
'डेथ ऑन द नील' में अली फजल भी होंगे,वही रहस्य कथा दूसरी बार
-दिनेश ठाकुर
रहस्य, रोमांच और सिहरन से भरपूर कहानियां रचने में ब्रिटिश लेखिका अगाथा क्रिस्टी ( Agatha Christie ) को वही महारथ हासिल थी, जिसके लिए इस तरह की फिल्में बनाने वाले अल्फ्रेड हिचकॉक मशहूर थे। अगाथा क्रिस्टी ने 85 साल की जिंदगी में 66 उपन्यास लिखे, जो धड़ल्ले से बिके। जैसे इन दिनों कोरोना से बचाव करने वाली दवाइयां बिक रही हैं। इन उपन्यासों की दो अरब प्रतियों की बिक्री को लेकर अगाथा का नाम गिनीज बुक में दर्ज है। इनमें से कई उपन्यासों पर दुनियाभर में 45 से ज्यादा फिल्में बन चुकी हैं। यह सिलसिला 1928 में ब्रिटिश फिल्म 'द पासिंग ऑफ मि. क्विन' से शुरू हुआ। यह 'द कमिंग ऑफ मि. क्विन' ( The coming of Mr Quin ) नाम के उपन्यास पर आधारित थी। भारत में भी अगाथा के उपन्यासों पर फिल्में बनीं। मनोज कुमार ( Manoj Kumar ) और नंदा की 'गुमनाम' (1965) 'एंड देअर वर नन' पर आधारित थी तो जीनत अमान की 'धुंध' (1973) का आधार था 'द अनएक्सपेक्टेड गेस्ट'। 'गुमनाम' का किस्सा तमिल की 'नादु इराविल' (1970) और 'अदुथाथु' (2011) तथा कन्नड़ की 'आतगरा' (2015) में दोहराया गया। 'द मिरर क्रेक्ड फ्रॉम साइड टू साइड' पर बांग्ला में 'शुभ मुहूर्त' और 'द एबीसी मर्डर्स' पर मलयालम में 'ग्रांडमास्टर' बन चुकी है।
भारत के मुकाबले हॉलीवुड के फिल्मकार अगाथा क्रिस्टी के उपन्यासों पर ज्यादा फिदा हैं। उन्होंने कुछ उपन्यासों पर तो बार-बार आजमाइश की। मसलन 'एंड देअर वर नन' पर वहां चार फिल्में बन चुकी हैं। पहली फिल्म इसी नाम से 1945 में बनी थी। शायद उसी फिल्म को देखकर भारत में 'गुमनाम' का नक्शा तैयार हुआ होगा, क्योंकि हमारे ज्यादातर फिल्मकार किताबें पढऩे के बजाय पके-पकाए माल पर हाथ साफ करने में माहिर हैं। अगाथा के उपन्यास 'डेथ ऑन द नील' पर हॉलीवुड 1978 में इसी नाम से फिल्म बना चुका है। अब वहां दूसरी 'डेथ ऑन द नील' बनी है, जिसे अक्टूबर में रिलीज करने की तैयारियां चल रही हैं। किस्सा कुछ यूं है कि मिस्र की नील नदी से गुजरते जहाज में एक शादीशुदा जोड़े की हत्या हो जाती है। जासूस हरक्यूल पॉइरट (अगाथा के उपन्यासों का लोकप्रिय किरदार) को इन हत्याओं की गुत्थी सुलझानी है। जहाज के कई यात्री शक के घेरे में हैं।
निर्देशक केनेथ ब्रेंघ की 'डेथ ऑन द नील' में टॉम बैटमैन, रसेल ब्रांड, गैल गेडॉट और डॉन फ्रेंच के साथ भारतीय कलाकार अली फजल का भी अहम किरदार है। बॉलीवुड की 'फुकरे', 'बात बन गई' और 'मिर्जापुर' जैसी फिल्मों में नजर आए अली फजल इससे पहले भी कुछ हॉलीवुड फिल्मों में काम कर चुके हैं। बॉलीवुड में फिलहाल उनकी वैसी पहचान नहीं बन सकी है, जैसी उनके समकालीन दूसरे अभिनेता बना चुके हैं।
Published on:
22 Aug 2020 02:28 am
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