बचपन से ही इस गंभीर समस्या से जूझ रहे थे ऋतिक, इस कारण हाथ से फिसली बड़ी-बड़ी फिल्में, उड़ता था जमकर मजाक
Amit Kumar Singh
Publish: Mar, 17 2019 11:35:29 (IST)
बचपन से ही इस गंभीर समस्या से जूझ रहे थे ऋतिक, इस कारण हाथ से फिसली बड़ी-बड़ी फिल्में, उड़ता था जमकर मजाक

जल्द ही फिल्म 'सुपर 30' में नजर आने वाले हैं ऋतिक रोशन।

ऋतिक रोशन जो अब स्क्रीन पर अपनी पंचलाइन बोलते हैं उसमे बहुत ही दम होता है , उन्होंने बड़ी बहादुरी के साथ अपने संघर्षों को बयां किया है, और यह स्वीकार किया है कि वह केवल स्पीच थेरेपी के जरिये ही अपने अभिनय आकांक्षाओं को पूरा कर सकते थे।

 

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एक अखबार में छपी में खबर के अनुसार, द इंडियन स्टैमरिंग एसोसिएशन (TISA)" का ब्रांड एंबेसडर बनने के लिए संपर्क किया गया था इसी सिलसिले में एसोसिएशन के नौ सदस्यों ने ऋतिक के साथ हाल में उनके निवास स्थान पर चर्चा की । इस दौरान अभिनेता ने खुलासा किया कि वह कैसे शीशे के सामने खड़े हो कर बात करने की प्रैक्टिस किया करते थे, अपनी आवाज रिकॉर्ड करते थे और गाना भी सीखते थे।

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ऋतिक ने साझा करते हुए कहा ,'मैं हर दिन स्पीच पर काबू पाने के लिए अभ्यास करता हूं, मैं अभी भी कम से कम एक घंटे के लिए अभ्यासकरता हूं ताकि मैं माध्यमिक क्रियाएं जैसे कि झटके के साथ बोलने को नियंत्रित कर सकूं।" अभिनेता ने आगे कहा,'हकलाने की अस्वीकार्यता मेरे बचपन में न केवल परेशान करने वाली थी, बल्कि 2012 तक बनी रही, जब तक कि मैं फिल्म स्टार नहीं बन गया।'

 

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अपने कॅरियर के शुरुआती वर्षों में, उन्हें कई स्क्रिप्ट को ना कहना पड़ा, जिनमें लंबे मोनोलॉग थे क्योंकि वे इसे बोलने में आश्वस्त नहीं थे। इस मुलाकात के दौरान, ऋतिक को एक वाक्य याद आया जब एक पुरस्कार प्राप्त करने के लिए वह दुबई जाने वाले थे। उस समय वह 'दुबई'। शब्द कहने के लिए संघर्ष कर रहे थे, और अपनी स्वीकृति भाषण को बोलने से पहले बार-बार अभ्यास किया था।

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अभिनेता ने स्वीकार करते हुए कहा,'मैंने अब अपने आप को एक स्लो स्पीकर के रूप में स्वीकार कर लिया था, कोई भी वाक्य जोर से बोलने से पहले मुझे अपने दिमाग में उसका अभ्यास करना पड़ता था। लंबे वक्त के लिए, मेरे लिए यह स्वीकार करना संघर्षपूर्ण था, लेकिन अब मैं ठीक हूं।" आगे कहते हुए कि सफलता 2012 में न्यूरो-लिंगुइस्तिक प्रोग्रामिंग (एनएलपी) के साथ आई, जिसने उन्हें इस समस्या से मुक्त कर दिया। अभिनेता के निवास स्थान से जाने से पहले, TISA के सदस्यों ने उन्हें बैज और हैंड बैंड दिए, जबकि ऋतिक ने कहा कि वह सभी गतिविधियों के लिए अपना समर्थन देंगे, और कहा कि वह इस तरह की अन्य बातचीत के लिए समर्थन करेंगे।

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ऋतिक ने कहा, 'हकलाना एक नाचीज समझे जाने वाली चुनौती है क्योंकि इसकी गंभीरता पर ज्यादा चर्चा नहीं की जाती है, यह गंभीर है क्योंकि यह एक इंसान के रूप में आपके आत्मविश्वास से संबंधित है,'