
पुराने सिक्के देकर बने लखपति... ऐसी बातों में आकर बुजुर्ग ने गंवा दिए 6 लाख रुपए, लगाई मदद की गुहार
Cg Crime news: बिलासपुर में पुराने सिक्कों के बदले से 5 से 6 लाख मिलने के झांसे में आकर 65 वर्षीय बुजुर्ग ने 6 लाख 65 हजार 929 रुपए गंवा दिए। आरोपियों की रुपए मांगने की डिमांड बढ़ती गई। इस दौरान आरोपियों ने फोन पर थाने से गाड़ी छुडा़ने के नाम पर भी रुपए ले लिए। ठगी का एहसास होने पर पीड़ित ने बिल्हा थाने पहुंच कर शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस अपराध दर्ज कर जांच कर रही है।
पुलिस के अनुसार बिल्हा शीतला मंदिर के सामने निवासी कैलाश चंद पिता मूलचंद अग्रवाल (65) जमीन खरीदी-बिक्री का काम करता है। यूट्यूब और फेसबुक के वीडियो में पुराने सिक्कों की इंटरनेशनल मार्केट में कीमत लाखों में होने वाला वीडियो देखा करता था। एक वीडियो में कैलाशचंद को मोबाइल नंबर मिला, जिस पर बात करने पर कैलाश(bsp crime news) को फोन नंबर धारक ने अपना नाम विवेकानंद शुक्ला होना बताया। विवेकानंद ने कैलाश चंद अग्रवाल ने पुराने सिक्के व नोट वाट्सएप में भेजने के लिए कहा। वाट्सएप पर पुराने सिक्के व नोट को देख साइबर ठग ने पांच व छ: लाख में बिकने का झांसा दिया।
कैलाश चंद ने सिक्के व नोट बेचने का इच्छा जाहिर की तो आरोपी ने अलग-अलग चार्ज का हवाला देकर 6 लाख 65 हजार 929 रुपए की ठगी को अंजाम दिया। आरोपी(crime news) चार्ज के नाम पर और रुपए की डीमांड कर रहे थे। बढ़ते रुपए की डीमांड देख ठगी का एहसास होने पर पीड़ित ने अलग अलग नम्बर के धारक पर आन लाइन धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज कराई। साइबर सेल के साथ आरोपियों का पता लगाने का प्रयास कर रही है।
अलग-अलग कंपनी एजेंट बन ज्यादा रुपए का देते रहे लालच
पीड़ित कैलाश चंद अग्रवाल ने बताया कि वीडियो के माध्यम से मिले नम्बर के आधार जब उन्होंने रजिस्ट्रेशन शुल्क अदा किया तो उसके बाद से विभिन्न कम्पनी के फोन नम्बर आने लगे। जीएसटी, मिटिंग चार्ज, लमेल चार्ज, डैंटी चार्ज आने के लिए डीजल चार्ज की मांग करते रहे। एक बार तो आरोपियों ने बताया कि वह पुराने रुपए व सिक्के लेने आ रहे थे। उनकी गाड़ी पुलिस ने पकड़ लिया है। साइबर ठगों ने गाड़ी छुड़ाने के लिए पुलिस को देने वाले रुपए भी कैलाश चंद से वसूल किया।
एक्सपर्ट व्यू...
साइबर अपराध से बचाव केवल जागरुकता ही है, इंटरनेट का इंस्तेमाल करने वाले गूगल पर मिलने वाले मोबाइल नम्बर का उपयोग(online thagi) न करें क्योंकि वह अधिकृत नहीं होते।बैंक हो या यूपीआई हर किसी का एक एप होता है और उस एप में कस्टमर केयर नंबर भी होते हैं। कोई लेनदेन या अन्य परेशानी होने पर एप में उपलब्ध कस्टमर केयर का नंबर ही इस्तेमाल करना चाहिए।
धमेंद्र वैष्णव, एसीसीयू प्रभारी
Published on:
22 May 2023 03:58 pm

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