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बुधवारी के व्यापारियों व रेलवे का विवाद नहीं सुलझा, लोग परेशान

समस्याओं का अंबार: लोगों ने किया फुटपाथ पर कब्जा

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Wednesday's dealer and railway dispute did not resolve, people upset

बुधवारी के व्यापारियों व रेलवे का विवाद नहीं सुलझा, लोग परेशान

बिलासपुर. बुधवारी बाजार के व्यापारियों व रेल प्रबंधन के बीच लंबे समय से चल रहे विवाद का निपटारा नहीं हो पा रहा। इसके चलते बुधवारी बाजार बदहाल हो चला है। सड़कें जर्जर हो गईं, नालियां बजबजा रही हैं। कई लोगों ने सड़क किनारे बेजा कब्जा कर लिया, जिससे आम लोगों को परेशान होना पड़ रहा। इसे लेकर शिकायत करने वाले व्यापारियों का कहना ये कि रेल प्रबंधन उनकी सुन नहीं रहा।
दरअसल रेलवे ने बुधवारी बाजार की बसाहट के लिए १९४७-४८ से लीज देने की शुरुआत की थी, जो १९८५ तक चलती रही। इसके बाद लीज पर जमीन आवंटन रेलवे ने बंद कर दिया। १९९० तक जो थोडी बहुत मरम्मत रेलवे करवा दिया करता था, वह भी बंद कर दिया। तब से आज तक बुधवारी बाजार में न तो कभी सड़क बनी और न ही रेलवे ने बसाहट को लेकर कोई ठोस नीति बनाई। कहा जा रहा है कि रेलवे अब बुधवारी बाजार को उजाडऩे का मन बना रहा है। ऐसा इसलिए भी माना जा रहा, क्योंकि रेलवे ने पिछले 10 वर्षों से व्यापारियों से लाइसेंस शुल्क व इसका नवीनीकरण बंद कर दिया है। इससे व्यापारी परेशान हो रहे हैं।
विवाद की एक वजह ये
रेलवे का मानना है कि यहां अधिकांश दुकानें अवैध हैं। पूर्व में जिन्हें आबंटन किया गया था, उनमें अधिकांश लोग नहीं रहे। वहीं कुछ लोगों ने बिना रेलवे से अनुमति लिए अपनी दुकानें अवैध तरीके से दूसरों को बेच दी। जबकि ये लीज की जमीन-दुकान है। इस पर मालिकाना हक रेलवे का है। अब रेलवे ऐसे दुकानदारों से अपनी जगह खाली करवाना चाहता है। इसे लेकर व्यापारियों के भी अपने तर्क हैं। ये विवाद लंबे समय से चला आ रहा है, जिसका कोई नतीजा नहीं निकल सका। इसी वजह से यहां कई समस्याएं बनी हुई हैं। रेलवे यहां विकास पर ध्यान नहीं दे रहा।
रेलवे ने कराया कई बार सर्वे
रेलवे परिक्षेत्र के बुधवारी बाजार में किन-किन व्यापारियों का कब्जा है, और किन लोगों को रेलवे ने सिस्टम के तहत दुकानों का वितरण किया था, इसे लेकर कई बार सर्वे किया जा चुका है। यह १९९५ के बाद से लगातार चल रहा है। ५ सदस्यीय टीम ने दो माह पहले ही सर्वे
किया था।
रेलवे न तो लाइसेंस फीस ले रहा, न कोई सुविधा दे रहा
बुधवारी बाजार के अध्यक्ष चंद्र छाबड़ा ने बताया कि वह १९९४ के बाद से लगातार बुधवारी बाजार की समस्या को लेकर रेलवे बोर्ड और मंडल के अधिकारियों से चर्चा कर रहे हैं, लेकिन अब तक कुछ
नहीं हुआ।
दो प्रकार से हुआ है क्षेत्र में आवंटन
१९४७-४८ तक दुकानों का आवंटन प्लाट सिस्टम से होता था। इसके तहत लाइसेंसधारी व्यापारी जमीन पर रेलवे की शर्तो के अनुसार दुकानों का निर्माण करा लेता था। उसके बाद बिल्डशॉप नीति के तहत दुकानों का आवंटन हुआ। इसके तहत रेलवे ने लोहे के एंगल और दरवाजे लगाकर दुकानों का वितरण किया। यह सिलसिला १९८४-८५ तक चला।
सड़क किनारे बने फुटपाथ पर बेजा कब्जा
लोगों की सुरक्षा के लिए रेलवे प्रशासन ने बुधवारी बाजार में सड़क किनारे फुटपाथ का निर्माण कराया । लेकिन अब इन फुटपाथों पर बेजा कब्जाधारियों का कब्जा है। कहा जाता है कि इसे रेलवे के सेटलमेंट विभाग का संरक्षण प्राप्त है।