
ये है श्री राम जी के जन्म से जुडी महत्वपूर्ण कहानी, ग्रन्थ और पुराणों में भी है उल्लेख
बिलासपुर. श्री घोंघा बाबा मंदिर में चल रही श्रीराम कथा के तृतीय दिवस में बाल विदुषी विजया जी ने श्रीराम जी के जन्म की कथा की व्याख्या की, उन्होंने बताया कि भगवान श्रीराम धर्म के मूर्तिमान रूप हैं जो मर्यादा पुरुषोत्तम के रूप में धरती पर आए और श्री कृष्ण भी धर्म के ही रूप हैं जो आनंद के रूप में धरती पर आए। (shri ram birth story) विजया जी ने बताया कि श्री राम जी ने जो किया है वह अनुकरणीय है और श्री कृष्ण ने जो कहा है वह अनुकरणीय है।
उन्होंने कहा कि श्री दशरथ जी महाराज संयम के प्रतीक हैं और रावण असंयम का प्रतीक है और राम कथा का मर्म ही यही है की संयमी के घर भगवान आते हैं और राक्षसत्व का विनाश करते है। (ram mandir) श्री राम जिस माता से जन्म लेकर आते है। वे कौशल्या ज्ञानमयी है। सुमित्रा जी भक्ति और कैकई जी कर्म की प्रतीक है। भगवान श्री राम ज्ञान कर्म और भक्ति की पूर्णता के लिए धरती पर आते है। जब चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को पुनर्वसु नक्षत्र में सूर्य, मंगल शनि, वृहस्पति तथा शुक्र अपने-अपने उच्च स्थानों में विराजमान थे, कर्क लग्न का उदय होते ही महाराज दशरथ की बड़ी रानी कौशल्या ने एक शिशु को जन्म दिया। यह शिशु अत्यंत सुंदर, नील वर्ण और चुंबकीय आकर्षण वाला था। (shri ram katha hindi) जो भी उस शिशु को देखता अपनी दृष्टि उस से हटा नहीं सकता था। (religious news) इसके पश्चात् शुभ नक्षत्रों और शुभ घड़ी में महारानी कैकेयी ने एक तथा तीसरी रानी सुमित्रा ने दो तेजस्वी पुत्रों को जन्म दिया। चारों पुत्रों के जन्म से पूरी अयोध्या में उत्सव मनाये जाने लगे। राजा दशरथ के पिता बनने पर देवता भी अपने विमानों में बैठकर पुष्प वर्षा करने लगे। (hindu religious story) अपने पुत्रों के जन्म की खुशी में राजा दशरथ ने अपनी प्रजा को बहुत दान दक्षिणा दिया। पुत्रों के नामकरण के लिए महर्षि वशिष्ठ को बुलाया गया तथा उन्होंने राजा दशरथ के चारों पुत्रों के नामकरण संस्कार करते हुए उन्हें रामचन्द्र, भरत, लक्ष्मण और शत्रुघ्न नाम दिए। संगीतमय कथा के दौरान पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया था। कथा को सुनने बड़ी संख्या में भक्तजन उपस्थित थे।
Published on:
10 Aug 2019 07:00 am
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