
Vijay Diwas
नई दिल्ली। Vijay Diwas 2020: भारत और पाकिस्तान के बीच हुए युद्धों की हार-जीत के पीछे कई रोचक कहानियां आपने पढ़ी और सुना होगी। अपने देश में बहुत से ऐसे योद्धा हुए जिनके आगे पाक कुछ भी नहीं सका। इसी कड़ी में आज आपको एक ऐसी ही रोचक कहानी बताने जा रहे है। कारगिल के युद्ध में भारतीय सेना के बहादुरी और जाबांजी के आगे पाकिस्तानी सेना ने घुटने टेक दिए थे। पाक के पास समर्पन के अलावा कोई चारा नहीं बचा था। करीब दो महीने तक चली इस युद्ध से जाबांज भारतीय सेना की ताकत का सबूत पूरी दुनिया ने देखा था।
पैर आज भी फंसी है गोली
इसी युद्ध में देश के 527 जवान शहीद हुए थे और करीब 1300 से ज्यादा घायल हुए थे। कारगिल के इस युद्ध में राजधानी दिल्ली के एक जाबांज सिपाही ने भी अपनी ताकत को लोहा मनवाया था। आज भी इनके शरीर में युद्ध के निशान मौजूद हैं। पाकिस्तान की ओर दागी गई गोली सतवीर सिंह के पैर में अभी भी फंसी हुई है और उन्हें चलने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। पैर में आज भी पाकिस्तान की एक गोली फंसी हुई है, जिसकी वजह से चल-फिर नहीं सकते। बैसाखी के सहारे वह चलते-फिरते हैं।
बर्तन धोने के मजबूर
देश के नाम अपनी जिंदगी को समर्पित कर चुके सतवीर की स्थिति आज बहुत खराब है। भले ही सरकार यह दावा करती नजर आती हो कि वह शहीदों और वीर सैनिकों के साथ है। लेकिन सतवीर सिंह की कहानी ने सरकार के दावों को कटघरे में खड़ा करता है। बता दें कि आज सतवीर सिंह अपने जीवन को चलाने के लिए एक जूस का दूकान चलाते हैं जहां पर खुद बर्तन धोने का काम करते हैं। लांस नायक सतवीर सिंह दिल्ली के ही मुखमेलपुर गांव में रहते हैं। करगिल युद्ध के दिल्ली से इकलौते जाबांज हैं। आज कारगिल युद्ध को 19 वर्ष बीत गए है।
9 सैनिकों की टुकड़ी की करते थे अगुवाई
सतवीर सिंह कारगिल युद्ध में नौ सैनिकों की टुकड़ी की अगुवाई करते थे। उन्होंने बताया कि 13 जून, 1999 की सुबह वह कारगिल की तोलोलिंग पहाड़ी पर थे। तभी घात लगाए पाकिस्तानी सैनिकों की टुकड़ी से आमना-सामना हो गया। पाकिस्तानी सैनिक 15 मीटर की दूरी पर थे। सतवीर ने हैंड ग्रेनेड फेंका। जैसे ही फटा पाकिस्तान के 7 सैनिक मारे गए। उन्होंने कहा कि हमें कवरिंग फायर मिल रहा था लेकिन 7 जवान हमारे भी शहीद हुए थे। उसी दौरान सतवीर के पैर पर कई गोलियां लगीं। उनमें एक, पैर की एड़ी में आज भी फंसी हुई है। वे 17 घंटों तक पहाड़ी पर घायल पड़े रहे। उनके शरीर से बहुत सारा खून बह चुका था। पाक सैनिकों की फायरिंग की वजह से हेलीकॉप्टर नहीं उतर पाए। फिर एयरबस से श्रीनगर लाए। 9 दिन बाद वहां रहने के बाद दिल्ली शिफ्ट कर दिया।
परिवार दाने-दाने को मोहताज
वीर जाबांज सिपाही सतवीर के जीवनयापन के लिए पेट्रोल पंप आवंटित होने की प्रक्रिया पूरी हो चुकी थी। पर पेट्रोल पंप नहीं मिल सका। इसके बाद सरकार ने जीवनयापन करने के लिए करीब 5 बीघा जमीन दी। जिसपर उन्होंने फलों का एक बाग भी लगाया। लेकिन तीन वर्ष बाद वह जमीन भी छीन ली गई गई। आज उनके दो बेटे हैं जो कि पैसों के अभाव में पढ़ाई नहीं कर पा रहे हैं और पूरा परिवार दाने-दाने को मोहताज है।
Published on:
15 Dec 2020 03:52 pm
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