
डब्बू मलिक स्ट्रगल स्टोरी (इमेज सोर्स: म्यूजिशियन इंस्टाग्राम स्क्रीनशॉट)
Dabboo Malik Comeback Story: संगीत की दुनिया में अमाल और अरमान मलिक आज बड़े नाम हैं, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि उनकी इस चमक के पीछे उनके पिता डब्बू मलिक का दर्द, संघर्ष और त्याग छिपा है। एक समय ऐसा आया जब आर्थिक तंगी इतनी बढ़ गई कि डब्बू मलिक को अपने बच्चों को अच्छी संगीत शिक्षा दिलाने के लिए घर का सामान तक बेचना पड़ा। यही नहीं, उनकी जिंदगी में एक और तूफान आया, जब तनाव और मानसिक दबाव ने उन्हें अंदर तक तोड़ दिया। आवाज लड़खड़ाने लगी, चेहरा ढीला पड़ने लगा और हालत पैरालिसिस जैसी हो गई। डॉक्टरों ने भी स्थिति को गंभीर बताया, मगर डब्बू मलिक ने हार नहीं मानी।
उन्होंने न सिर्फ बीमारी से जंग लड़ी, बल्कि अपने बच्चों के सपनों को भी टूटने नहीं दिया। संघर्ष, त्याग और हिम्मत की यह कहानी आज भी इंस्पिरेशन है। एक पिता की वो ताकत जिसकी बदौलत दो बेटों ने दुनिया में अपनी पहचान बनाई।
21 जनवरी, 1963 को मुंबई में जन्मे डब्बू एक संगीतकार परिवार से आते हैं। पिता सरदार मलिक मशहूर म्यूजिक डायरेक्टर थे और हसरत जयपुरी उनके मामा। हालांकि घर में संगीत का माहौल था, लेकिन डब्बू मलिक की पहली पसंद संगीत नहीं, अभिनय था। उन्हें कैमरे के सामने रहना पसंद था और इसी वजह से उन्होंने अपने करियर की शुरुआत एक्टर के तौर पर की। वह ‘तिरंगा’, ‘बेटा हो तो ऐसा’, ‘बाजीगर’ और कुछ साउथ फिल्मों में भी नजर आए, लेकिन उन्हें वह पहचान नहीं मिली जिसकी वो उम्मीद कर रहे थे।
इसके बाद उन्होंने संगीत की तरफ कदम बढ़ाया। साल 2001 में उनका एल्बम ‘ये जिंदगी का सफर’ रिलीज हुआ, जिसने उन्हें पहचान दिलाई। इसके बाद उन्होंने कई फिल्मों के लिए म्यूजिक दिया और धीरे-धीरे अपनी अलग पहचान बनाई। बता दें डब्बू मलिक का असली नाम इसरार सरदार मलिक है।
एक समय ऐसा आया जब वह आर्थिक तंगी से जूझ रहे थे। डब्बू मलिक का करियर आसान नहीं था। वह अपने दोनों बेटे अमाल और अरमान को अच्छी संगीत शिक्षा दिलाने के लिए अपनी संपत्ति और निजी सामान तक बेच दिए। लगातार तनाव और परेशानियों ने उनकी सेहत पर गहरा असर डाला।
इस दौरान उनका बोलना मुश्किल हो गया, चेहरे के एक्सप्रेशन्स भी प्रभावित हुए और वह आंशिक रूप से पैरालिसिस जैसी स्थिति का सामना कर रहे थे। यह उनके जीवन का सबसे मुश्किल और डरावना समय था। लेकिन इस कठिन समय में उनके साथ सलमान खान, सोहेल खान और सलीम खान खड़े रहे। खासकर सोहेल ने उन्हें भावनात्मक और आर्थिक रूप से संभाला। धीरे-धीरे डब्बू ने खुद को संभाला और फिर से काम पर लौटे। आज डब्बू मलिक अपनी सबसे बड़ी उपलब्धि को अपने बेटों की सफलता मानते हैं। उनका कहना है, “अमाल और अरमान की कामयाबी ही मेरे जीवन का सबसे बड़ा सम्मान है।”
Published on:
20 Jan 2026 09:21 pm
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