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ऊर्जा संरक्षण में एसईसीआर देशभर में दूसरे स्थान पर

दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे में ऊर्जा संरक्षण के लिए गैर परंपरागत ऊर्जा स्त्रोतों का अधिक से अघिक इस्तेमाल किया जा रहा है 

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Kajal Kiran Kashyap

Dec 22, 2016

secr bilaspur

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बिलासपुर. रेल मंत्रालय और क्षेत्रीय रेलों द्वारा विभिन्न ऊर्जा दक्षता प्रौद्योगिकियों को अपनाने और अन्य ऊर्जा संरक्षण प्रयासों के कारण इस वर्ष भारतीय रेलवे ने 27 राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण पुरस्कार (एनईसीए) प्राप्त किए हैं, जो रेलवे द्वारा जीते गए सर्वाधिक पुरस्कार है। इनमें ऊर्जा संरक्षण के उपायों को बेहतर तरीके से क्रियान्वित करने पर दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे को 2015-16 का राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण के द्वितीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।


दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे में ऊर्जा संरक्षण के लिए गैर परंपरागत ऊर्जा स्त्रोतों का अधिक से अघिक इस्तेमाल किया जा रहा है जिसमें कार्यालय भवनों, स्टेशनों, समपार फाटकों, अस्पतालों तथा रनिंग रूम आदि में सोलर प्लांट की स्थापना की गई है एवं साथ ही इस रेलवे में 3 फेस लोकोमोटिव का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। साथ ही साथ लोको पायलटों को भी इस बारे में निरंतर निर्देश दिए जाते हैं कि ऊर्जा की बचत ज्यादा से ज्यादा कैसे करें।

ये पुरस्कार हर वर्ष भारत सरकार के विद्युत मंत्रालय के तत्वावधान में ऊर्जा दक्षता ब्यूरो (बीईई) द्वारा जनता को ऊर्जा की महत्ता के बारे में जागरूक करने के लिए ऊर्जा दक्षता उपकरणों और प्रणालियों का उपयोग करने और विभिन्न ऊर्जा गहन क्षेत्रों का संरक्षण करने के बारे में प्रदान किए जाते हैं। इस वर्ष विभिन्न श्रेणियों में प्राप्त 921 आवेदनों में से चयन 156 विजेताओं का चयन किया गया था।


22 श्रेणियों में पुरस्कार : ये पुरस्कार रेलवे, अस्पतालों, कार्यालय भवनों, उद्योग, बिजली, संयंत्र आदि जैसी 22 प्रमुख श्रेणियों में प्रदान किए जाते हैं, इन श्रेणियों में बड़े और मध्यम स्तर के उद्योगों के 53 विभिन्न उपक्षेत्र शामिल हैं। इनका चयन ऊर्जा दक्षता ब्यूरो के अधीन पुरस्कार मूल्यांकन समिति (बीईई) की सिफारिशों के आधार पर विशिष्ट ऊर्जा और ऊर्जा संरक्षण की पहलों के आधार पर किया जाता है। भारतीय रेलवे को राष्ट्रीय स्तर पर ऐसी महत्वणपूर्ण उपलब्धियां रेल मंत्री सुरेश प्रभु के मार्गदर्शन और निर्देशों के फलस्वरूप अर्जित हुई हैं। उन्होंने एक मुख्य क्षेत्र के रूप में ऊर्जा संरक्षण उपायों की पहचान की, जो शीर्ष स्तर से दिशा-निर्देशों के माध्यम से ऐसे उपायों को लागू करने में महत्वपूर्ण रहे।


202 मिलियन यूनिट की बचत : भारतीय रेलवे के इन प्रयासों के फलस्वरूप कर्षण क्षेत्र में (यानि कर्षण खपत का 1.5 प्रतिशत) 202 मिलियन यूनिट बिजली की बचत हुई और गैर-कर्षण क्षेत्र (जो गैर-कर्षण खपत का 1.8 प्रतिशत है) में 45 मिलियन यूनिट बिजली की भी बचत हुई। ऐसा नई सुविधाओं में जुड़ाव लोड में 12 प्रतिशत की वृद्धि के बावजूद हुआ। रेलवे के इस प्रयास से लगभग 40 मेगावाट से अधिक बिजली उत्पादन क्षमता की बचत हुई।


यह है योजना : रेल मंत्रालय के विद्युत ऊर्जा प्रबंधन निदेशालय ने ऊर्जा तीव्रता और बिजली की खपत को कम करने के लिए क्षेत्रीय रेलों द्वारा लागू करने के लिए अनेक नीतियां तैयार की। इनमें कुछ नीतियां इस प्रकार है-जिसमें सभी रेलवे इमारतों और प्रतिष्ठानों पर 100 प्रतिशत एलईडी रोशनी की स्थापना। 3 चरण ऊर्जा दक्षता इंजनों का उपयोग करना। नए रेलवे स्टेशनों के लिए नेट शून्य ऊर्जा भवन की अवधारणा। रेलवे अनुप्रयोगों में बीईई स्टार युक्त उपकरणों का उपयोग। ऊर्जा की खपत पैटर्न का पता लगाने के लिए मांग प्रोफाइल और वास्तविक स्तर पर उपयोग के मूल्यांकन के लिए बड़े लोड केन्द्रों की ऊर्जा ऑडिट।