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26 साल,100 फ़िल्में: हर फ़िल्म और किरदार को यादगार बनाने वाले सौरभ शुक्ला की कहानी

फ़िल्म जॉली LLB का हर वो दृश्य याद कीजिए, जिसमें जज की भूमिका में कोर्ट में मौजूद एक इंसान जब अपना मुंह खोलता है, तो अपने हर अल्फ़ाज़ से फैंस का दिल जीत लेता है! जी हां, हम अभिनेता सौरभ शुक्ला की बात कर रहे हैं।

Mar 08, 2022 / 05:15 pm

Sneha Patsariya

saurbh
कल्लू मामा के नाम से मशहूर सौरभ शुक्ला का जन्म पांच मार्च 1973 को उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में हुआ था। उनके पिता शत्रुघ्न शुक्ला आगरा घराने के मशहूर गायक और मां जोगमाया शुक्ला पहली तबला वादक थीं। उनके माता-पिता को फिल्में देखने का बड़ा शौक था। जब सौरभ दो साल के थे तब उनका परिवार दिल्ली आ गया। उन्होंने अपनी पढ़ाई दिल्ली से की है। सौरभ शुक्ला ने अपने करियर की शुरुआत 1984 में थियेटर से की। सिनेमा में सबसे पहला मौका उन्हें शेखर कपूर ने फिल्म बैडिंट क्वीन में दिया।
इसके साथ ही वह टीवी शोज में भी नजर आए। 1994 में दूरदर्शन के क्राइम ड्रामा शो तहकीकात में उन्होंने विजय आनंद के साथ काम किया। सौरभ शुक्ला सीरियल और थियेटर नाटकों में व्यस्त रहे। इस बीच 1998 में उन्हें सबसे बड़ा ब्रेक राम गोपाल वर्मा ने अपनी फिल्म सत्या में दिया
जिसमें वह गैंगस्टर कल्लू मामा के रोल से दिखे। फिल्म के बाद सौरभ शुक्ला कल्लू मामा के नाम से मशहूर हो गए। हालांकि उनका खुद का मानना है कि इससे उनके करियर को बहुत ज्यादा फायदा नहीं हुआ। एक इंटरव्यू में सौरभ कहते हैं कि ‘सत्या के बाद मुझे वैसा काम नहीं मिल रहा था जैसा मैं चाहता था। इसके लिए मुझे 10 साल का इंतजार करना पड़ा। लोग मेरे काम की तारीफें तो करते थे लेकिन काम नहीं मिलता था। 10 साल मेरे लिए बहुत मुश्किलों भरे रहे। मेरे करियर की दूसरी पारी फिल्म बर्फी से शुरू हुई। उसके बाद जॉली एलएलबी ने सबकुछ बदल दिया और कई अच्छी फिल्में मिलीं।’
सत्‍या, बर्फी, जॉली एलएलबी, किक, पीके और छलांग जैसी सैकड़ों फ़िल्मों में काम कर चुके सौरभ को इंडस्ट्री में 26 साल से अधिक का वक्त हो गया। मगर, शायद ही कभी ऐसा हुआ हो जब सौरभ शुक्ला अपनी छाप छोड़ने से चूके हों। पिछले कुछ वर्षों में उन्होंने फ़िल्मों में कई खूबसूरत किरदार निभाए हैं, जो सिनेमाप्रेमियों के दिलों में हमेशा बने रहेंगे। आज हम यहां सौरभ शुक्ला के कुछ ऐसे ही किरदारों की सूची आपके लिए लेकर आए हैं।
1. कैलाश, बैंडिट क्वीन

शेखर कपूर के निर्देशन में बनी बैंडिट क्वीन में सौरभ शुक्ला कैलाश के किरदार में थे। कहा जाता है कि फिल्म में कैलाश एक ऐसा किरदार था जो विशेष रूप से सौरभ शुक्ला के लिए लिखा गया था। यह फिल्म का हिस्सा नहीं था। मगर, कपूर सौरभ शुक्ला को फिल्म में कास्ट करना चाहते थे इसलिए उनके लिए यह खास भूमिका लिखी गई। बाद में सौरभ शुक्ला ने अपने अभिनय से इसे किरदार को हमेशा के लिए अमर कर दिया।
2. कल्लू मामा, सत्या

सौरभ शुक्ला ने कई फिल्में की। मगर उन्हें असली पहचान ‘सत्या’ में कल्लू मामा के किरदार ने दिलाई। यह एक ऐसा किरदार था, जिसने उन्हें शोहरत की बुलंदियों पर पहुंचाया. सौरभ शुक्ला इस फिल्म में सह लेखक भी थे। सत्या फिल्म से जुड़ा एक बड़ा पहलू यह है कि सौरभ पहले इसमें बतौर सहलेखक काम करने के लिए राजी नहीं थे। कल्लू मामा का किरदार ही था, जिसके कारण वह सहलेखन करने को राजी हुए थे।
3. टॉम अंकल, मोहब्बतें

”कोई प्यार करे तो तुमसे करे, तुम जैसे हो वैसे करे, कोई तुम्हें बदल कर प्यार करें तो वो प्यार नहीं, सौदा कर रहा है, और प्यार में सौदा नहीं होता”…मोहब्बतें फ़िल्म का यह डायलॉग कई सारी यादें ताजा कर देता है। इस फिल्म में सौरभ शुक्ला एक पिता की भूमिका में थे। उन्होंने इस संजीदा किरदार को न सिर्फ निभाया, बल्कि अपने अंदाज से सबको हंसाया भी। इस फिल्म में उनके साथ शाहरुख और अमिताभ बच्चन भी थे।
4. पांडुरंग, नायक द रियल हीरो

सीएम का दाहिना हाथ बने पांडुरंग यानी सौरभ शुक्ला ने अपने इस किरदार से लोगों को जमकर हंसाने का काम किया। लाइव टेलीकास्ट के दौरान जिस तरह से वो गोबर लगी चप्पल के साथ स्क्रीन पर नज़र आते हैं, वो दिल जीतने वाला है। आज भी उनके किरदार को लेकर सोशल मीडिया पर मीम देखने को मिल ही जाते हैं।

5. जस्टिस सुंदर लाल त्रिपाठी, जॉली एलएलबी

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फिल्म जॉली एलएलबी में जस्टिस त्रिपाठी के किरदार में अपनी मजाकिया हरकतों के लिए सौरभ शुक्ला की न सिर्फ जमकर तारीफ हुई, बल्कि उन्हें सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिला। ”मुकदमें की पहली तारीख को मुझे पता होता है कि कटघरे में खड़ा आदमी अपराधी है या नहीं, मैं उन ख़ास सुबूतों का इंतज़ार करता रहता हूं। जो उसे अपराधी साबित भी करेंगे, पर वे सूबूत अदालत के सामने लाये ही नहीं जाते और मेरे हाथ बंध जाते हैं, क्योंकि मुझे तो प्रस्तुत साक्ष्यों की बिना पर ही मुक़दमे का फ़ैसला सुनाना पड़ता है।” । फिल्म में सौरभ शुक्ला ने इस डायलॉग से कई लोगों का दिल जीत लिया।

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