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गुंडागर्दी करने वाले पारा शिक्षक चेत जाए, जेल जाएंगे-मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री ने कहा कि अमर शहीद बिरसा मुंडा की जयंती और झारखंड राज्य स्थापना दिवस की खुशी पर आयोजित राजकीय समारोह में पत्थर फेंकने मारने वाले गुंडे कभी शिक्षक नहीं हो सकते...

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(पलामू,बोकारो): मुख्यमंत्री रघुवर दास ने सेवा स्थायीकरण समेत अन्य मांगों को लेकर आंदोलनरत राज्य के करीब 65 हजार पारा शिक्षकों को स्पष्ट चेतावनी दी है कि वे समय रहते चेत जाय, गुंडागर्दी करने वाले पारा शिक्षक जेल जाएंगे।


मुख्यमंत्री रघुवर दास सोमवार को पलामू जिला मुख्यालय के पुलिस लाइन में आयोजित समारोह और प्रमंडल स्तरीय चौपाल कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि अमर शहीद बिरसा मुंडा की जयंती और झारखंड राज्य स्थापना दिवस की खुशी पर आयोजित राजकीय समारोह में पत्थर फेंकने मारने वाले गुंडे कभी शिक्षक नहीं हो सकते, सरकार को ऐसे संस्कारहीन शिक्षक नहीं चाहिए, सरकार फिर से शिक्षकों की बहाली करेगी, राज्य में बड़ी संख्या में योग्य युवाओं की भरमार है, इस तरह की गुंडागर्दी करने वालों की सेवा स्थायी नहीं की जा सकती, जनता के विकास के पैसे को उनपर पर लुटाया नहीं जा सकता।

उन्होंने कहा कि पारा शिक्षकों की मांग थी कि वे साल के अन्य 364 दिन में काला झंडा दिखाते-प्रदर्शन करते, कोई दिक्कत नहीं थी, लेकिन राजकीय समारोह के दौरान लोकतंत्र को चुनौती देने वालों की गुंडागर्दी को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता, ऐसे लोगों का सही स्थान होटवार जेल ही है।


उन्होंने कहा कि वे भी एक गरीब मजदूर के बच्चे के रूप में बोरा लेकर सरकारी स्कूल में पढ़ने जाते थे, उनकी सरकार ने आज हर स्कूल में बच्चों के लिए स्कूल-डेस्क की सुविधा उपलब्ध करा दी है।


पारा शिक्षकों को विपक्षी दलों के नेताओं द्वारा प्रोत्साहन दिये जाने पर कटाक्ष करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि विपक्षी दल के लोग भी कभी सत्ता में थे, उन लोगों ने उस समय में पारा शिक्षकों की मांग क्यों नहीं पूरी कर दी गयी।


उन्होंने कहा कि पारा शिक्षक किसी राजनीतिक दल के कार्यकर्त्ता नहीं होते, 200-500 लोग ही गुंडागर्दी कर रहे है, ऐसे लोगों को चेतावनी दी जाती है, वे समय रहते सुधर जाए, पत्थरबाज शिक्षकों का वेतन नहीं बढ़ सकता है, लेकिन आने वाले समय में अन्य शिक्षकों की मांगों पर सरकार पूरी सहानुभूतिपूर्वक विचार करेगी।


रघुवर दास ने कहा कि वे टूट सकते है, लेकिन झुक नहीं सकते, क्योंकि वे मजदूर के बेटे है, संघर्ष कर और तप कर इस मुकाम पर पहुंचे है। लोकतंत्र को चुनौती देने वालों के साथ सख्ती से निपटा जाएगा, क्योंकि यह हेमंत सोरेन, गुरूजी या निर्दलीय के नेतृत्व वाली सरकार नहीं है, बल्कि पूर्ण बहुमत की मजबूत सरकार है।