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पुत्रदा एकादशी : निकाली गई भव्य निशान यात्रा, खाटू श्याम की हुई पूजा-अर्चना

जय श्री श्याम खाटू मंदिर समिति का आयोजन, खाटू श्याम का हुआ शृंगार व रात में महाआरती

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पुत्रदा एकादशी : निकाली गई भव्य निशान यात्रा, खाटू श्याम की हुई पूजा-अर्चना

पुत्रदा एकादशी : निकाली गई भव्य निशान यात्रा, खाटू श्याम की हुई पूजा-अर्चना

बिलासपुर. सोमवार को पुत्रदा एकादशी का व्रत किया गया। इस अवसर पर खाटू श्याम मंदिर में विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई। सुबह भव्य निशान यात्रा निकाल कर श्रद्धालुओं ने खाटू श्याम को निशान अर्पित किया। वहीं विशेष शृंगार व पूजन कर खाटू श्याम के समक्ष शीश नवाकर सुख-समृद्धि की कामना की।
खाटू श्याम मंदिर में एकादशी उत्सव भक्तिमय वातावरण में मनाया गया। मंदिर में सुबह से लेकर देर रात तक वैदिक विधियों से पूजन अर्चन किया गया। पुत्रदा एकादशी का व्रत पुत्र प्राप्ति के उद्देश्य से किया जाता है। इसलिए इस व्रत को करने वाले साधक मंदिर पहुंचे। पूजन करते हुए भगवान के समक्ष शीश नवाकर आशीर्वाद मांगा। पूजन की शुरुआत श्याम प्रभु की मंगला आरती और भोग हुआ। उसके बाद भव्य शृंगार किया गया। सुबह 9 बजे से निशान यात्रा का आयोजन किया गया जो श्री राम मंदिर तिलक नगर से निकलकर सदर बाजार, गोल बाजार, कोतवाली चौक होते हुए खाटू श्याम मंदिर तक पहुंची। इस निशान यात्रा में सैंकड़ों भक्त अपनी अजऱ्ी रूपी ध्वज प्रभु के श्री चरणों में अर्पित करने पहुंचे। संध्या 7.30 बजे से भजन संध्या का आयोजन हुआ जिसमें स्थानीय कलाकारों और श्याम भक्तों द्वारा श्याम भजन गाकर प्रभु को रिझाया गया। हारे के सहारे आजा तेरा दास पुकारे आजा...,लेके हाथों में निशान..., दीनानाथ मेरी बात..., श्याम बाबा को शृंगार मन भावे..., राधा रानी का जादू कन्हैया पे छा रहा...सहित अनेक भजनों से भक्तों ने प्रभु को रिझाया। मध्य रात्रि में महाआरती के बाद प्रसाद वितरण हुआ। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

३१ किलो ऊन से किया खाटू श्याम का शृंगार
खाटू श्याम अपने अलग-अलग शृंगारों के लिए प्रसिद्ध है। इस बार ठंड को देखते हुए ऊन की मालाओं का भव्य शृंगार किया गया। 31 किलो ऊन से प्रभु को बड़े ही सुंदर तरीके से सजाया गया। इस खास तरह के शृंगार को देखकर श्रद्धालु आनंदित हुए।

व्यंकटेश मंदिर में हुई पूजा-अर्चना
पुत्रदा एकादशी के अवसर पर व्यंकटेश मंदिर में पूजन कार्यक्रम किया गया, जिसमें सुबह भगवान व्यंकटेश का विधि-विधान से पूजन किया गया। अभिषेक शृंगार कर आरती व भोग अर्पित किया गया। शाम को मंदिर परिसर में भजन के माध्यम से साधकों ने भगवान की महिमा का बखान किया। इसी तरह से मंदिर में रात के समय महाआरती करते हुए भगवान का आशीर्वाद लिया।