
Kavita Krishnamurthy
मईया यशोदा’, ‘बोले चूड़ियां’, ‘हवा हवाई’, ‘नींद चुराई मेरी’, ‘निंबूड़ा’ जैसे गीत जैसे ही कानों में सुनाई देते हैं, एक चेहरा और एक नाम भी जेहन में उतर आता है। यह नाम है प्लेबैक सिंगर कविता कृष्णमूर्ति का।
कविता कृष्णमूर्ति का जन्म 25 जनवरी 1958 को दिल्ली की एक अयंगर फैमिली में हुआ था। कविता को बचपन से ही गाने का शौक था। वो बचपन से ही लताजी और मन्ना डे के गाने खूब सुनती और गुनगुनाती थी। उन्होंने शास्त्रीय संगीत बलराम पुरी से सीखा था।
कविता ने बचपन में ही एक सिंगिंग कॉम्पीटिशन में गोल्ड मेडल जीता था जिसके बाद से उन्होंने म्यूजिक की दुनिया में करियर बनाने की ठान ली। कविता कृष्णमूर्ति अपने शुरूआती दिनों में हर सिंगिंग कॉम्पीटिशन में बड़-चड़कर हिस्सा लेती थी। शुरूआत में उन्हें स्टेज पर सबके सामने गाने में डर लगता था लेकिन धीरे-धीरे ये डर भी निकल गया। शुरूआती दिनों में ही उन्हें लताजी के साथ चंद लाइनें गाने का मौका मिला। वे पहले तो थोड़ा नर्वस थी लेकिन जब उन्होंने लताजी को गाते देखा तो उनका आत्मविश्वास भी बढ़ गया।
कविता कृष्णमूर्ति ने 1980 में अपना पहला फिल्मी गाना ‘काहे को ब्याही’ गाया था लेकिन दुर्भाग्यवश ये गाना फिल्म से हटा दिया गया था। उन्होंने इसके बाद फिल्म ‘प्यार झुकता नहीं’ के गानों में आवाज दी। इस फिल्म के गाने इतने पॉपुलर हुए कि हर कोई कविता की मधुर आवाज का दिवाना हो गया। कविता ने कई भाषाओं में गाने गाए है और उनका म्यूजिक इंडस्ट्री में महत्वपूर्ण योगदान है।
Published on:
25 Jan 2018 07:20 pm
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