
Video : दो सौ करोड़ से अधिक के कारोबारी राजेश अग्रवाल के यहां आयकर विभाग की दबिश
बिलासपुर. छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े रियल स्टेट और कोयला कारोबारी राजेश अग्रवाल के एक दर्जन से अधिक ठिकानों पर भोपाल और रायपुर के आयकर अधिकारियों ने सुबह दबिश दी। आयकर अधिकारियों के सुबह आफिस एवं घर पहुंचने पर दरवाजा नहीं खोलने पर दरवाजा तोड़कर अंदर घुसे सभी कर्मचारियों के मोबाइल जब्त कर लिया गया। आयकर अधिकारियों ने फिलहाल कम्प्यूटर, लैपटॉप, पैन ड्राइव सहित सभी दस्तावेजों को अपने अधिकार में कर जांच की कार्रवाई की जा रही है। आयकर विभाग ने पिछले वर्ष भी राजेश अग्रवाल के रायपुर, बिलासपुर, अंबिकापुर, जयरामनगर, कोलकाता के एक दर्जन ठिकानों पर सर्वे की कार्रवाई की थी। एक वर्ष के बाद आयकर विभाग पूरी तैयारी और पुख्ता सबूतों के साथ छापे मारी की कार्रवाई कर रहा है।
आज सुबह तड़के ४ बजे आयरक विभाग के करीब ५० से अधिक अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने श्रीकांत वर्मा मार्ग स्थित राजेश अग्रवाल (बुतरु) के हिन्द कोल वेनिफिकेशन एवं व्यापार विहार रामापोर्ट कार्यालय में छापे मारी की कार्रवाई की। यह कार्रवाई एक साथ देश के एक दर्जन अधिक ठिकानों पर की गई है। ये इस वर्ष की अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई बताई जा रही है। ज्ञात हो कि हिन्द कोल वेनिफिकेशन एवं स्वर्ण जयंती नगर कॉलोनी समेत जमीन के कारोबार में यह कंपनी पिछले दस वर्षों से सक्रिय है। जानकारी के अनुसार प्रदेश के कांग्रेस, भाजपा एवं झारखंड के एक दबंग पूर्व मुख्यमंत्री के तार भी इस कंपनी से जुड़े बताए जा रह ेहैं।
तेरह गाडिय़ों एवं एक बस में पहुंचे अधिकारी : राजेश अग्रवाल के शहर में स्थित ६ ठिकानों पर एवं घरों में छापामार कार्रवाई करने के लिए आयकर विभाग के भोपाल एवं रायपुर के अधिकारी व कर्मचारी तेरह गाडिय़ों एवं एक बस में पहुंचे थे। इस छापेमार की कार्रवाई में स्थानीय अधिकारियों को शामिल नहीं किया गया है। पूरी तरह से गोपनीय इस कार्रवाई की जानकारी स्थानीय अधिकारियों को भी नहीं थी। जानकारी मिली है कि यह कार्रवाई सीधे मुख्य आयकर आयुक्त के निर्देश पर की गई है। अधिकार पल-पल की रिपोर्ट से आयुक्त को अवगत करा रहे हैं।
दो सौ करोड़ से अधिक का कारोबार : नोट बंदी के बाद से आयकर विभाग की नजर हिन्द कोल वेनिफिकेशन एवं स्वर्ण जयंती नगर के निर्माता राजेश अग्रवाल की कंपनी पर थी। जानकारी के अनुसार आयकर डेकलेरेशन २०१६ के दौरान भी कंपनी ने बड़ी राशि विभाग को सरेंडर की थी। इसके बाद ही आयकर विभाग की नगर इस कंपनी पर थी।
Published on:
06 Jun 2018 12:14 pm
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