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Birthday special: मन्ना डे ने संगीत जगत को दिए नए आयाम

भारतीय सिनेमा जगत में मन्ना डे को एक ऎसे पाश्र्वगायक के तौर पर याद किया जाता है जिन्होंने अपने लाजवाब पाश्र्वगायन के जरिये शास्त्रीय संगीत को विशिष्ट पहचान दिलायी

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Sudha Verma

May 01, 2015

manna dey

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भारतीय सिनेमा जगत में मन्ना डे को एक ऎसे पाश्र्वगायक के तौर पर याद किया जाता है जिन्होंने अपने लाजवाब पाश्र्वगायन के जरिये शास्त्रीय संगीत को विशिष्ट पहचान दिलायी। प्रबोध चन्द्र डे उर्फ मन्ना डे का जन्म एक मई 1919 को कोलकाता में हुआ था। मन्ना डे के पिता उन्हें वकील बनाना चाहते थे लेकिन उनका रझान संगीत की ओर था और वह इसी क्षेत्र में अपना करियर बनाना चाहते थे । उन्होंने संगीत की प्रारंभिक शिक्षा अपने चाचा के.सी.डे से हासिल की ।

मन्ना डे के बचपन के दिनों का एक दिलचस्प वाक्या है । उस्ताद बादल खान और मन्ना डे के चाचा एक बार साथ. साथ रियाज कर रहे थे. तभी बादल खान ने मन्ना डे की आवाज सुनी और उनके चाचा से पूछा यह कौन गा रहा है । जब मन्ना डे को बुलाया गया तो उन्होंने अपने उस्ताद से कहा "बस. ऎसे ही गा लेता हूं" लेकिन बादल खान ने मन्ना डे की छिपी प्रतिभा को पहचान लिया । इसके बाद वह अपने चाचा से संगीत की शिक्षा लेने लगे । मन्ना डे 40 के दशक में अपने चाचा के साथ संगीत के क्षेतऊ में अपने सपनों को साकार करने के लिए मुंबई आ गये। वर्ष 1943 में फिल्म "तमन्ना" में बतौर पाश्र्वगायक उन्हें सुरैया के साथ गाने का मौका मिला । हालांकि इससे पहले वह फिल्म रामराज्य में कोरस के रूप में गा चुके थे । दिलचस्प बात है. यही एक एकमात्र फिल्म थी. जिसे राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने देखा था ।

वर्ष 1950 में संगीतकार एस. डी. बर्मन की फिल्म मशाल में मन्ना डे को "ऊपर गगन विशाल" गीत गाने का मौका मिला । फिल्म और गीत की सफलता के बाद बतौर पाश्र्वगायक वह अपनी पहचान बनाने में सफल हो गये । मन्ना डे को अपने करियर के शुरआती दौर में अधिक शोहरत नहीं मिली । इसकी मुख्य वजह यह रही कि उनकी सधी हुई आवाज किसी गायक पर फिट नहीं बैठती थी । यही कारण है कि एक जमाने में वह हास्य अभिनेता महमूद और चरित्र अभिनेता प्राण के लिए गीत गाने को मजबूर थे।

मन्ना डे को फिल्मों में उल्लेखनीय योगदान के लिए 1971 में पदमश्री पुरस्कार और .2005 में पदमभूषण पुरस्कार से सम्मानित किया गया1इसके अलावा वह 1969 में फिल्म मेरे हुजूर के लिये सवश्रेष्ठ पाश्र्वगायक. 1971 में बंगला फिल्म ..निशि पदमा ..के लिये सर्वश्रेष्ठ पाश्र्वगायक और 1970 में प्रदर्शित फिल्म ..मेरा नाम जोकर .. के लिए फिल्म फेयर के सर्वश्रेष्ठ पाश्र्वगायक पुरस्कार से सम्मानित किये गये । मन्ना डे के संगीत के सुरीले सफर में एक नया अध्याय जुड़ गया जब फिल्मों में उनके उल्लेखनीय योगदान को देखते हुये उन्हें वर्ष 2007 में दादा साहब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया गया 1मन्ना डे ने अपने पांच दशक के कैरियर में लगभग 3500 गीत गाये 1अपने लाजवाब पाश्र्वगायन से श्रोताओ ंके दिल में खास पहचान बनाने वाले मन्ना डे 24 अक्तूबर 2013 को इस दुनिया को अलविदा कह गये।

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