
नई दिल्ली। सत्तारूढ़ पार्टी महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का रेडियो प्रोग्राम 'मन की बात' के पिछले रविवार प्रसारित हुए संस्करण में भी उन्होंने महिलाओं के कामों की सराहना की और उनके सशक्तिकरण की बात की। अब आगामी बजट से भी यह उम्मीद जताई जा रही है कि इसमें उच्च शिक्षा के क्षेत्र में उनकी भागीदारी बढ़ाने के लिए कुछ बड़े एलान किए जा सकते हैं। इसमें सभी राज्यों में महिलाओं के लिए अलग से विश्वविद्यालय खोलने जैसी घोषणा शामिल हो सकती है। साथ ही इंजीनियरिंग संस्थानों में प्रवेश के लिए उनकी सीटों को तय कर उन्हें कुछ छूट दी जा सकती है। बता दें कि फिलहाल देश में महिलाओं के लिए अलग से 10 विश्वविद्यालयों का संचालन किया जा रहा है। जिसमें से एक निजी क्षेत्र का है।
उच्च शिक्षा में महिलाओं की भागीदारी कम
दरअसल उच्च शिक्षा में महिलाओं की भागीदारी काफी कम होने की बात सामने आई है। यह खुलासा एक रिपोर्ट में हुआ, जिसमें यह बताया गया कि उच्च शिक्षा क्षेत्रों और खासकर इंजीनियरिंग में पुरुषों के मुकाबले महिलाओं की भागीदारी काफी कम है। इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद इस दर को बढ़ाने के लिए सरकार ने यह कदम उठाया है। रिपोर्ट में यह भी बताय गया था कि अंडर ग्रेजुएट लेवल पर महिलाओं का प्रतिशत कुल नामांकित छात्रों में 47 प्रतिशत ही है। जबकि पुरुषों की भागीदारी 53 प्रतिशत है। वहीं इंजीनियरिंग के क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी सिर्फ नौ प्रतिशत ही है। अब सरकार की कोशिश है कि आने वाले तीन सालों में इंजीनियरिंग के क्षेत्र में महिलाओं के हिस्सेदारी का प्रतिशत बढ़ के कम से कम बीस प्रतिशत तक पहुंच सके।
उच्च शिक्षा को जीएसटी से बाहर रखने का प्रस्ताव
इसके साथ ही भारतीय वाणिज्य एवं उद्योग मंडल (एसोचैम) ने आगामी आम बजट 2018 में शिक्षा क्षेत्र के लिए ज्यादा खर्च की मांग की है। इसके साथ ही उच्च शिक्षा को वस्तु एवं सेवाकर (जीएसटी) के दायरे से बाहर रखने की मांग भी रखी है। उद्योग मंडल ने इस संबंध में केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली को एक पत्र लिखा है। जिसमें उन्होंने तर्क दिया है कि बाहरी राज्य नियमनों और कैंपस के भीतर उपद्रवों के जोखिमों को देखते हुए उच्च शिक्षा संस्थान न तो नए कर का बोझ उठा सकते हैं और न ही इसके एवज में वो फीस में बढ़ोतरी कर सकते हैं। बता दें कि देशभर में जीएसटी लागू होने के बाद यह पहला आम बजट होगा। इसलिए संस्थानों का मानना है कि अब समय आ गया है कि शिक्षा क्षेत्र में बार बार संशोधन के चलते आ रही दिक्कतों को ठीक किया जाए।
'मन की बात' में भी महिला सशक्तिकरण पर बात
गौरतलब है कि वर्ष 2018 के सबसे पहले 'मन की बात' संस्करण में खुद प्रधानमंत्री मोदी ने भी महिला सशक्तिकरण पर विशेष जोर दिया। उन्होंने छत्तीसगढ़ की आदिवासी महिलाओं का भी जिक्र किया और कहा कि उन्होंने मिसाल कायम की है। उन्होंने कहा आज हमारी नारी शक्ति आत्मनिर्भर बन रही है। प्रधानमंत्री ने मन की बात कार्यक्रम में माओवाद प्रभावित दंतेवाड़ा जिले की उन महिलाओं का जिक्र किया जो इस दुर्गम क्षेत्र में ई-रिक्शा चलाकर अपना भरण पोषण कर रही हैं और महिला सशक्तिकरण का बेहतरीन उदाहरण पेश कर रही हैं। प्रधानमंत्री ने मुंबई के माटुंगा स्टेशन का भी जिक्र किया और कहा कि यह देश का ऐसा पहला स्टेशन है, जहां सभी कर्मचारी महिला हैं। उन्होंने कहा कि गणतंत्र परेड में बीएसएफ की महिला जांबाजों के प्रदर्शन को मेहमानों ने भी देखा। इसके अलावा उन्होंने पद्म पुरस्कार पाने वाले कई लोगों के जीवन का भी मार्मिक वर्णन किया। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों को बुलाकर हमें उनके अनुभवों को सुनना चाहिए।
Updated on:
31 Jan 2018 03:23 pm
Published on:
31 Jan 2018 03:17 pm
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