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डायरेक्टर बनना चाहते थे अजग देवगन, इस ​तरह हुई फिल्मों में बतौर एक्टर एंट्री

अजय देवगन आज एक सफल एक्टर हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं, वह फिल्म इंडस्ट्री में एक्टर नहीं बल्कि निर्देशक बनने का सपना लेकर आए थे।

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ajay devgan

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बॉलीवुड के एक्शन हीरो अजय देवगन अपनी एक्टिंग के चलते लाखों दिलों पर राज करते हैं। अजय ने अपनी दमदार एक्टिंग के बल पर बॉलीवुड में जगह बनाई। सामान्य लुक होने के बावजूद करोड़ों फैंस उनकी नशीली आंखों के दिवाने हैं। अजय देवगन आज अपना 49वां जन्मदिन मना रहे हैं। वह आज भले ही एक सफल एक्टर हों लेकिन वह इंडस्ट्री में निर्देशक बनने का सपना लेकर आए थे। आज उनके जन्मदिन के मौके पर जानते हैं उनके जीवन से जुड़ी कुछ खास बातें।

पिता थे स्टंटमैन :
अजय देवगन का जन्म 2 अप्रेल, 1969 को दिल्ली में हुआ था। वह मूल रूप से पंजाब से संबंध रखते हैं। उनके पिता वीरू देवगन हिंदी फिल्मों के स्टंटमैन थे। उनकी मां का नाम है वीणा देवगन। वीणा ने कुछ फिल्मों का निर्माण किया था। अजय ने स्नातक की पढ़ाई मुंबई के मिट्ठी भाई कॉलेज से पूरी की।

निर्देशक बनने का था सपना:
अजय देवगन आज एक सफल एक्टर हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं, वह फिल्म इंडस्ट्री में एक्टर नहीं बल्कि निर्देशक बनने का सपना लेकर आए थे। अजय देवगन का असली नाम विशाल देवगन है। मां और पिता दोनों ही फिल्म जगत से जुड़े थे। जिसकी वहज से घर में फिल्मी माहौल था। इसी कारण अजय देवगन की रुचि भी फिल्मों की ओर हो गई और वह फिल्म निर्देशक बनने का सपना देखने लगे।

ऐसे शुरू हुआ एक्टिंग का सफर:
अजय अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद निर्देशक शेखर कपूर के साथ सहायक निर्देशक के रूप में काम करने लगे थे। इसी बीच उनकी मुलाकात कुक्कु कोहली से हुई। उस वक्त कुक्कु अपनी नई फिल्म 'फूल और कांटे' को बनाने में व्यस्त थे। वह एक ऐसे एक्टर की खोज में थे जो रूमानी भूमिका के साथ—साथ एक्शन सीन्स भी कर सके। उन्होंने अजय के बारे में सुना कि वे एक्शन और डांस में माहिर हैं। फिर क्या था उन्होंने तुरंत अजय से अपनी फिल्म में काम करने के लिए बात की और अजय ने फिल्म में बतौर एक्टर काम करने के लिए हां कर दी। यह फिल्म हिट हुई और इसी फिल्म के जरिए अजय देवगन दर्शकों के बीच अपनी पहचान बनाने में कामयाब हो गए। इसके बाद उन्होंने कभी भी पीछे मुड़कर नहीं देखा।

समीक्षक पुरस्कार से समानित :
फिल्म 'फूल और कांटे' के कई साल बाद उन्होंने सिने कॅरियर की एक और महत्वपूर्ण फिल्म 'द लीजेंड ऑफ भगत सिंह' में काम किया। राज कुमार संतोषी निर्देशित इस फिल्म में उन्होंने ‘भगत सिंह ’के किरदार को रूपहले पर्दे पर जीवंत कर दिया। इस फिल्म के लिए अजय को फिल्मफेयर के समीक्षक पुरस्कार से समानित किया गया। साथ ही उन्हें अपने सिने कॅरियर में दूसरी बार सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया। वहीं साल 2003 में उन्होंने फिल्म 'गंगाजल' में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

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