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आत्महत्या करने जा रहे 23 लोगों की इस फिल्म ने बचाई जान, जानें कैसे

Hindi Film: हर दिन कई फिल्मों की कहानियां लिखी जाती हैं और फिर उन्हें जनता के सामने थियेटर पर रिलीज किया जाता है। हमने कई सच्ची घटनाओं पर बनी फिल्में देखी हैं, लेकिन इस समय बात हो रही हैं एक ऐसी 100 करोड़ी फिल्म की, जिसने 23 लोगों की जान बचाई है। खुद डायरेक्टर ने बड़ा खुलासा करते हुए बताया कि ये कैसे हुआ?

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Laalo Krishna Sada Sahaayate saved 23 people lives going to commit suicide Director Ankit Sakhiya Reveals

डायरेक्टर अंकित सखिया की फिल्म ने बचाई 23 लोगों की जान

Laalo – Krishna Sada Sahaayate: अक्सर बॉक्स ऑफिस पर सफलता की सबसे बड़ी कहानियां बिना किसी शोर-शराबे के शुरू होती हैं, ऐसी ही एक फिल्म है जो धीरे से थिएटर पर आई और छा गई, हम बात कर रहे हैं गुजराती फिल्म 'लालो – कृष्णा सदा सहायते' की। मामूली बजट और बिना किसी तामझाम के रिलीज हुई इस फिल्म ने वह कर दिखाया है जो आज तक बड़े-बड़े सुपरस्टार्स की गुजराती फिल्में नहीं कर पाईं।

यह फिल्म 100 करोड़ का कलेक्शन पार करने वाली पहली गुजराती फिल्म बन गई है। फिल्म सफलता की वजह से फिल्म को हिंदी में भी रिलीज किया गया है। अब इसी बीच डायरेक्टर अंकित सखिया ने इससे जुड़ी कई इंट्रेस्टिंग बातें बताई हैं। उन्होंने बताया कि इस फिल्म को देखने के बाद 23 लोगों का मैसेज आया कि मूवी ने उनकी जान बचाई और जीने की उम्मीद दी।

क्या है 'लालो – कृष्णा सदा सहायते' की कहानी? (Laalo – Krishna Sada Sahaayate Director Ankit Sakhiya)

अंकित सखिया ने इस फिल्म की कहानी भी लिखी है और डायरेक्ट भी किया है। यह फिल्म एक रिक्शा ड्राइवर के इर्द-गिर्द घूमती है। कहानी तब दिलचस्प मोड़ लेती है जब यह ड्राइवर एक फार्महाउस में फंस जाता है और उसे अपने अतीत के उन जख्मों का सामना करना पड़ता है जिन्हें वह भूल चुका था। इस कठिन घड़ी में उसे स्वयं भगवान कृष्ण के दर्शन होते हैं, जो उसे आत्म-चिंतन और मुक्ति का रास्ता दिखाते हैं। आस्था और भावनाओं के इसी मेल ने दर्शकों को थियेटर तक खींच लिया।

अंकित सखिया ने बताया कहां से आया आइडिया

अंकित सखिया ने फ्री प्रेस जर्नल से बातचीत की। इस दौरान डायरेक्टर ने बताया कि फिल्म की सफलता की सबसे खास बात इसकी शुरुआत है। यह प्रोजेक्ट एक बहुत ही छोटे बजट के विचार से शुरू हुआ था। उन्होंने कहा, "आइडिया एक फिल्म बनाने का था और इसे कम बजट में कैसे बनाया जाए, यही सोचा जा रहा था। ऐसे में इसके लिए एक लोकेशन, एक एक्टर और जिन चीजों की जरूरत थी बस वह इर्द-गिर्द आसानी से मिल जाए, जिससे मेरा पैसा भी न खर्च हो। इस सोच से स्क्रिप्ट लिखनी शुरू की।

अंकित सखिया ने बताया कि हैरानी की बात यह है कि फिल्म रिलीज होते ही हिट नहीं हुई थी। शुरू में सिनेमाघरों में भीड़ कम थी, लेकिन जिन लोगों ने फिल्म देखी, उन्होंने इसकी इतनी तारीफ की कि धीरे-धीरे यह एक 'सांस्कृतिक घटना' बन गई। लोगों ने एक-दूसरे को फिल्म देखने की सलाह दी और देखते ही देखते 'लालो' ब्लॉकबस्टर साबित हुई।

कैसे इस फिल्म ने बचाई 23 लोगों की जान? (How Laalo Krishna Sada Sahaayate Helped Prevent 23 Suicides)

गुजरात में ऐतिहासिक सफलता के बाद, मेकर्स ने इसकी पहुंच बढ़ाने के लिए इसे 9 जनवरी को हिंदी में भी देशभर के सिनेमाघरों में रिलीज किया है। अंकित से पूछा गया कि फिल्म को हिंदी में रिलीज करने का फैसला क्यों लिया? इस पर उन्होंने एक इंट्रेस्टिंग बात बताई। अंकित बोले, फिल्म देखकर लोग हील हो रहे थे। लोग देख रहे थे, रो रहे थे, अपने दुख बता रहे थे। 23 लोगों ने कहा कि वे आत्महत्या करने वाले थे लेकिन उन्होंने फिल्म देखी और बच गए। उन्हें इस फिल्म ने नई उम्मीद दी। तब हमें लगा कि यह गुजराती भाषा तक ही नहीं रहनी चाहिए। इसे पूरे भारत को दिखाते हैं। इसलिए हिंदी में लाने का फैसला लिया।