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प्रयोगवादी हूं…नारीवादी हूं, लेकिन पुरुषविरोधी नहीं: विद्या बालन

प्रयोगवादी हूं...नारीवादी हूं, लेकिन पुरुषविरोधी नहीं: विद्या बालन...
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Dilip Chaturvedi

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Updated: 12 Nov 2017, 2:53 PM IST

vidya balan

vidya balan

इस सप्ताह की शुरुआत में 'आउटलुक बिजनेस वीमेन ऑफ वर्थ ऑफ द ईयर' पुरस्कार से सम्मानित होने वाली अभिनेत्री विद्या बालन का कहना है कि वह नारीवादी हैं, लेकिन पुरुष विरोधी नहीं हैं। विद्या ने कहा, "मैं ऐसी शख्स हूं जिसका मानना है कि एक महिला को वैसे ही जिंदगी जीना चाहिए, जैसे पुरुष जीते हैं।" विद्या ने आगे कहा, "खुद को महत्व देना निरंतर चुनौती है और आपको लगातार इस बात को खुद को याद दिलाना पड़ेगा, क्योंकि आपको इसकी आदत नहीं है। मैं जितना ज्यादा खुद को अहमियत दूंगी, उतना ही ज्यादा खुशी हासिल करूंगी और मैं जितना ज्यादा खुश रहूंगी, उतना ही ज्यादा मेरे आसपास की दुनिया भी खुश रहेगी।"

तुम्हारी सुलु से चर्चा में....
विद्या बालन की फिल्म 'तुम्हारी सुलु' 17 नवंबर को रिलीज होने जा रही है और इस फिल्म के प्रमोशन के लिए विद्या ने दिन-रात एक कर दिया है। विद्या अपनी इस फिल्‍म को लेकर काफी कॉन्‍िफडेंट नजर आ रही हैं। विद्या ने हाल ही अपनी इस फिल्‍म के बारे में कहा, 'इस बार मुझे डर नहीं लग रहा है। मुझे लगता है कि हमने इस बार बहुत ही अच्छी फिल्म बनाई है। हमें अच्छी प्रतिक्रियाएं मिल रही हैं। ट्रेलर और गाने लोगों को पसंद आ रहे हैं, इसलिए मुझे उम्मीद है कि ये फिल्म सफल होगी। हमने मेहनत करके एक अच्छी फिल्म बनाई है। अब ये फिल्म जनता के बीच जा रही है। उनकी मर्जी पर सब निर्भर करता है। लेकिन मुझे यकीन है कि ये फिल्म किसी को निराश नहीं करेगी'

हर उम्र में मुझे काम मिलेगा...
जब में मैं फिल्म जगत में आई थी, तब 26 साल की थी। अब मैं 38 साल की एक खुशहाल गृहस्थ महिला हूं। मेरी शादी को पांच साल हो गए हैं। मुझे अपनी उम्र को लेकर कोई अफसोस नहीं है और मुझे पता है कि चाहे मेरी उम्र जो हो...मेरे लिए हमेशा कुछ काम रहेगा।

प्रयोगवादी हूं मैं...
न मैंने कभी किशोरी भूमिका करने की कोशिश की, ना ही पेड़ों के चारों ओर नाचा...क्योंकि ये सब करना मुझे पसंद नहीं। मुझे करने के लिए जो चीज उत्साहित करती है वह यह कि अपनी उम्र में मैं भूमिकाओं और पात्रों के साथ क्या प्रयोग कर सकती हूं। शायद यही वजह है कि सुरेश त्रिवेणी जैसे लेखक ने सुलू का चरित्र लिखा और फिल्म के लिए मुझसे संपर्क किया। मैं अपने तरीके से प्रयोग करती हूं। इस साल को देखें, तो पहले 'कहानी 2', फिर 'बेगम जान' और अब 'तुम्हारी सुलू' मेरे प्रयोगवादी होने का सुबूत हैं।'

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