महेश भट्ट का खुलासा: बेटी है डिप्रेशन का शिकार, कर चुकी हैं सुसाइड की कोशिश
Mahendra Yadav
Publish: Sep, 11 2018 04:06:20 (IST)
महेश भट्ट का खुलासा: बेटी है डिप्रेशन का शिकार, कर चुकी हैं सुसाइड की कोशिश

भट्ट ने कहा, 'यह मानसिक बीमारी का एक रूप है और इसका इलाज किया जा सकता है।

अपनी आगामी फिल्म 'द डार्क साइड ऑफ लाइफ : मुंबई सिटी' की रिलीज के लिए तैयार दिग्गज फिल्मकार महेश भट्ट का कहना है कि हमारे देश में मानसिक बीमारी के बारे में जागरूकता लाने की कमी है। इस ट्रेलर लॉन्च के मौके पर महेश भट्ट ने एक चौंकाने वाला खुलासा भी किया। उन्होंने बताया कि आलिया भट्ट की बड़ी बहन भी डिप्रेशन की शिकार हैं। दरअसल महेश भट्ट की एक और बेटी हैं जो कि आलिया ये बड़ी और पूजा भट्ट से छोटी है। उसका नाम शाहीन है। वह अक्सर लाइमलाइट से दूर रहती हैं।

डिप्रेशन का शिकार है शाहीन:
ट्रेलर लॉन्च के मौके पर महेश भट्ट ने बताया कि, 'आलिया की बड़ी और पूजा भट्ट की छोटी बहन शाहीन लाइमलाइट से दूर ही रहना पसंद करती हैं। उन्होंने बताया कि वो 13 साल की उम्र से ही डिप्रेशन की शिकार हैं। साथ ही उन्होंने बताया कि उनकी बेटी ने 13 साल की उम्र में आत्महत्या करने की कोशिश की थी। इतना ही नहीं, महेश भट्ट ने बताया कि शाहीन की ऑक्टूबर में एक मेमोर आने वाली है, जिसमें उन्होंने उस सभी दौर का जिक्र किया है, जिससे वो खुद गुजरी हैं।'

 

महेश भट्ट का खुलासा: बेटी है डिप्रेशन का शिकार, कर चुकी हैं सुसाइड की कोशिश

आत्महत्या मानसिक बीमारी का एक रूप:
भट्ट ने ट्रेलर लॉन्च के मौके पर निखिल रत्नापारखी, अलीशा खान, निर्देशक तारिक खान और निर्माता राजेश परदासानी के साथ 'द डार्क साइड ऑफ लाइफ : मुंबई सिटी' के ट्रेलर लॉन्च पर मीडिया से बातचीत की। फिल्म हमारे समाज में अकेलेपन, सांप्रदायिक सद्भाव और मानसिक स्वास्थ्य जैसे कई संवेदनशील मुद्दों पर है। समाज में आत्महत्या के बढ़ते मामलों के बारे में बात करते हुए भट्ट ने कहा, 'यह मानसिक बीमारी का एक रूप है और इसका इलाज किया जा सकता है। जब आप मधुमेह से पीड़ित होते हैं, तो आपको इंसुलिन शॉट लेना पड़ता है।'

 

महेश भट्ट का खुलासा: बेटी है डिप्रेशन का शिकार, कर चुकी हैं सुसाइड की कोशिश

जागरूकता की कमी:
उन्होंने कहा, 'इसी तरह जब आप अवसाद की ओर बढ़ते होते हैं तो आपको डॉक्टर से परामर्श करने की आवश्यकता होती है, जो मेडिटेशन से आपका इलाज करते हैं, लेकिन मुझे लगता है कि हमारे देश में मानसिक बीमारी के बारे में जागरूकता की कमी है। लगभग हर घर में लोग अवसाद से पीड़ित हैं।'