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90 के दशक में चीजें आसान नहीं थी-‘द गॉन गेम’ की एक्ट्रेस रुखसार रहमान

मैं खुश हूं कि मेरी वेब सीरीज 'द गॉन गेम' को क्रिटिक्स और ऑडियंस का अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है। यह सीरीज मुझे करीब तीन महीने पहले लॉकडाउन के दौरान ऑफर हुई थी। सभी स्टार्स ने इसका मेजर पार्ट लॉकडाउन में घर पर ही शूट किया.....

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मुंबई

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Bhup Singh

Aug 22, 2020

Rukhsar Rehman

Rukhsar Rehman

मैं खुश हूं कि मेरी वेब सीरीज 'द गॉन गेम' को क्रिटिक्स और ऑडियंस का अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है। यह सीरीज मुझे करीब तीन महीने पहले लॉकडाउन के दौरान ऑफर हुई थी। सभी स्टार्स ने इसका मेजर पार्ट लॉकडाउन में घर पर ही शूट किया। इससे बाहरी चीजों से दिमाग हटाने में मदद मिली। मैं शुरू में थोड़ी कन्फ्यूज थी कि कैसे शूट होगा। लेकिन मेरे पति फारूक कबीर और बेटी की मदद से सबकुछ आसानी हो गया। यह कहना है 'द गॉन गेम' की अभिनेत्री रुखसार रहमान ( rukhsar rehman ) का। उन्होंने पत्रिका एंटरटेनमेंट से खास बातचीत में अपने तीन दशक लंबे कॅरियर और सीरीज की शूटिंग के अनुभव शेयर किए।

थ्रिलर पार्ट ने किया एंटरटेन
रुखसार ने बताया कि इस सीरीज के थ्रिलर पार्ट ने पूरी कास्ट को खूब एंटरटेन किया। इसको साइन करने का यही एक बड़ा कारण रहा। एक्टिंग के हिसाब से यह सीरीज काफी आसान रही। डायरेक्टर निखिल नागशे भट्ट ने काफी सपोर्ट किया। उनके दिशा—निर्देश स्पष्ट होते थे। ओटीटी के बारे में अभिनेत्री ने बताया कि जैसे पहले टीवी और बाद में सिनेमाघर का दौर आया, वैसे ही डिजिटल का दौर आया है। यह भी लम्बा चलेगा। 6 महीने पहले मैं भी डिजिटल से सहमत नहीं थी, लेकिन जिस तरह से हालात हैं, उसमें फिलहाल ओटीटी प्लेफॉर्म सबसे सही है।

रणवीर से मिल रह गई शॉक्ड
रुखसार ने बताया जब फिल्म '83' की शूटिंग के दौरान मैं रणवीर सिंह से मिली तो उनकी पुरानी बातों को सुनकर शॉक्ड रह गई। रणवीर ने बताया कि मैं रणदीप हुड्डा के साथ फिल्म 'डी' में काम कर रही थी और वह कसाब का किरदार निभाने वाले थे। हालांकि, ऐसा हुआ नहीं। मैं उनकी बात सुनकर इतनी शॉक्ड रह गई और मैंने पूछा कि आप वो हैं। क्योंकि आज वह इतने बड़े स्टार हैं।

क्रिएटिविटी से आसान हुई चीजें
जब मैं 90 के दशक में फिल्मों में आई तो चीजें इतनी आसान नहीं थी। लेकिन अब क्रिएटिवीटी और टेक्नोलॉजी के चलते बहुत सारी चीजें आसान हो गई है। पहले फिल्म पूरी होने पर अपने शॉट्स देख सकते थे, लेकिन अब शूट के तुरंत बाद शॉट देख निर्णय ले सकते हैं कि परफेक्ट हुआ या नहीं। जबकि पहले डायरेक्टर पर निर्भर करता था कि शॉट सही हुआ है या नहीं।