3 नवंबर 2026,

मंगलवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की अंतिम तिथि 31 दिसंबर, बदायूं में अब तक सिर्फ साढ़े चार हजार किसानों का बीमा

साढ़े चार हजार किसानों ने रबी की फसल में गेहूं, मसूर, सरसों, आलू के अंतर्गत अपना बीमा कराया है।
2 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

बदायूं

•

image

suchita mishra

•

Updated: 12 Dec 2017, 1:56 PM IST

kannauj

farmer

बदायूं। फसल के नुकसान की भरपाई के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किसानों के हित में फसल बीमा योजना चला रही है। फसल बीमा योजना की अंतिम तिथि 31 दिसंबर है। लेकिन बदायूं में अब तक करीब साढ़े चार हजार किसानों ने ही अपनी फसल का बीमा कराया है। इसका कारण कहीं न कहीं किसानों का योजना पर विश्वास न होना या फिर योजना को लेकर जागरुकता की कमी को माना जा रहा है।

इस मामले में अगर पिछले साल के आंकड़ों की बात की जाए तो इस साल के किसानों की तुलना में करीब चार गुना किसानों ने अपनी खरीफ की फसल का बीमा कराया था। पिछले साल बदायूं बीमा कराने वाले किसानों की संख्या करीब 19 हजार थी। हालांकि सरकार की इस योजना को लेकर कृषि विभाग लगातार किसानों को जागरुक करने के प्रयास कर रहा है। इस साल साढ़े चार हजार किसानों ने रबी की फसल में गेहूं, मसूर, सरसों, आलू के अंतर्गत अपना बीमा कराया है।

जानें क्या है सरकार की फसल बीमा योजना में खास

1. प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की भुगतान की जाने वाली प्रीमियम दरों को किसानों की सुविधा के लिए बहुत कम रखा गया है ताकि सभी स्तर के किसान आसानी से फसल बीमा का लाभ ले सकें।

2. इसके अन्तर्गत सभी प्रकार की फसलों जैसे रबी, खरीफ, वाणिज्यिक और बागवानी की फसलों को शामिल किया गया है।

3. सरकारी सब्सिडी पर कोई ऊपरी सीमा नहीं है। भले ही शेष प्रीमियम 90% हो, यह सरकार द्वारा वहन किया जाएगा।

4. किसानों द्वारा सभी खरीफ फसलों के लिए केवल 2% एवं सभी रबी फसलों के लिए 1.5% का एक समान प्रीमियम का भुगतान किया जाना है। वार्षिक वाणिज्यिक और बागवानी फसलों के मामले में प्रीमियम केवल 5% होगा।

5. काफी हद तक प्रौद्योगिकी के उपयोग को प्रोत्साहित किया जाएगा। दावा भुगतान में होने वाली देरी को कम करने के लिए फसल काटने के डेटा को एकत्रित एवं अपलोड करने के लिए स्मार्ट फोन, रिमोट सेंसिंग ड्रोन और जीपीएस तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा।