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बिलासपुर

गोधन न्याय योजना : गोबर खरीदी कर रहे, लेकिन परिवहन की सुविधा नहीं, खुद के खर्च पर लेजा रहे गोबर गौठानों तक

बिलासपुर. प्रदेश सरकार की गोधन न्याय योजना के तहत गौठानों का निर्माण करने करने के साथ गोबर की खरीदी की योजना लागू की है। पिछले साढ़े 4 वर्षों से गौठानों में गोबर खरीदी शुरू तो कर दी गई, लेकिन यहां गोबर बेचने आने वाले किसानों को गोबर की बिक्री से ज्यादा उसे गौठान तक पहुंचने में परिवहन पर खर्च पड़ रहा है। किसान खुद के खर्च पर गोबर गौठान तक लेजा रहे हैंं। वहीं दूसरे राज्यों के गौठानों में गोबर खरीदी के लिए अलग व्यवस्था है।

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यहां ग्रामीण क्षेत्रों और शहरी क्षेत्रों में मवेशी पालने और गोबर बेचने वालों से गोबर मौके पर खरीदकर उसे ट्रैक्टरों में भरकर गौठान तक लाया जा रहा है। इससे किसानों, मवेशी मालिकों और गोबर बेचने वालों को गोबर की कीमत मिल रही है, लेकिन बिलासपुर के गौठानों में किसानों को खुद के खर्च पर गौठानों तक गोबर पहुंचाने के बाद उसकी कीमत मिल रही है। यह कीमत गोबर को गौठान तक लेजाने के खर्च से कम है।


तिफरा गौठान में काम नहीं, गोबर का नामो निशान नहीं

रविवार को पत्रिका की टीम तिफरा थोक फल व सब्जी मंडी के पीछे स्थित नगर निगम के गौठान पहुंची। यहां एक भी मवेशी नहीं था और मवेशी थे वो भी गौठान से निकलने वाले कचरे को गौठान परिसर के बाहर फेंके गए थे उसमें भोजन तलाशते दिखे। गौठान में करीब 10-12 दिन पुराने गोबर को वर्मी कंपोस्ट खाद के लिए बनाने की प्रक्रिया के लिए रखा गया था। यहां पिछले 10 दिनों से गोबर की खरीदी ही नहीं हुई।

नेपियर घास की जगह फैली थी गंदगी
राज्य शासन ने गौठानों में रखे जाने वाले वाले मविशयों के लिए गौठान में ही उनके भोजन की व्यवस्था करने नेपीयर घास का उत्पादन करने के निर्देश दिए हैं। ताकि मवेशियों के चारे की पूर्ति की जा सके, लेकिन तिफरा गौठान में खुली जगह में सिर्फ गंदगी और पुराने गोबर पड़े थे। यहां कचरे से निकलने वाले कबाड़ बोरियों में भरकर रखे गए थे।

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तराजू तक नहीं

तिफरा गौठान में गोबर की खरीदी का आलम यह है कि यहां गोबर खरीदने से पहले उसका वजन तौलने के लिए यहां तराजू तक नहीं रखा गया है। गौठान से पहले मोड़ पर दीवारों में लिख दिया गया है कि गोबर खरीदी केन्द्र, लेकिन यहां गोबर की खरीदी ही नहीं हो रही है।

गोबर खरीदी का गिरा रहा ग्राफ
खुद के खर्च पर गौठान तक गोबर लेजाने और गोबर की कीमत से अधिक परिवहन खर्च होने के कारण लोग अब गोबर की बिक्री करना बंद करने लगे हैं। 2 रुपए किलो में गोबर खरीदी की दर तय है, लेकिन गोबर को वाहनों में भरकर लेजाने में लोगों को डीजल का खर्च अधिक वहन करना पड़ रहा है। आमतौर पर लोग गोबर को चार पिहया माल वाहनों या ट्रैक्टरों में भरकर गौठान लेकर जाते है, लेकिन 1 लीटर डीजल की कीम 100 रुपए से अधिक होने के कारण 10 लीटर से अधिक डीजल गोबर के परिवहन में खर्च हो रहा है। यही कारण है कि परिवहन सुविधा नहीं हाेनेे के कारण लोग गौठानों तक गोबरलेजाने से कतरा रहे हैं।


मिलावटी गोबर बताकर खरीदी से आनाकानी

गौठानों में अधिकांश मामले ऐसे भी सामने आ रहे हैं, जिसमें लोगों के गोबर में मिट्टी और पत्थर के छोटे टुकड़े होने का हवाला देकर गोबर खरीदी नहीं की जा रही है। खरीदी करने वाले गोबर लेकर जाने वालों से ही गोबर के अंदर मिट्टी या पत्थर की जांच करा रहे हैं। इसके बाद ही गोबर की खरीदी कर रहे हैं। इस कारण भी लोग गोबर बेचने से किनारा कर रहे हैं।

गौठानों तक गोबर पहुंचाने में खर्च अधिक आने की समस्या लोगों ने कई बार बताई है। इसके लिए अब सुबह डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन में लगे वाहनों का उपयोग गोबर के परिवहन के लिए उपयोग करने की योजना बनाई गई है। साथ ही जोन स्तर पर गोबर की खरीदी की जाएगी और यहां से गौठानों तक गोबर पहुंचाया जाएगा। इससे बेचने वालों को फायदा मिलेगा।

शेख नजीरूद्दीन
अध्यक्ष नगर निगम