बिलासपुर. हाथी में राखी लिए जेल की दीवारों को ताकती बहनों का चेहरा रक्षाबंधन के पवित्र अवसर पर मन को भारी कर देता है। बहन को अपने भाई की
कलाई पर राखी बांधने जेल आना पड़ता है, ये तो बहन का प्यार है लेकिन दूसरा पक्ष यह भी है कि भाई के करम की वजह से बहन को ये दिन देखना पड़ता है। ऐसे
में बहन की रक्षा के साथ एक शपथ यह भी हो कि भाई को राखी बांधने के लिए बहन को कभी जेल तक आने की नौबत ना आए।खैर बुधवार को बिलासपुर सेंट्रल जेल के
बाहर अपने भाई को राखी बांधने आईं बहनों की भीड़ जुटी थी, लेकिन बहनों को राखी बांधने की इजाजत नहीं दी गई थी। जेल के मेन गेट के बाहर ही ‘मुलाकात
बंद है’ का बोर्ड लगा था। बाहर बॉक्स रख कर बहनों से राखियां कलेक्ट की जा रही थीं। रक्षाबंधन के दिन भी अपने भाइयो ंसे ना मिल पाने का दु:ख बहनों के
चहेरों से टपक रहा था। कोविड के बाद से अब तक जेल में राखी का त्योहार नहीं मनाया जा रहा है। जेल अधीक्षक खोमेश मंडावी ने बताया कि जेल मुख्यालय
के आदेशानुसार पाबंदियां लगाई गई हैं। राखी से पहले से ही जेल में राखी भिजवाने की व्यवस्था कर दी गई थी।