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मुहावरों की तरह प्रचलित हैं इंदीवर के गीत : कोई समझा नहीं, कोई जाना नहीं…

करीब-करीब हर बड़े संगीतकार के साथ रचे सदाबहार गीत हिन्दी शब्दावली को प्रधानता, नई उपमाओं पर रहा जोर आनंद बक्षी के बाद अपने दौर के सबसे कामयाब गीतकार

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-दिनेश ठाकुर
इंदीवर को दुनिया से रुखसत हुए 27 फरवरी को 24 साल हो जाएंगे। इन 24 साल में शायद ही कोई दिन ऐसा गुजरा हो, जब फिजाओं में उनका कोई गीत नहीं गूंजा हो। जिस तरह आनंद बक्षी के बारे में मशहूर है कि उनके गीतों के बगैर हिन्दुस्तान में कोई दिन नहीं ढलता, वही बात इंदीवर पर लागू होती है। वजह यह है कि इन दोनों गीतकारों को अपने दौर के करीब-करीब हर बड़े संगीतकार के साथ गीत रचने का मौका मिला। दोनों सिचुएशन पर चुटकी बजाकर गीत लिखने में माहिर थे। दोनों का नजरिया साफ था कि फिल्मों की जो मांग है, उसके हिसाब से लिखो। दोनों आम आदमी की पसंद से वाकिफ थे। दोनों के सैकड़ों गीत मुहावरे की तरह प्रचलित हैं। आनंद बक्षी ने 'कुछ तो लोग कहेंगे, लोगों का काम है कहना' के जरिए अपना नजरिया साफ कर दिया था, तो इंदीवर का रुख भी साफ था, 'जो तुमको हो पसंद, वही बात कहेंगे।'

खासी समृद्ध थी घरेलू लाइब्रेरी
झांसी के एक गांव में जन्मे श्यामलाल राय फिल्मों में इंदीवर (यानी नीलकमल) हो गए। उनके पहले कामयाब गीत 'बड़े अरमान से रखा है बलम तेरी कसम, प्यार की दुनिया में ये पहला कदम' (मल्हार) ने गोया मुनादी कर दी कि हिन्दी सिनेमा में व्यापक रेंज वाले एक और गीतकार का उदय हो गया है। इंदीवर को पढऩे का जबरदस्त शौक था। उनकी घरेलू लाइब्रेरी खासी समृद्ध थी। गालिब और कालीदास से लेकर शेक्सपियर, वाल्तेयर आदि उनके पसंदीदा लेखक थे। उनके 'जिंदगी का सफर है ये कैसा सफर', 'एक तू न मिला सारी दुनिया मिले भी तो क्या है', 'ओह रे ताल मिले नदी के जल में', 'छोड़ दे सारी दुनिया किसी के लिए', 'कसमे-वादे प्यार वफा सब बातें हैं बातों का क्या' आदि गीतों में जो गहराई है, गहन अध्ययन की देन है। जब फिल्मों में 'सिचुएशन' का तकाजा उठा, तो उन्होंने 'रंभा हो संभा हो', 'आप जैसा कोई मेरी जिंदगी में आए' और 'एक आंख मारूं' भी बेखटके लिख दिए।

मुखर रहीं कोमल भावनाएं
दरअसल, सत्तर के दशक तक फिल्मों में प्रेमिल भावनाओं पर ज्यादा जोर था। इसी दौर तक इंदीवर की कोमल भावनाएं ज्यादा मुखर रहीं। उन्होंने 'रोशन तुम्हीं से दुनिया', 'हमने तुझको प्यार किया है जितना', 'यूं ही तुम मुझसे बात करती हो', 'पल भर के लिए कोई हमें प्यार कर ले', 'दर्पण को देखा', 'तेरे चेहरे में वो जादू है', 'दिल ऐसा किसी ने मेरा तोड़ा' जैसे दिल छूने वाले गीत लिखे। मनोज कुमार की 'पूरब और पश्चिम' में उन्होंने सदाबहार देशभक्ति गीत 'है प्रीत जहां की रीत सदा' लिखा, तो जॉय मुखर्जी की 'एक बार मुस्कुरा दो' के 'सवेरे का सूरज तुम्हारे लिए है' और 'रूप तेरा ऐसा दर्पण में न समाए' के जरिए फिल्मी गीतों को नई उपमाएं दीं।


मामा मिया पॉम पॉम..
अस्सी के दशक से इंदीवर ने अपनी प्रतिभा 'ताकी ओ ताकी', 'उई अम्मा उई अम्मा' (इसी की धुन पर कई साल बाद 'द डर्टी पिक्चर' का 'ऊलाला ऊलाला' तैयार हुआ) और 'मामा मिया पॉम पॉम' जैसे अटपटे-चटपटे गीतों पर ज्यादा खर्च की। लेकिन इस दौर में भी मौका मिलने पर उन्होंने 'तुमसे बढ़कर दुनिया में न देखा कोई और', 'दुश्मन न करे दोस्त ने वो काम किया है', 'एक अंधेरा लाख सितारे', 'हम तुम्हें चाहते हैं ऐसे', 'न कजरे की धार', 'ये तेरी आंखें झुकी-झुकी' सरीखे सदाबहार गीत भी रचे।


मुझको राणाजी माफ करना...
इंदीवर के गीतों की फेहरिस्त देखकर किसी को भी हैरानी हो सकती है। एक तरफ 'चंदन-सा बदन चंचल चितवन', 'फूल तुम्हें भेजा है खत में', 'हम थे जिनके सहारे', 'नदिया चले चले रे धारा', 'कोई जब तुम्हारा हृदय तोड़ दे', 'मधुबन खुशबू देता है', 'होठों से छू लो तुम', 'कितने रांझे तुझे देखके बैरानी बन गए', 'जब कोई बात बिगड़ जाए', 'ये बंधन तो प्यार का बंधन है' और 'जीवन से भरी तेरी आंखें' जैसे बेशुमार कोमल गीत हैं, वहीं 'मुझको राणाजी माफ करना गलती म्हारे से हो गई' जैसे धूम-धड़ाके भी कम नहीं हैं।