आज हम आपको अनिल कपूर से जुड़ा एक रोचक किस्सा बताते हैं। जब जावेद अख्तर ने डायरेक्टर को उन्हें मिल में न लेने की सलाह तक दे डाली थी। अनिल कपूर के फिल्मी करियर की शुरूआत फिल्म ‘हमारे तुम्हारे’ से एक छोटे के किरदार से हुई थी लेकिन फिल्म ‘वो सात दिन’ में वह लीड रोल में नजर आए थे। उनके हार्डवर्क और बेहतरीन एक्टिंग की वजह से उनका नाम बी-टाउन में बड़े सम्मान के साथ लिया जाता है।
यह वाकया 80 के दशक का है। उस वक्त अनिल कपूर ने कई फिल्मों में छोटे- मोटे रोल ही किए थे। 1980 में फिल्म ‘एक बार कहो’ और ‘हम पांच’ के बाद फिल्म डायरेक्टर एमएस सथ्यू ने अपनी एक फिल्म में उन्हें लेने का मन बनाया था। फिल्म का नाम था ‘कहां कहां से गुजर गया’।
जब जावेद अख्तर ने एमएस सथ्यू से फिल्म कास्ट के बारे में बात की तो उन्हें अनिल कूपर के बारे में पता चला। तब जावेद अख्तर ने अनिल कपूर को दुबला-पतला बताकर एमएस सथ्यू को उन्हें फिल्म में काम ना देने की सलाह दे डाली।
इसके बाद जब साल 1986 में फिल्म कहां कहां से गुजर गया रिलीज हुई तो जावेद अख्तर अनिल कपूर को देखकर चौंक गए। जावेद अख्तर ने अनिल कपूर की एक्टिंग देखी और काफी इंप्रेस हुए। तब जावेद को अफसोस हुआ कि उन्होंने एसएस सथ्यू को क्यों अनिल कपूर को काम ना देने की सलाह दी थी। साथ ही इस बात की खुशी थी कि सथ्यू साहब ने उनकी सलाह नहीं मानी और अनिल कपूर को काम दे दिया।
आपको बता दें कि जावेद अख्तर अपनी बेबाकी के लिए फिल्म इंडस्ट्री और पॉलिटिकल सर्कल में प्रसिद्ध हैं। उनके कई बयानों पर विवाद खड़ा हो चुका है। हाल ही में जावेद अख्तर ने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को भगवान से भी बेहतर प्रशासक बता दिया था लेकिन उनका उस समय अंदाज मजाकिया था। उन्होंने खुदा और पूर्व पीएम की तुलना करते हुए हल्के फुल्के अंदाज में कहा कि अगर यकीन किया जाए, तो सिंह खुदा से बेहतर प्रशासक थे।