभाग द्वारा उन्हें आरोप पत्र जारी किया गया। निलंबन आदेश से क्षुब्ध होकर डॉ. वंदना भेले ने अधिवक्ता अभिषेक पाण्डेय एवं घनश्याम शर्मा के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका दायर की।

3 min read
Google source verification
Court's decision, accused of molesting a woman will remain behind bars for two years

Court's decision, accused of molesting a woman will remain behind bars for two years


कोर्ट के समक्ष यह तर्क प्रस्तुत किया गया कि डॉ. वंदना ने पारिवारिक परेशानियों के कारण स्थानांतरित स्थल पर विलंब से ज्वाइन किया था। उन्होंने जानबूझकर आदेश की अवज्ञा नहीं की थी। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश का भी उल्लेख किया गया कि यदि वरिष्ठ अधिकारी अपने अधीन कर्मचारी को लगातार निलंबित रखना चाहते हैं तो उन्हें निलंबन के 90 दिवस के भीतर लगातार निलंबन में रखे जाने का पर्याप्त एवं विशेष कारण बताते हुए निलंबन को बढ़ाने का आदेश जारी किया जाना आवश्यक है। ऐसा न होने पर कर्मचारी बहाली का पात्र है। सुनवाई के पश्चात कोर्ट ने याचिका स्वीकार कर सचिव, स्वास्थ्य विभाग को यह निर्देशित किया कि वे निलंबन से बहाली एवं निलंबन भत्ता प्रदाय करने याचिकाकर्ता के अभ्यावेदन का निराकरण करें।


फर्जी खाते से करोड़ों का लेनदेन: एसीबी चीफ के शपथपत्र को रिकार्ड में लेने का आदेश

0 हाईकोर्ट के नोटिस के बाद भी पक्षकारों ने नहीं दिया जवाब

बिलासपुर। रायपुर और दुर्ग में फर्जी खाते से करोड़ों के लेनदेन के मामले में दर्ज दो एफआईआर पर हाईकोर्ट संज्ञान लिया है। इस मुद्दे पर दायर याचिका पर कोर्ट ने एन्टी करप्शन ब्यूरो के डीजीपी से शपथपत्र में जवाब मांगा गया। सुनवाई के दौरान जानकारी मिली कि शपथपत्र तो प्रस्तुत किया गया है लेकिन वह रिकार्ड में नहीं आ पाया है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की बेंच ने इस शपथपत्र को रिकार्ड में लेने के साथ ही मामले की सुनवाई अगले सप्ताह तय की है।

हाईकोर्ट में अप्रैल 2022 में यह प्रकरण पंजीकृत हुआ था। न्यायालय द्वारा सभी प्रतिवादी पक्षकारों से जवाब मांगा गया था जो लगातार सुनवाई के दौरान भी प्रस्तुत नहीं किया गया। इस पर हाईकोर्ट ने शासन के वकीलों से मामले में जवाब मांगा था।

एसीबी ने जांच का आदेश मिलने से किया इंकार

एसीबी ने अपने जवाब में कहा कि अलग-अलग मामले में एफआईआर दर्ज की गईं हैं। इसमें एंटी करप्शन ब्यूरो और ईओडब्लू द्वारा जांच की जा रही है। चीफ जस्टिस ने एंटी करप्शन ब्यूरो के प्रमुख से व्यक्तिगत शपथपत्र पर जानकारी मंगवाई थी। एंटी करप्शन ब्यूरो के प्रमुख डीएम अवस्थी ने शपथ पूर्वक यह बताया कि जिस एफआईआर के संबंध में न्यायालय द्वारा जानकारी मांगी गई है उसके विषय में एंटी करप्शन ब्यूरो किसी प्रकार की कोई जांच नहीं कर रहा है और ना ही उसे कोई जांच करने के लिए कहा गया है।

फर्जी खाते से सौ करोड़ से अधिक के लेनदेन का मामला

उल्लेखनीय है कि अनिमेष सिंह द्वारा जनवरी 2020 में एक एफआईआर दर्ज कराई गई थी। इसमें बताया गया था कि उसके नाम से फर्जी खाता खोलकर सैकड़ों करोड़ रुपए का लेनदेन किया गया है।उसका इससे कोई लेना-देना नहीं है। अगले ही दिन रायपुर के बड़े कारोबारी हितेश चौबे ने खुर्सीपार थाने में अनिमेष सिंह के खिलाफ एफआईआर दर्ज करा दी। इसमें कहा गया कि छोटे भाई से दोस्ती के बाद भरोसा जीतकर जमीन के कारोबार में रुपए निवेश करवाकर साढ़े 6 करोड़ रुपए की ठगी की गई है। दोनों ही एफआईआर में आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। पूरे मामले को रफा-दफा करने का प्रयास किया जा रहा था। मामले में वादी प्रभुनाथ मिश्र ने अधिवक्ता सतीश कुमार त्रिपाठी एवं बादशाह प्रसाद सिंह के माध्यम से उच्च न्यायालय में क्रिमिनल रिट दायर की है।


मैग्नेटो मॉल के सामने अन्ना डोसा का मामला निराकृत, जमीन खाली करने व एवज में क्षतिपूर्ति के निर्देश

बिलासपुर। मैग्नेटो मॉल के सामने संचालित अन्ना डोसा की जमीन के मामले को हाईकोर्ट ने निराकृत कर दिया। कोर्ट ने रेस्टोरेंट संचालक को दो महीने में जमीन खाली करने का आदेश दिया है। साथ ही तब तक किराए के तौर पर होटल संचालक को हर महीने एक लाख रुपए किराया जमीन मालिक अश्वनी यादव को देना होगा। वहीं अश्वनी यादव को निर्देश दिए के जमीन में किए गए निर्माण और साज सज्जा के लिए रेस्टोरेंट संचालक को 25 लाख रुपए दे।

कोर्ट ने जमीन मालिक अश्वनी यादव के खिलाफ आर्म्स एक्ट के तहत दर्ज प्रकरण में भी 25 हजार के बांड पर अग्रिम जमानत दी है। तारबाहर थाना अंतर्गत मैग्नेटो मॉल के मामने अश्वनी यादव की जमीन है। कुल 13 डिसमिल जमीन में से 5 डिसमिल जमीन मार्च 2018 में नुका मुरली ने किराए पर ली थी। इस जगह पर उसने अन्ना डोसा रेस्टोरेंट का संचालन शुरू किया। हर महीने एक लाख रुपए का किराया नुका मुरली द्वारा दिया जा रहा था मार्च 2023 में इस जगह को खाली करने की बात अश्वनी यादव ने नुका मुरली से कही। जगह खाली नहीं होने पर अश्वनी यादव ने जमीन खाली कराने की मांग करते हुए एडवोकेट सुनील ओटवानी के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका दायर की। हाईकोर्ट ने तारबहार थाने और प्रतिवादी नुका मुरली को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। प्रतिवादी नुका मुरली की ओर से वकील देवर्षि ठाकुर ने पैरवी करते हुए स्वीकार किया कि वह जमीन किराए की है और उस पर अन्ना डोसा रेस्टोरेंट संचालित कर रहा है। नुका मुरली की ओर से कहा गया उसने दुकान और रेस्टोरेंट को बनाने में काफी खर्च किया है, इसलिए फर्नीचर के साथ ही जगह खाली करने के लिए समय चाहिए। साथ ही निर्माण के एवज में 25 लाख रुपए क्षतिपूर्ति मांगी, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया।