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Razia Sultan: बदायूं की रजिया सुल्तान को पंजाब के इस किले में बनाया गया था बंदी, जानिए क्या है किले की खासियत?

Razia Sultan: उत्तर प्रदेश के बदायूं में 1205 ईस्वी में जन्मी रजिया सुल्तान को उसके ही सेवक अल्तुनिया ने 1239 ईस्वी में बंदी बना दिया था। यह किला देश का सबसे पुराना किला है। आइए आपको बताते हैं इसकी कहानी...

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Budaun Razia Sultan was imprisoned in fort of Punjab

Razia Sultan: भारत का इतिहास काफी रोचक रहा है। यहां की संस्कृति, खान-पान, ऐतिहासिक जगहों की अपनी अलग पहचान है। हालांकि हमें कुछ चीजों के बारे में मालूम है, जबकि कुछ ऐतिहासिक बातों से हम आज भी अनजान हैं। ऐसे ही भारत के कुछ किले हैं, जो न सिर्फ ऐतिहासिक हैं बल्कि उनका इतिहास भी काफी प्राचीन है और इनमें से कुछ किले के बारे में लोगों को मालूम ही नहीं है कि उनका क्या इतिहास है और उनकी क्या ऐतिहासिक पृष्ठभूमि रही है। इसी लिस्ट में किला मुबारक भी आता है, जिसके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। बता दें कि यह मुबारक किला का नाम रजिया सुल्तान से जुड़ा हुआ है। तो देर किस बात की आइए जानते हैं कि इस किले की क्या खासियत है और यह कहां स्थित है।

इससे पहले हम आपको रजिया सुल्तान के बारे में थोड़ा परिचित करा देते हैं। रजिया सुल्तान का 1205 ईस्वी में उत्तर प्रदेश के बदायूं में जन्म हुआ था। इनके पिता का नाम इल्तुतमिश था। रजिया सुल्तान ने 1236 ईस्वी से 1240 ईस्वी तक दिल्ली सल्तनत पर शासन किया। रजिया पर्दा प्रथा त्यागकर पुरुषों की तरह खुले मुंह राजदरबार में जाती थी।

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तुर्की मूल की रज़िया को अन्य मुस्लिम राजकुमारियों की तरह सेना का नेतृत्व तथा प्रशासन के कार्यों में अभ्यास कराया गया, ताकि ज़रुरत पड़ने पर उसका इस्तेमाल किया जा सके। रजिया को अपने भाइयों और शक्तिशाली तुर्क अमीरों के विरुद्ध संघर्ष करना पड़ा। वह केवल 3 वर्ष का शासन कर पाई। इसके बाद रजिया को उसके ही सेवक अल्‍तुनिया ने 1239 में बंदी बना ‌लिया और 1240 में रजिया सुल्तान की मौत हो गई।

अब देश के सबसे पुराने किले के बारे में जान लीजिए
पंजाब के बठिंडा में स्थित देश के सबसे पुराने मुबारक किले का निमार्ण 90 से 110 ईस्वी के बीच किया गया था। इसके संस्थापक राजा डब थे जो वेना पाल के पूर्वज थे। इस किला मुबारक ने कई लड़ाइयों और आक्रमणों को अंजाम दिया गया। इसलिए यह किला बठिंडा का एक बहुत ही महत्वपूर्ण ऐतिहासिक स्थल है। इस किले को प्राचीन समय में तबार-ए-हिंद या भारत के प्रवेश द्वार के रूप में जाना जाता था। इस किले का निर्माण सिखों के दसवें गुरु, गुरु गोविंद सिंह ने भी इस स्थल का दौरा किया था।

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किले की संरचना
अगर हम बात करें इसकी वास्तुकला की, तो आपको बता दें कि इस किले की वास्तुकला में इस्लामी शैली में निर्मित की गई है। किला मुबारक भारत के सबसे ऊंचे किलों में से एक है, जिसकी ऊंचाई 118 फीट है। इसके मुख्य परिसर के अंदर दो गुरुद्वारे भी हैं। इस किले को छोटी ईंटों से बनाया गया है।

क्या है खासियत?
यह किला बहुत ही खास है, लेकिन इसके खास होने की एक वजह और है। कहते हैं कि 1239 में इस किले में रजिया सुल्तान या सुल्तान को उनके ही सेवक अल्तुनिया ने बंदी बना दिया था। रजिया सुल्ताना मुस्लिम एवं तुर्की इतिहास की पहली महिला शासक थीं। इसी वजह से इस किले को रजिया सुल्तान किला के नाम से भी जाना जाता है।