
फिल्म ‘बाबूमोशाय बंदूकबाज’ में सेंसर बोर्ड ने 48 कट क्या लगाए कि फिल्म की अभिनेत्री बिदिता बाग को फिल्म ‘जय संतोषी मां’ की याद आ गई। उन्होंने अपने एक बयान में अपनी फिल्म की फूहड़ता का बचाव करते हुए कहा कि आज के दौर में ‘जय संतोषी मां’ जैसी फिल्में बनेंगी, तो कौन देखेगा...। लेकिन शायद बिदिता को यह मालूम नहीं कि आज भी जब यह फिल्म टीवी पर आती है, तो जितने दर्शक इस फिल्म को देखते हैं, उतने तो उनकी आज के दौर की ‘बाबूमोशाय बंदूकबाज’ को भी शायद नसीब न हों...।
खैर, अब जब जिक्र ‘जय संतोषी मां’ का छिड़ ही गया है, तो हम आपको बता दें कि इस फिल्म ने कमाई के ऐसे रिकॉर्ड बनाए थे, जो अब तक नहीं टूटे हैं। यह बात न आज की पीढ़ी जानती होगी...ना ही अभिनेत्री बिदिता...
एक दौर था, जब फिल्में सिल्वर और गोल्डन जुबिली होने की वजह से सुर्खियां बटोरती थीं...अब कमाई का सारा खेल एक दिन में सिमट गया है...सबकी नजरें ओपनिंग डे की कमाई पर टिकी होती हैं...फस्र्ट डे की कमाई ही बॉक्स ऑफिस पर फिल्म का भविष्य तय करती है...
मौजूदा दौर की बात करें, तो अब सौ, दौ सौ, तीन सौ करोड़ क्लब की बात होती है...इस क्लब में यूं तो कई फिल्में शामिल हुईं, लेकिन हाल-फिलहाल की बात करें, तो आमिर खान की फिल्म ‘दंगल’ को दुनिया की टॉप-5 नॉन-इंग्लिश फिल्मों में शुमार किया गया है।
इस फिल्म का बजट करीब 75 करोड़ था, जबकि फिल्म ने बिजनेस करीब 1961 करोड़ रुपए का किया है। इस फिल्म की कमाई को लेकर चारों तरफ शोरगुल था, लेकिन क्या आपको पता है कि भारतीय सिने इतिहास में ‘जय संतोषी मां’ एक ऐसी फिल्म है, जिसने अपने बजट से १०० गुना ज्यादा की कमाई की थी। ...1975 में रिलीज हुई इस फिल्म का बजट सिर्फ 5 लाख रुपए था। इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर 5 करोड़ की कमाई की थी।
हम आपको बता दें कि 1975 में ही दो और बड़ी फिल्में ‘शोले’ और ‘दीवार’ रिलीज हुई थीं। इसके बावजूद फिल्म पर कोई असर नहीं पड़ा और इसने अच्छा बिजनेस किया था। इस फिल्म को बच्चे, बूढ़े और जवान सभी ने खूब पसंद किया था. इस फिल्म में अनीता गुहा, कनन कौशल, भारत भूषण और आशीष कुमार ने मुख्य भूमिका निभाई थी।
इस फिल्म से जुड़ा एक और तथ्य है, जिस पर शायद आपको यकीन न हो, लेकिन शेखर सुमन के मुताबिक, बिहार के पटना में जब ये फिल्म लगी थी, तो उस समय एक आदमी ने थिएटर के बाहर करीब 1.50 लाख रुपए कमाए थे। दरअसल, ‘जय संतोषी मां’ एक धार्मिक फिल्म थी, इसलिए लोग अपने जूते-चप्पल थिएटर के बाहर ही उतारते थे...उस शख्स ने लोगों के जूते-चप्पल संभालने का काम किया...इसके बदले वो चवन्नी-अठन्नी लेता था...फिल्म कई महीनों तक चली और उस गरीब शख्स पर मां संतोषी की ही नेमत थी कि वो कुछ महीनों में लखपति हो गया।
Published on:
08 Aug 2017 12:56 pm
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