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बुलंदशहर के एक ही परिवार के पांच चिराग बुझे, माता-पिता के बुढ़ापे का सहारा छिना, आस्था से शुरू हुई थी यात्रा

Bulandshahr Accident: बुलंदशहर का एक परिवार माता वैष्णो देवी के दर्शन कर घर लौट रहा था, लेकिन नेशनल हाईवे-34 पर हुए भीषण सड़क हादसे में माता-पिता और तीन मासूम बच्चों की दर्दनाक मौत हो गई।

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बुलंदशहर के एक ही परिवार के पांच चिराग बुझे..

Bulandshahr Accident 5 Dead: बुलंदशहर का एक परिवार अपनी सुख-समृद्धि, खुशहाली और लंबी आयु की कामना लेकर माता वैष्णो देवी के दरबार में दर्शन करने गया था। आस्था से भरा यह सफर परिवार के लिए बेहद सुकून और खुशी लेकर आया था, लेकिन किसी को क्या पता था कि वापसी का रास्ता उनकी जिंदगी का आखिरी सफर साबित होगा। माता के दर्शन के बाद परिवार जब घर लौट रहा था, तब उनके चेहरों पर अपनों से मिलने की खुशी और साथ लाए गए प्रसाद को बांटने की उत्सुकता साफ झलक रही थी।

घर लौटने की खुशी में था पूरा परिवार

दर्शन कर लौटते समय परिवार पूरी तरह उत्साहित था। ट्रेन से खुर्जा तक आने के बाद उन्होंने आगे की यात्रा के लिए बाइक का सहारा लिया। रास्ते भर बच्चे भी घर पहुंचने की खुशी में उत्साहित थे और अपने गांव में लौटकर सभी से मिलने की बातें कर रहे थे। परिवार के मन में सिर्फ सुखद यादें थीं, लेकिन यह खुशी बहुत कम समय के लिए थी और जल्द ही एक दर्दनाक मोड़ लेने वाली थी।

नेशनल हाईवे-34 पर हुआ भीषण सड़क हादसा

नेशनल हाईवे-34 पर अचानक हुए एक भीषण सड़क हादसे ने पूरे परिवार की जिंदगी को खत्म कर दिया। हादसा इतना भयानक था कि मौके पर ही माता-पिता और तीन मासूम बच्चों की मौत हो गई। घटनास्थल पर मौजूद लोगों के अनुसार टक्कर इतनी जोरदार थी कि किसी को संभलने का मौका तक नहीं मिला। इस हादसे की खबर जैसे ही फैली, पूरे इलाके में मातम पसर गया और लोगों की आंखें नम हो गईं।

उत्तम सिंह थे परिवार की रीढ़

मृतक उत्तम सिंह को उनके परिवार और रिश्तेदार बेहद जिम्मेदार और सहारा देने वाले व्यक्ति के रूप में जानते थे। उनके भतीजे उज्ज्वल ने बताया कि उत्तम सिंह अपने माता-पिता के सबसे छोटे बेटे थे और परिवार में सभी से विशेष स्नेह रखते थे। वह अपने बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल का मुख्य सहारा थे। परिवार की खुशियों और जिम्मेदारियों की पूरी बागडोर उनके ही कंधों पर थी, जो इस हादसे के साथ हमेशा के लिए टूट गई।

ग्रामीणों में शोक और मातम का माहौल

हादसे की खबर जैसे ही गांव और आसपास के क्षेत्रों में पहुंची, वहां शोक की लहर दौड़ गई। एक साथ पूरे परिवार के खत्म हो जाने की सूचना ने हर किसी को झकझोर दिया। ग्रामीणों का कहना है कि परिवार बेहद धार्मिक और सरल स्वभाव का था। किसी ने यह कल्पना भी नहीं की थी कि माता वैष्णो देवी के दर्शन से लौटते हुए ऐसा भयानक हादसा उनकी जिंदगी को खत्म कर देगा।

प्रसाद और खुशियों की उम्मीद अधूरी रह गई

जिस परिवार ने घर लौटकर प्रसाद बांटने और यात्रा की खुशियां साझा करने का सपना देखा था, वह सपना हमेशा के लिए अधूरा रह गया। आस्था से शुरू हुई यह यात्रा एक ऐसी त्रासदी में बदल गई, जिसने पूरे परिवार को छीन लिया। यह हादसा न केवल परिवार बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए गहरा सदमा बन गया है, जिसे लोग लंबे समय तक नहीं भूल पाएंगे।

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