
Bilaspur High-Court : कार्यों में गड़बड़ी के कारण किए गए निलंबन को हाईकोर्ट में चुनौती देना सब इंजीनियर को भारी पड़ गया। जस्टिस एनके व्यास की सिंगल बेंच ने सुनवाई के दौरान कहा कि इंजीनियर सस्पेंड होने के लायक ही है। कोर्ट ने कहा- यह ठीक है कि कलेक्टर ने अधिकार क्षेत्र से बाहर निलंबित करने का आदेश जारी किया। लेकिन कोर्ट ने इंजीनियर के खिलाफ विभागीय जांच का आदेश देने की चेतावनी दी। कोर्ट ने जिला खनिज न्यास के तहत कार्यों में खर्च हुई राशि की वसूली ठेकेदार से करने का आदेश जारी किया है।
बता दें कि गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में दो महीने पहले कलेक्टर प्रियंका महोबिया ने गुणवत्ताहीन कार्य करने पर नगर पालिका परिषद पेंड्रा के सब इंजीनियर स्वप्निल मिश्रा को निलंबित कर दिया था। खनिज न्यास निधि (डीएमएफ) से कलेक्टर ने शासकीय मल्टीपरपज स्कूल और शासकीय शारीरिक प्रशिक्षण महाविद्यालय के जीर्णोद्धार के लिए लाखों रुपए के कार्य स्वीकृत किए थे। इस मद में गुणवत्ताहीन कार्य करवाने के मामले में कार्रवाई की गई है।
इंजीनियर ने नियम और प्रावधान के विपरीत किया काम
आदेश में कलेक्टर ने स्पष्ट लिखा कि- डीएमएफ से शासकीय मल्टीपरपज स्कूल के जीर्णोद्धार एवं शासकीय शारीरिक प्रशिक्षण महाविद्यालय पेण्ड्रा के रेनोवेशन में गुणवत्ताहीन कार्य होने और तकनीकी स्वीकृति के विपरीत कार्य होने के बाद भी कार्य पूर्णता प्रमाण-पत्र जारी किया गया। इस अनियमितता पर सब इंजीनियर को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाता है।
इस आदेश के खिलाफ सब इंजीनियर ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। जिसमें कहा गया था कि कलेक्टर को सस्पेंड करने का अधिकार नहीं है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि एसओआर से अधिक पर टेंडर लेने के बाद भी ठेकेदार गुणवत्तापूर्ण काम नहीं करते। इंजीनियर भी ध्यान नहीं देते, इसलिए काम बेहतर नहीं हो पाता। गुणवत्ता से समझौता स्वीकार नहीं है।
Published on:
17 Mar 2024 09:57 am
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