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जब फिल्म के सेट पर डायरेक्टर ने राजेश खन्ना को सुनाई थी खरी-खोटी, बस मुंह से निकले थे ये 2 शब्द

राजेश खन्ना का असली नाम जतिन खन्ना था। ये नाम उनके अंकल ने उन्हें फिल्मों में आने से पहले दिया था।

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rajesh khanna

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बॉलीवुड के सदाबहार एक्टर राजेश खन्ना (Rajesh Khanna)की आज जयंती (Rajesh Khanna Birthday) है। उनका स्टरडम किसी से छुपा नहीं है। उन्होंने अपने फिल्मी कॅरियर में कई हिट फिल्में दी है। उनका जन्म 29 दिसंबर, 1942 को अमृतसर (पंजाब) में हुआ था। ये बात कम लोग ही जानते होंगे की उनका असली नाम जतिन खन्ना था। राजेश नाम उनके अंकल के के तलवार ने उन्हें फिल्मों में आने से पहले दिया था। परिवार के साथ मुंबई शिफ्ट होने के बाद राजेश खन्ना मुंबई के गिरगांव चौपाटी में रहते थे और वहीं स्कूल और कॉलेज की पढ़ाई की। बता दें कि एक बार उन्हें एक फेमस डायरेक्टर से माफी मांगनी पड़ी थी। आइए जानते हैं कि आखिर क्या था वो किस्सा...

डायरेक्टर से मांगी माफी:
फिल्म 'आनंद' की शूटिंग के दौरान का एक किस्सा बेहद मशहूर है। जब राजेश खन्ना को डायरेक्टर ऋषिकेश मुखर्जी से माफी मांगनी पड़ी थी। दरअसल, फिल्म के सेट पर राजेश खन्ना रोज दो-तीन घंटे के लिए पहुंचते और 'आनंद' की शूटिंग करते थे। आमतौर पर थोड़ा-बहुत हमेशा लेट हो जाया करते थे। लेकिन एक बार उन्हें ज्यादा देर हो गई थी। ऋषिकेश मुखर्जी सेट पर बैठे चेस खेलते रहे थे, जैसे ही राजेश खन्ना आए ऋषि दा ने उन्हें कॉस्ट्यूम-मेकअप के लिए भेज दिया। उसके बाद जैसे ही रजेश खन्ना मेकअप रूम से तैयार हो कर बाहर आए। डायरेक्टर ऋषिकेश के मुंह से एक ही शब्द निकला। उन्होंने कहा, 'पैक अप।' ये सुनकर वहां सभी हैरान हो गए। सेट पर मानों सन्नाट छा गया हो। इसके बाद राजेश को अपनी गलती का अहसास हुआ और उन्होंने डायेक्टर ऋषिकेश से माफी मांगी। साथ ही ये भी कहा कि आगे से ऐसा कभी नहीं होगा।

फिल्मों से अलावा राजनीति में रहे सक्रीय:
एक्टिंग के प्रति उनकी दीवानगी बचपन से ही थी। स्कूल के दिनों से ही थिएटर की तरफ झुकाव था। वो अक्सर नाटकों में हिसा लिया करते थे। 60 के दशक की शुरुआत में वह पहले ऐसे स्ट्रगल करने वाले न्यूकमर थे जो अपनी एम जी स्पोर्ट्स कार में बैठकर ऑडिशन देने जाया करते थे। राजेश खन्ना ने ना सिर्फ अभिनय बल्कि राजनीति में कदम रखा। वह कांग्रेस पार्टी के नेता भी बने। यही नहीं साल 2013 में उन्हें भारत सरकार की तरफ से 'पद्म भूषण' से सम्मानित किया गया। उन्होंने 18 जुलाई, 2012 को उनके 'आशीर्वाद' बंगले में आखिरी सांसें ली।