
बिलासपुर हाईकोर्ट और अधिवक्ताओं के बीच छाप छोड़ गए वरिष्ठ अधिवक्ता रामजेठमलानी
बिलासपुर. वरिष्ठ अधिवक्ता और पूर्व केंद्रीय मंत्री रामजेठमलानी के निधन की खबर से यहां विधि पेशे से जुड़े अधिवक्ताओं में शोक की लहर दौड़ गई। अधिवक्ताओं ने बताया कि दो चर्चित केस के कारण राम जेठमलानी का नाम बिलासपुर से जुड़ा है। एक डॉ विनायक सेन का मामला और दूसरा जग्गी हत्याकांड मामले की पैरवरी करने वो यहां आए थे। किसी ने उनकी सहजता को याद किया तो किसी ने उनके सालों चलने वाले सिविल प्रकरण के लिए बतौर केंद्रीय मंत्री रहते हुए कानून में संशोधन करने को लेकर उनकी दिलेरी को लेकर अपनी बात रखी।
अधिवक्ताओं ने बताया कि पूर्व केंद्रीय मंत्री रहे वरिष्ठ अधिवक्ता राम जेठमलानी यहां जग्गी हत्याकांड में जेल में बंद रहे पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के पुत्र पूर्व विधायक अमित जोगी के जमानत याचिका में बहस करने के लिए आए थे। उस समय उन्होंने यहां नार्मल स्कूल के पुराने हाईकोर्ट भवन में पूर्व विधायक अमित जोगी के जमानत के लिए जिरह की थी। जिरह के बाद उन्होंने यहां बार के अधिवक्ताओं के साथ बैठकर चर्चा की।
इसके बाद गत जनवरी 2011 में वे यहां नक्सलियों के समर्थन के आरोप में जेल में बंद डॉ. विनायक सेन की जमानत याचिका में बहस करने के लिए नए हाईकोर्ट भवन बोदरी में आए थे। हाईकोर्ट में जमानत याचिका पर बहस करने के बाद वे यहां छत्तीसगढ हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों और सदस्य अधिवक्ताओं से मिले और उनके साथ अपने अनुभव साझा किए जिससे यहां के अधिवक्ता उनके सहज और मृदुभाषिता के कायल हैं।
हाईकोर्ट अधिवक्ता मीना शास्त्री ने उनके निधन पर शोक जताते हुए कहा कि उनके कठोर निर्णय के लिए उन्हें कभी भी भुलाया नहीं जा सकता। सालों चलने वाले सिविल मामले के निबटारने के लिए उन्होंने केंद्रीय कानून मंत्री रहते हुए 2002 में अमेंडमेंट किया इसको लेकर अधिवक्ताओं ने उनकी खिलाफत की परंतु वे अपने निर्णय से नहीं डिगे और अपने पद से इस्तीफा दे दिया इस क्रांतिकारी कदम के लिए उन्हें सदैव याद किया जाता रहेगा।
Published on:
08 Sept 2019 08:49 pm
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