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Death anniversary: एक्ट्रेस नहीं डाक्टर बनना चाहती थीं नर्गिस 

हिंदी फिल्मों की मशहूर अदाकारा नर्गिस ने लगभग चार दशक तक अपने बहुआयामी अभिनय से दर्शकों को चमत्कृत किए रखा 

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Sudha Verma

May 02, 2015

nargis

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हिंदी फिल्मों की मशहूर अदाकारा नर्गिस ने लगभग चार दशक तक अपने बहुआयामी अभिनय से
दर्शकों को चमत्कृत किए रखा लेकिन वह बचपन के दिनो मे अभिनेत्री नहीं डॉक्टर बनना
चाहती थीं।

पर्सनल लाइफ
कलकत्ता में एक जून 1929 को जन्मीं कनीज फातिमा
राशिद उर्फ नर्गिस के घर में मां जद्दन बाई के अभिनेत्री और फिल्म निर्माता होने के
कारण फिल्मी माहौल था. इसके बावजूद बचपन में नर्गिस की अभिनय में कोई दिलचस्पी नहीं
थी । उनकी तमन्ना डाक्टर बनने की थी जबकि उनकी मां चाहती थीं कि वह अभिनेत्री बनें
। एक दिन उनकी मां ने उनसे स्क्रीन टेस्ट के लिए फिल्म निर्माता एवं निर्देशक महबूब
खान के पास जाने को कहा । चूंकि नर्गिस अभिनय क्षेत्र में जाने की इच्छुक नहीं थीं
इसलिए उन्होंने सोचा कि यदि वह स्क्रीन टेस्ट में फेल हो जाती हैं तो उन्हें
अभिनेत्री नहीं बनना पडेगा । स्क्रीन टेस्ट के दौरान नर्गिस ने अनमने ढंग से संवाद
बोले और सोचा कि महबूब खान उन्हें स्क्रीन टेस्ट में फेल कर देंगे लेकिन उनका यह
विचार गलत निकला।

महबूब खान ने बदली किस्मत
महबूब खान ने अपनी फिल्म
"तकदीर" के लिए बतौर नायिका उन्हें चुन लिया। इसके बाद वर्ष 1945 मे महबूब खान
द्वारा ही निर्मित फिल्म "हुमाँयूं" में नरगिस को काम करने का मौका मिला 1वर्ष 1949
नरगिस के सिने कैरियर में अहम पड़ाव साबित हुआ । इस वर्ष उनकी बरसात और अंदाज जैसी
सफल फिल्मे प्रदर्शित हुयी । प्रेम त्रिकोण पर बनी फिल्म अंदाज में उनके साथ दिलीप
कुमार और राजकपूर जैसे नामी अभिनेता थे इसके बावजूद भी नरगिस दर्शको का ध्यान अपनी
ओर आकर्षित करने में सफल रही । वर्ष 1950 से 1954 तक का वक्त नरगिस के सिने कैरियर
के लिये बुरा साबित हुआ । इस दौरान उनकी "शीशा", बेवफा, आशियाना, अंबर. अनहोनी,
शिकस्त, पापी, धुन, अंगारे जैसी कई फिल्में बॉक्स आफिस पर असफल हो गयी लेकिन वर्ष
1955 मे उनकी राजकपूर के साथ श्री 420 फिल्म प्रदर्शित हुयी जिसकी कामयाबी के बाद
वह एक बार फिर से शोहरत की बुंलदियों पर जा पहुंची ।


राजकूर के साथ बनी
जोड़ी

नरगिस के सिने कैरियर मे उनकी जोड़ी राज कपूर के साथ काफी पसंद की गयी ।
राज कपूर और नरगिस ने सबसे पहले फिल्म वर्ष 1948 मे प्रदर्शित फिल्म आग मे एक साथ
अभिनय किया था । इसके बाद नरगिस ने राजकपूर के साथ बरसात, अंदाज ,जान-पहचान, प्यार,
आवारा अनहोनी, आश्यिाना, आह, धुन, पापी, श्री 420, जागते रहो,चोरी चोरी जैसी कई
फिल्मों में भी काम किया । वर्ष 1956 मे प्रदर्शित फिल्म "चोरी चोरी"नरगिस और
राजकपूर की जोडी वाली अंतिम फिल्म थी।

नरगिस बनी "मदर इंडिया"
वर्ष 1957
में महबूब खान की फिल्म मदर इंडिया ने नर्गिस के सिने कैरियर के साथ ही व्यक्तिगत
जीवन में भी बहुत महत्वपूर्ण भूमिका अदा की1इस फिल्म में नर्गिस ने सुनील दत्त की
मां का किरदार निभाया था। मदर इंडिया की शूटिंग के दौरान नरगिस को आग से सुनील दत्त
ने बचाया था 1इस घटना के बाद नर्गिस ने कहा था कि पुरानी नर्गिस की मौत हो गयी है
और नयी नर्गिस का जन्म हुआ है 1नर्गिस ने अपनी उम्र और हैसियत की परवाह किये बिना
सुनील दत्त को अपना जीवन साथी चुन लिया ।

शादी के बाद दूर हुई फिल्मो
से

शादी के बाद नर्गिस ने फिल्मों में काम करना कुछ कम कर दिया। करीब दस वर्ष के
बाद अपने भाई अनवर हुसैन और अख्तर हुसैन के कहने पर नर्गिस ने 1967 में फिल्म रात
और दिन में काम किया1इस फिल्म के लिये उन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया
गया1यह पहला मौका था जब किसी अभिनेत्री को राष्ट्रीय पुरस्कार दिया गया था। नरिगस
के सिने करियर में उनकी जोड़ी राजकपूर के साथ काफी पसंद गयी। नरगिस ने अपने सिने
करियर में लगभग 55 फिल्मों में का किया। नरगिस को अपने सिने करियर में मान-सम्मान
बहुत मिला यहां तक कि उन्हें पkश्री पुरस्कार भी प्रदान किया किया गया ।उन्हें
राज्यसभा सदस्य भी बनाया गया। अपने संजीदा अभिनय से सिने प्रेमियों को भावविभोर
करने वाली नरगिस 03 मई 1981 को सदा के लिये इस दुनिया से रूखसत हो गयी ।

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