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गुरु व चित्रा योग में एेश्वर्यदात्री मां लक्ष्मी की होगी आराधना, मांगेंगे सुख-समृद्धि का वरदान

सुबह से लेकर रात तक माता के स्वागत के लिए हर तरफ मिट्टी के दीए जलाना उत्तम होता है।

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Diwali Festival

बिलासपुर. दीपावली का पर्व गुरुवार को चित्रा नक्षत्र के योग के साथ मनाया जाएगा। ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक गुरुवार एेश्वर्यदायी मां लक्ष्मी की आराधना का दिन माना जाता है। इस बार चित्रा नक्षत्र के साथ अद्भुत योग बन रहा है, जो बहुत पुण्यकारी है। हर घर में सुबह से लेकर देर रात तक एेश्वर्यदायी मां लक्ष्मी की आराधना की जाएगी। एेसी मान्यता है कि इस दिन मां लक्ष्मी पृथ्वी लोक में भ्रमण करने आती हैं। इस दौरान वे अपने भक्तों को कृपा प्रदान करती हैं। ज्योतिष मार्तण्ड डॉ.राजेश कुमार ने बताया कि दीपावली में मां लक्ष्मी की आराधना से पूरे परिवार को मां लक्ष्मी की कृपा मिलती है। आदिकाल से ही मां लक्ष्मी, महाकाली व महासरस्वती की पूजा भगवान गणेश के साथ की जाती है। इसी परंपरा के तहत आज भी पूजन का विधान है। ज्योतिषाचार्य एवं वास्तुविद डॉ. उद्धव श्याम केसरी ने बताया कि मां लक्ष्मी की पूजा शुभ मुहूर्त में करना पुण्यकारी होता है। सुबह से लेकर रात तक माता के स्वागत के लिए हर तरफ मिट्टी के दीए जलाना उत्तम होता है।
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फूल-फल व पूजा सामग्री की डिमांड : दिवाली के दिन खास तौर पर मां लक्ष्मी की पूजा की जाती है। इसके लिए आवश्यक सामग्री दीया-बाती, रंगोली, फूल माला, फल एवं लाई-बताशे की खूब खरीदारी हुई। गोलबाजार, बृहस्पति बाजार, शनिचरी, बुधवार सहित शहर के कई चौक-चौराहों में इन सामग्रियों की दुकानें सजी थीं।
लाई-बताशे व कमल का पुष्प करें अर्पित : ज्योतिषाचार्य पंडित महेश्वर प्रसाद उपाध्याय ने बताया कि मां लक्ष्मी की पूजा में कमल का फूल महत्वपूर्ण होता है। इसके साथ ही भोग में चाहे 56 भोग हो लेकिन लाई व बतासा महत्वपूर्ण होता है। मां को कमल का पुष्प अर्पित कर लाई व बताशे का भोग अवश्य अर्पित करें।
मां लक्ष्मी की पूजा के लिए मुहूर्त : मां लक्ष्मी की पूजा के लिए गुरुवार को तीन शुभ मुहूर्त हैं। संत जलाराम मंदिर के पुजारी पंडित ब्रह्मदत्त मिश्रा के अनुसार सुबह 9 से 11 बजे तक वृश्चिक स्थिर लग्न, शुक्र, बुध की होरा एवं चल चौघडि़या का आरंभ तथा शाम साढ़े 4 बजे से शाम ६ बजे तक। सुबह 11 बजे से दोपहर 1 बजे तक धनु लग्न केन्द्र में चंद्र शुक्र का शुभ योग, चंद्र की होरा विजय अभिजीत मुहूर्त गुरु की होरा का उत्तरार्ध समय शुभ चौघडि़या एवं शाम छह बजे से शाम साढ़े सात बजे तक मेष, लग्न बुध, गुरु केन्द्र में, बुध, चंद्र की होरा, अमृत चौघडि़या गोधुली बेला एवं लक्ष्मी योग तथा रात्रि 12 बजे से रात्रि 2 बजे तक कर्क लग्न शुक्र बुध की होरा लाभ चौघडि़या मुहूर्त है। मध्यान्ह 1 बजकर 30 मिनट से मध्यान्ह 3 बजे तक मकर लग्न, बुध, गुरु केन्द्र में, चंद्र शुक्र स्थित वृषभ लग्न, चंद्र शुन त्रिकोण में गुरु की होरा एवं चौघडि़या प्रदोष काल में शुभ मुहूर्त है।

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नरक की यातनाओं से मुक्ति पाने यमराज को अर्पित किए मिट्टी के 14 दीप : कार्तिक कृष्ण पक्ष की चर्तुदशी को नरक चौदस अथवा रूप चौदस कहा जाता है। बुधवार को नरक चौदस का पर्व बुधवार को भक्तिभाव के साथ मनाया गया। हर घर में गवान यमराज के साथ मां लक्ष्मी की पूजा-अर्चना की गई। एेसी मान्यता है कि दीपोत्सव के दूसरे दिन यमराज की पूजा का विधान है। इस दिन घर के बाहर दक्षिण दिशा में 14 मिट्टी के दीए यमराज को अर्पित करने से नरक की यातनाओं से मुक्ति मिलती है। इसी कामना के साथ हर घर में यमराज को मिट्टी के दीए घर के मुख्यद्वार पर जलाए गए। घर आंगन में सुंदर रंगोली सजाकर पूजा की गई। चारों ओर रोशनी करते हुए मां लक्ष्मी का आह्वान किया गया। ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक नरक चौदस की तिथि बहुत महत्वपूर्ण मानी गई है। इसलिए शुभ मुहूर्त में पूजा करते हुए सभी ने आशीर्वाद मांगा।
यमराज हैं मृत्यु के देव : मृत्यु के देव यमराज की पूजा का विधान कार्तिक कृष्ण पक्ष की चर्तुदशी को करते हंै। पुराणों में कथा के मुताबिक इस दिन जो भी घर में दीप जलाता है उसको मृत्यु के उपरांत नरक की यातनाओं से मुक्ति मिलती है।

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