
Hindu Calender: विजया एकादशी हर साल फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को रखा जाता है। यह फाल्गुन और मार्च का पहला एकादशी व्रत है। विजया एकादशी का व्रत रखने और भगवान विष्णु की पूजा करने से कार्यों में सफलता प्राप्त होती है। यदि आपको किसी विशेष कार्य में सफलता प्राप्त करनी है तो विजया एकादशी का व्रत अवश्य रखना चाहिए. इस बार विजया एकादशी 6 और 7 मार्च दो दिन रहेगी। एकादशी तिथि प्रारंभ 6 मार्च को सुबह 6 बजकर 30 मिनट से होगा जो कि 7 मार्च को सुबह 04 बजकर 13 मिनट पर समाप्त होगी। गृहस्थजन 6 मार्च को और संतजन 7 मार्च को जया एकादशी का व्रत रखेंगे।
पूजा विधि
1. दशमी तिथि की रात को सात्विक भोजन करें और ब्रह्मचर्य का पालन करें।
2. एकादशी तिथि की सुबह सूर्योदय से पहले उठें और स्नान करें।
3. स्वच्छ वस्त्र धारण करें और पूजा स्थान को साफ करें।
4. भगवान विष्णु की मूर्ति स्थापित करें और दीप प्रज्वलित करें।
4. भगवान विष्णु को फल, फूल, मिठाई और दीप अर्पित करें।
5. विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करें।
6. आरती करें और प्रसाद वितरित करें।
7. द्वादशी तिथि की सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उपवास खोलें।
कब है विजया एकादशी
हिंदू कैलेंडर के अनुसार, फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत 06 मार्च दिन बुधवार को सुबह 06 बजकर 30 मिनट से होगी। यह तिथि 07 मार्च दिन गुरुवार को प्रात:04 बजकर 13 मिनट तक मान्य रहेगी। उदयातिथि के आधार पर विजया एकादशी का व्रत 6 मार्च बुधवार को है और यह 7 मार्च गुरुवार को भी है जो लोग 6 मार्च को विजया एकादशी का व्रत रखेंगे, वे सूर्योदय के साथ ही भगवान विष्णु की पूजा कर सकते हैं क्योंकि उस समय से लाभ उन्नति मुहूर्त रहेगा। सुबह में आप 06:41 बजे से लेकर सुबह 09 बजकर 37 मिनट के बीच कभी भी पूजा पाठ कर लें। वहीं जो लोग 7 मार्च को विजया एकादशी का व्रत रखेंगे, वे सुबह में शुभ उत्तम मुहूर्त 06:40 बजे से 08:08 एएम के बीच पूजा कर सकते हैं।
विजया एकादशी की व्रत कथा
भगवान श्रीकृष्ण ने कहा है कि लंका विजय के लिए जब भगवान राम सागर तट पर वानर सेना के साथ पहुंचे तब उनके सामने सबसे बड़ी चिंता यह थी कि वह सेना सहित सागर पार कैसे करें। ऐसे में लक्ष्मणजी ने भगवान राम को संबोधित करते हुए कहा कि हे प्रभु आप सबको जानते हुए भी जो यह मानवीय लीला कर रहे हैं उस कारण से आप इस छोटी समस्या को लेकर चिंतित हैं।
आपकी चिंता को दूर करने के लिए आपसे निवेदन करता हूं कि आप यहां पास में ही निवास करने वाले ऋ षि बकदाल्भ्य से मिलें। ऋ षि यहां से आगे का मार्ग सुझा सकते हैं। लक्ष्मणजी के अनुनय पूर्ण वचनों को सुनकर भगवान राम बकदाल्भ्य ऋ षि के पास गए। ऋ षि को अपनी सारी परेशानी बताई और कोई मार्ग सुझाने के लिए कहा। ऋ षि ने बताया कि आप सेना सहित फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की एकादशी को सेना सहित भगवान नारायण की पूजा करें। यह विजया नाम की एकादशी ही आपको आगे ले जाने का मार्ग बनाएगी।
एक कलश पर पल्लव रखकर भगवान नारायण की प्रतिमा स्थापित करके इनकी पूजा करें। रात्रि में जागरण करते हुए भगवान का नाम स्मरण और कीर्तन भजन करें। अगले दिन सुबह भगवान की पूजा करके ब्राह्मण को दान दक्षिणा दें। इस व्रत से प्रतिष्ठा, विजया, संकट से मुक्ति और मोक्ष की प्राप्ति होती है। जो इस एकादशी व्रत की कथा को सुनता और पढ़ता है उसे वाजपेयी नामक उत्तम यज्ञ का पुण्य प्राप्त होता है।
व्रत का महत्व
1. विजया एकादशी का व्रत सभी एकादशी व्रतों में सबसे उत्तम माना जाता है।
2. यह व्रत पापों का नाश करता है व मोक्ष की प्राप्ति में सहायक होता है।
3. विजया एकादशी का व्रत रखने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है और कार्यों में सफलता मिलती है।
4. यह व्रत शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने के लिए भी किया जाता है।
Updated on:
27 Feb 2024 01:31 pm
Published on:
27 Feb 2024 12:43 pm
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