
जयपुर में हाथी को गुलाबी रंग करने पर मचा हंगामा
Russian photographer paints elephant pink in Jaipur for photoshoot: राजस्थान की गुलाबी नगरी जयपुर अपनी खूबसूरती और विरासत के लिए दुनिया भर में मशहूर है, लेकिन हाल ही में यहाँ एक रूसी फोटोग्राफर की 'कलात्मकता' ने एक बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। 47 वर्षीय रूसी फोटोग्राफर जूलिया बुरुलेवा ने अपने एक फोटोशूट के लिए एक जीवित हाथी को सिर से पांव तक चमकीले गुलाबी रंग में रंग दिया। जैसे ही इस फोटोशूट की तस्वीरें सोशल मीडिया पर सामने आईं, जानवरों के प्रति क्रूरता को लेकर बहस छिड़ गई और मनोरंजनजगत के कई सितारों ने फोटोग्राफर को आड़े हाथों लिया।
जूलिया ने इंस्टाग्राम पर इस शूट की पीछे की कहानी साझा करते हुए हाथी को राजस्थान का सांस्कृतिक प्रतीक बताया और दावा किया कि उन्होंने केवल 'ऑर्गेनिक' रंगों का इस्तेमाल किया है। हालांकि, भारतीय कलाकारों को उनकी यह दलील रास नहीं आई।
टीवी एक्ट्रेस देवोलीना भट्टाचार्जी ने नाराजगी जाहिर करते हुए लिखा, "यह कितनी बेरहम इंसान है। सिर्फ एक क्रूर व्यक्ति ही किसी बेजुबान के साथ ऐसा कर सकता है। दुखद बात यह है कि खबरों के मुताबिक वह हाथी अब इस दुनिया में नहीं रहा।" वहीं, एक्ट्रेस अक्षा परदासनी ने इसे पब्लिसिटी स्टंट बताते हुए कहा, "शर्म आनी चाहिए आपको और आपकी इस कला को। लोग सिर्फ व्यूज के लिए इतने ढीठ हो जाते हैं।"
फिल्म जगत से जुड़े कई निर्देशकों ने जूलिया को तकनीक का इस्तेमाल करने की सलाह दी। डायरेक्टर शाई ने टिप्पणी की कि ऑर्गेनिक रंग होने से यह कृत्य सही साबित नहीं हो जाता। उन्होंने कहा, "हाथियों की त्वचा बहुत संवेदनशील और छिद्रपूर्ण होती है। आप अपने पोर्टफोलियो के लिए किसी जानवर को घंटों तक पेंट में नहीं डुबो सकते। आज के दौर में यह काम आसानी से AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) की मदद से किया जा सकता था।" डायरेक्टर करण कपूर ने भी सुर में सुर मिलाते हुए कहा कि तस्वीरों को सुंदर दिखाने के लिए जानवर को तनाव देना गलत है।
चारों तरफ से घिरने के बाद जूलिया बुरुलेवा ने अपनी सफाई पेश की है। उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा कि इस्तेमाल किया गया पेंट पूरी तरह सुरक्षित, गैर-विषाक्त और धोने योग्य था। उन्होंने यह भी दावा किया कि फोटोशूट का समय बहुत छोटा था और हाथी को कोई नुकसान नहीं पहुँचाया गया।
AI के इस्तेमाल के सुझाव पर जूलिया ने तर्क दिया कि उनकी कलात्मक शैली 'असली जीवन के जुड़ाव' पर आधारित है। उनके मुताबिक, डिजिटल उपकरण तस्वीरों की नकल तो कर सकते हैं, लेकिन वे प्रकृति और जीवित प्राणियों के साथ उस वास्तविक तालमेल और प्रामाणिकता की जगह नहीं ले सकते, जो उनके काम की जान है। उन्होंने जोर देकर कहा कि उनका इरादा हमेशा सम्मानजनक और नैतिक तरीके से जुड़ने का रहा है।
भले ही जूलिया इसे अपनी कला बता रही हों, लेकिन जयपुर के स्थानीय लोगों और पशु प्रेमियों के बीच इस घटना ने एक गंभीर सवाल छोड़ दिया है— क्या कला के नाम पर बेजुबानों की संवेदनशीलता के साथ खिलवाड़ करना जायज है?
Published on:
31 Mar 2026 10:04 am
बड़ी खबरें
View Allबॉलीवुड
मनोरंजन
ट्रेंडिंग
