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कोटवार ने कहा-साहब 60 साल की आंखें धोखा नहीं खा सकतीं, जानें क्या है मामला

तखतपुर के पास बेलपान के आश्रित ग्राम कठमुंडा में 8 जनवरी को कोटवार व ग्रामीणों ने बाघ देखे जाने का दावा किया।

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ATR

बिलासपुर . तखतपुर के पास बेलपान के आश्रित ग्राम कठमुंडा में 8 जनवरी को कोटवार व ग्रामीणों ने बाघ देखे जाने का दावा किया। खार में पद चिन्ह मिले, लेकिन बाघों व उनके संरक्षण को लेकर वन विभाग के अफसर कितने गंभीर हैं, इस बात से ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि अफसरों ने किसी एक्सपर्ट को मौके पर न भेजकर पशु चिकित्सक को पद चिन्ह चेक करने भेज दिया। इसके बाद इस मुद्दे पर कोई पड़ताल नहीं की। वन विभाग वन्य प्राणी व बाघों के संरक्षण को लेकर वैसे तो बड़ी-बड़ी बातें करता है। इसके लिए करोड़ों रुपए फंडिंग भी होती है। लेकिन बाघ कहां और किस हाल में हैं, और उनके क्षेत्र में हैं भी या नहीं, ये अफसर खुद भी नहीं जानते। हाल ये कि वे यह जानने में कोई रुचि भी नहीं दिखाते। तखतपुर क्षेत्र में बाघ देखे जाने की खबर और इसे लेकर वन अफसरों की उदासीनता ने यह साबित भी कर दिया है। एक तरफ कठमुंडा के कोटवार व ग्रामीणों द्वारा बाघ देखने के दावे किए जा रहे हैं।

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खेत में इस तरह के पद चिन्ह भी मिले। लेकिन वन अफसरों कोई तवज्जो नहीं दी। बल्कि कानन पेंडारी के पशु चिकित्सक, डब्ल्यू डब्ल्यू एफ व नेचर क्लब की टीम को मौके पर भेज दिया। न खुद गए, न ही किसी एक्सपर्ट से जांच करवाई। टीम ने पद चिन्ह देखकर ये बताया कि यह किसी बाघ के पैरों के निशान हैं। इसके बावजूद अफसरों के कानों में जंू तक नहीं रेंग रहा। अब तक किसी एक्सपर्ट से जांच या रायशुमारी नहीं की गई। यदि क्षेत्र में वाकई बाघ की मौजूदगी है, तो उसकी खोज खबर भी नहीं ली।
पशु चिकित्सक बोले, बाघ के हैं पद चिन्ह : कानन पेंडारी से रेस्क्यू टीम के साथ डॉ. पीके चंदन को मौके पर भेजा गया। उन्होंने लौटकर कानन पेंडारी के प्रभारी रेंजर सुनील बच्चन सहित अन्य अफसरों को बताया, कि पद चिन्ह बाघ के हैं। सुनील बच्चन ने बताया डॉक्टर ने चार स्थानों पर पग चिन्ह देखने की जानकारी दी है, उन्होने बाघ के पग चिन्ह की पुष्टि की है।
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एक अफसर ने कहा-लकड़बग्घा : डीएफओ ने डिप्टी रेंजर जितेन्द्र साहू को ग्राम कठमुंडा भेजा। डिप्टी रेंजर ने मोबाइल पर पद चिन्ह की तस्वीर ली। इसे वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट तपेश झा के पास पुष्टि के लिए भेजा गया। तपेश झा ने वन विभाग के अधिकारियों को बताया, कि प्रथम दृष्टया यह पद चिन्ह लकड़बग्घे का लग रहा है। उनका कहना था लकड़बग्घा दूर से बाघ जैसा दिखाई देता है। हो सकता है ग्रामीणों ने दूर से
देखा हो।
परियोजना अधिकारी व अन्य ने की पुष्टि : 9 जनवरी को कानन जू की रेस्क्यू टीम ने मौके पर जांच पड़ताल की। नेचर क्लब के अध्यक्ष मंसूर खान सतपुड़ा-मैकल लैंडस्केप डब्ल्यू डब्ल्यू एफ इंडिया के परियोजना अधिकारी उपेंद्र दुबे व अन्य बुधवार को कठमुड़ा पहुंचे। गांव के लोगों से जानकारी एकत्रित की। बाघ को देखने वाले कोटवार फागूदास ने उन्हें बताया कि उसने खेत में बाघ को प्रत्यक्ष रूप से देखा है। उपेंद्र दुबे व टीम ने भी पंजे के निशान बाघ के होने की पुष्टि की।
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कोटवार का दावा : मैंने देखा, बाघ ही कठमुंडा के कोटवार फागूदास ने बताया, कि मंगलवार की सुबह खेत गया था। मैंने अपने खेत में तिवरा की फसल लगाई है। तिवरा तोडऩे पहुंचा ही था, तभी किसी जानवर के गुर्राने की आवाज आई। मैं उस ओर गया। सामने जो देखा, मेरे रोंगटे खड़े गए। मेरे सामने कुछ दूर पर बाघ खड़ा था। उस समय तकरीबन सुबह के 11 बजे रहे होंगे। मैं चुपचाप खड़ा हो गया थोड़ी देर ही में बाघ मेरे खेत से कूदकर दूसरे खेत की ओर निकल गया। मैं भागकर गांव पहुंचा, और लोगों को यह माजरा बताया लेकिन किसी को यकीन नहीं हो रहा था। कुछ ग्रामीण साथ में मेरे खेत पर गए। मैंने उस स्थान की ओर इशारा किया जहां बाघ दिखा था। खेत की मिट्टी अभी गीली है। इसलिए जहां पर बाघ खड़ा था वहां पर उसके पांव के निशान थे। उस निशान को देखकर गांव वालों को भी मेरी बातों पर यकीन हुआ। बुधवार को भी आसपास के गांव वालों ने भी बाघ को देखने की मुझे सूचना दी।था

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