सीमा बताती हैं कि पुरी साहब उनके साथ उनकी मां के घर झालावाड़ में अपनी बाकी की जिंदगी बिताना चाहते थे, जहां वह पहली बार 1981 में गए थे। वहां के वह जमाई बाबू, जीजू और भईया थे कोई फिल्मस्टार नहीं। उन्हें बाग बगानी में बहुत दिलचस्पी थी और गुरुद्वारे में भी। बहरहाल, सीमा बहुत जल्द झालावाड़ जाने वाली हैं, लेकिन इस बार अकेले...अपने पुरी साहब के बिना।