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श्रद्धा-सुमन मुबारक बेगम: कभी तन्हाइयों में हमारी याद आएगी…

राजस्थान की रहने वाली मशहूर गायिका मुबारक बेगम का इंतकाल...सोमवार को देर रात उन्होंने अपने घर मेंं अंतिम सांस ली...

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Dilip Chaturvedi

Jul 19, 2016

mubarak

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मुंबई। बॉलीवुड की दिग्गज प्लेबैक सिंगर और गजल सम्राज्ञी मुबारक बेगम शेख का सोमवार देर रात अपने घर पर निधन हो गया। उनके परिवार के एक सदस्य ने बताया कि वह लंबे समय से बीमारी से जूझ रही थीं। वह 80 साल की थीं। उनका अंतिम संस्कार आज सुबह मुंबई के ओशिवारा मुस्लिम कब्रिस्तान में लगभग 11 बजे किया जाएगा। उनकी बहू जरीना शेख ने कहा, "उन्होंने सोमवार रात जोगेश्वरी स्थित अपने निवास स्थान पर रात लगभग 10 बजे अंतिम सांस ली। वह लंबे समय से बीमारी से जूझ रही थीं।"

राजस्थान के झुंझुनू जिले में अपने ननिहाल में जन्मीं मुबारक बेगम के पिता की माली हालत ठीक नहीं थी। चूंकि मुबारक की खुशकिस्मती थी कि उनके पिता को संगीत से गहरा लगाव था। मुबारक के दादाजी अहमदाबाद में चाय बेचते थे। जब मुबारक छोटी थीं, तभी उनके माता-पिता अहमदाबाद शिफ्ट हो गए। वहां उन्होंने फल बेचने का काम शुरू कर दिया, लेकिन अपने संगीत के शौक को मरने नहीं दिया।


इसके कुछ दिनों बाद मुबारक के पिता अपने पूरे परिवार को लेकर मुंबई आ गए। यह 1946 का दौरा था, जब बॉलीवुड में नूरजहां और सुरैया के आवाज का जादू चलता था। मुबारक इन दोनों गायिका को फॉलो करती थीं। उनके गाने बड़े शौक से गुनगुनाती थीं। एक पिता अपनी बेटी के हुनर को भांप लिया और मुबारक को संगीत की विधिवत तालीम के लिए किराना घराने के उस्ताद रियाजदुदीन खां और उस्ताद समद खां की शागिर्दी में शामिल कर दिया। इनके सानिध्य में देखते देखते मुबारक की आवाज सध गई। उसी दौरान मुबारक को ऑल इंडिया रेडियो पर ऑडिशन देने का मौका मिला। संगीतकार अजलीत मर्चेंट उनका ऑडिशन लिया। वो पास हो गईं। इस तरह रेडियो से उनके कॅरियर की शुरुआत हुई। घर-घर वो पहचानी जानी लगीं। उनकी आवाज के लोग मुरीद होने लगे। नतीजन यहीं से उनके लिए बॉलीवुड के दरवाजे खुले और उसके बाद तीन दशक तक बतौर प्लेबैक सिंगर मुबारक बेगम ने बॉलीवुड में छाई रहीं।
मुबारक बेगम को 1950 से 1970 के दौरान हिंदी सिनेमा जगत में शानदार योगदान के लिए याद किया जाता है। मुबारक बेगम ने 50 के दशक में अपने कॅरियर की शुरुआत रेडियो से की थी। लेकिन जल्दी ही वो फिल्मों में गाने लगीं, तब लता मंगेशकर भी अपने कॅरियर की शुरुआत कर रही थीं। मुबारक बेगम बड़े-बड़े म्यूजिक डायरेक्टरों से लेकर मोहम्मद रफी तक के साथ काम कर चुकी थीं। मुबारक बेगम को बड़ा ब्रेक फिल्म मधुमति के गाने 'हाले दिल सुनाइए से...' मिला। फिल्म उस दौर में हिट साबित हुई। केदार शर्मा की फिल्म 'हमारी याद आएगी' से उन्हें शोहरत मिली और इसके बाद उन्होंने एक से बढ़कर एक नगमे इंडस्ट्री को दिए।
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मुबारक ने हमेशा के लिए दिलों में बसने वाले बेहद खूबसूरत गीत दिए, जिनमें 'हमारी याद आएगी' का गीत 'कभी तन्हाइयों में हमारी याद आएगी..' हमराही का 'मुझको अपने गले लगा लो..' खूनी खजाना का 'ऐ दिल बता..' डाकू मंसूर का गीत 'ऐजी-ऐजी याद रखना सनम..' शामिल हैं।

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