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ऐसा क्या हुआ कि एसीबी की टीम को देखते ही पटवारी छिपा टॉयलेट में, जानें मामला

एसीबी ने पटवारी तंबोली के घर सितंबर 2014 में छापेमारी कर करोड़ों की अनुपातहीन संपत्ति उजागर की थी। पटवारी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत अप

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Abhishek Jain

Aug 05, 2017

बिलासपुर. पौने 6 करोड़ की काली कमाई करने वाले तिफरा के तत्कालीन पटवारी को शुक्रवार को पेंड्रा से गिरफ्तार कर लिया गया। सुबह जब करप्शन ब्यूरो (एसीबी) की टीम उसे पकडऩे पहुंची तो वह अपने घर के टॉयलेट में जाकर छिप गया। पौन घंटे की मशक्कत के बाद एसीबी ने उसे बाहर निकाला। उसे शाम के समय विशेष न्यायाधीश (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) खिलावन राम रिगरी की अदालत में पेश किया। यहां से उसे 20 अगस्त तक न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है। गौरतलब है कि एसीबी ने पटवारी तंबोली के घर सितंबर 2014 में छापेमारी कर करोड़ों की अनुपातहीन संपत्ति उजागर की थी। पटवारी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत अपराध दर्ज किया गया था।

एसीबी की टीम ने 30 सितंबर 2014 को पटवारी विनोद कुमार तंबोली पिता सेमेलाल उर्फ किशुनलाल (58) के भारतीय नगर स्थित मकान पर छापेमारी की थी। उस समय तंबोली तिफरा के पटवारी हल्का नंबर २३ में पदस्थ था। एक पटवारी के घर पर पौने 6 करोड़ रुपए से अधिक की संपत्ति देखकर एसीबी के अफसरों की आंखें फटी की फटी रह गई थीं। घर पर 20 लाख रुपए तो केवल नगदी रकम मिली थी। इसमें से 10 लाख रुपए तंबोली की पटवारी बेटी ने तकिए के खोल और प्लास्टिक की थैली में भरकर घर के बाहर कीचड़ में फेंक दिए थे। लेकिन एसीबी के अफसरों ने यह हरकत देख ली, और कीचड़ से यह रकम बरामद कर ली। वहीं तकरीबन 1 किलो सोना व 4 किलो चांदी के जेवरात मिले थे। इसके अलावा कई स्थानों पर करोड़ों रुपए के जमीन-मकान होने के दस्तावेज बरामद किए गए थे।

बहाली के बाद से पेंड्रा में अटैच था तंबोली : छापेमारी के बाद पटवारी विनोद तंबोली कई दिनों तक सस्पैंड रहा। बाद मेंउसे पेंड्रा एसडीएम कार्यालय में अचैट किया गया था। तंबोली वर्तमान में पेंड्रा के पंचम कॉलोनी में किराए के माकान में रह रहा था। शुक्रवार सुबह उसकी गिरफ्तारी के लिए एसीबी के अफसरों को खासी मशक्कत करनी पड़ी। वह अफसरों को देखकर घर के टॉयलेट में छिप गया था। पौन घंटे बाद उसे बाहर निकाला जा सका।
ये वही पटवारी है, जिसने प्रमोशन ठुकरा दिया : पटवारी विनोद तंबोली को रिश्वत और काली कमाई का ऐसा स्वाद लगा कि वह पटवारी ही बना रहना चाहता था। वर्ष 2013 में शासन ने उसे आरआई (राजस्व निरीक्षक) के पद पर प्रमोट किया। लेकिन उसने यह प्रमोशन ठुकरा दिया। तंबोली ने वापस पटवारी बनाए रखने के लिए आवेदन दिया था।
33 साल काली कमाई से बन गया कुबेर : आरोपी पटवारी 15 फरवरी 1981 में बिलासपुर जिले में पदस्थ हुआ था। तब से वह जिले की अलग-अलग तहसील में कार्यरत रहा। वर्ष 2014 में उसके घर पर छापेमारी हुई। इस बीच उसने भ्रष्टाचार से अकूत धन अर्जित किया। जितना जांच में पता चला सिर्फ वही संपत्ति 5 करोड़, 87 लाख की है। पटवारी का ऐश्वर्य ऐसा कि घर पर हर समय लाखों रुपए कैश रखा करता था। इनमें से 20 लाख रुपए एसीबी ने छापे के दौरान जब्त किए थे।

पटवारी 20 अगस्त तक न्यायिक रिमांड पर : एसीबी ने आरोपी पटवारी विनोद तंबोली को अदालत में पेश किया। यहां से उसे 20 अगस्त तक रिमांड पर सेंट्रल जेल भेज दिया गया है। पटवारी की गिरफ्तारी और उसे यहां लाने के बाद अदालत परिसर में गहमागहमी का माहौल रहा। पटवारी के करीबी लोग अदालत पहुंचे थे।
पटवारी की बेटी ने कीचड़ में फेंक दिए थे १० लाख रुपए : विनोद तंबोली की बेटी गतौरा में पटवारी है। छापे के दौरान उसने चालाकी दिखाने दिखाई। दबिश की भनक लगते ही उसने एक बैग व एक पॉलीथिन में ठूंसकर 10 लाख रुपए घर के पीछे कीचड़ भरे गड्ढे में फेंक दिए। उधर एसीबी के अफसर भी कम नहीं, वे तुरंत उसे ताड़ गए। उन्हें संदेह हो गया और वे घर के पिछवाड़े की तरफ पहुंच गए। बैग में 4 लाख रुपए व पॉलीथिन में 6 लाख रुपए बरामद किए।

छापे से पूर्व भी हो चुका सस्पैंड : विनोद तंबोली के खिलाफ पूर्व में भ्रष्टाचार, जमीन की गड़बड़ी के आरोप लगे। अखबारों में खबरें प्रकाशित हुईं। उसे सस्पैंड कर दिया गया था। कई साल गुजर गए, जांच का पता नहीं। आला अफसरों के हस्तक्षेप से बाद में उसे बहाल कर दिया गया था।
एसीबी को हिसाब में लगे थे 12 घंटे : सिविल लाइन थाना क्षेत्र के भारतीय नगर में पटवारी विनोद कुमार तंबोली का मकान है। वह 33 सालों से जिले में पदस्थ है। वर्तमान में तिफरा के पटवारी हलका 23 में पदस्थापना है। उसके खिलाफ कई शिकायतें मिलती रहीं। आज सुबह जब एसीबी के अफसर पहुंचे तो उन्हें उसकी संपत्ति के हिसाब-किताब में 12 घंटे लग गए। अब तक 5 करोड़, 87 लाख, 67 हजार रुपए की संपत्ति का खुलासा हुआ है। अभी घर पर रखे अन्य कीमती सामानों का आंकलन बाकी है। आगे छानबीन की जा रही है।

बेटी पटवारी, बेटा जमशेदपुर में : विनोद तंबोली को पटवारी की नौकरी इतनी पसंद आई कि उसने अपनी बेटी को भी पटवारी बनाया। शायद उसे पता था कि इसी पद में कमाई अधिक है। यही वजह है कि उसने खुद आरआई का प्रमोशन ठुकरा दिया था। वापस पटवारी बनने के लिए आवेदन दिया था। विनोद का एक भाई भी पटवारी है। बेटा टाटा के जमशेदपुर में मैनेजर है।