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Chandrashekhar Azad Ravan: चंद्रशेखर आजाद ने बताई आपबीती, जानें कितनी चली गोलियां

Chandrashekhar Azad Ravan: आजाद समाज पार्टी के मुखिया चंद्रशेखर आजादपर 28 जून यानी बुधवार को जानलेवा हमला हुआ। गोली उनके पीठ को छूते हुए निकल गई। अब वे स्वस्‍थ हैं। उन्होंने आपबीती बताई कि हमलेे के 20 सेकंड में क्या हुआ।

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मीडिया से बाचतीच करते हुए चंद्रशेखर आजाद ने हमले को लेकर बताया, "अगर गोली 1 इंच भी इधर होती तो मेरे पेट को पार करके निकल जाती। मुझे इतने बड़े हमले के बाद तो पुनर्जन्म मिला है। मैं अपना जीवन अपने महात्माओं के सपनों को पूरा करने के लिए लगा दूंगा।"

चंद्रशेखर ने बताई हमले की आपबीती
चंद्रशेखर आजाद ने बताया, "मैं दिल्ली से वापस आ रहा था। एक साथी कार्यकर्ता की मां का निधन हो गया था। मैं उनके घर गया और वहां से वापस लौटा। एक संत की डेथ हो गई थी, मुझे उनके दर्शन में जाना था। मैं मुश्किल से 50 मीटर आगे बढ़ा था, फोन देख रहा था तभी गोली चली शीशे से टकराई और शीशा ब्लास्ट हो गया।"

फिल्मी स्टाइल में झोंका फायर
उन्होंने आगे बताया, "मुश्किल से 20 सेकेंड के अंदर 3 से 4 गोली चली, जिस गाड़ी से गोली चल रही थी वह मुझसे पीछे चल रही थी। हमला करने वालों की गाड़ी आगे पीछे हो जाती। तभी उसमे से फिल्मी स्टाइल में हमलावर निकलकर फायरिंग करने लगा। मेरे ड्राइवर मनीष ने गाड़ी को आगे बढ़ाया और यू टर्न लेकर के गाड़ी वापस लाता है। जब उन्हें पता चला कि मैं जिंदा हूं तो उन्होंने फिर से मेरे ऊपर फायरिंग की। मैंने गांव में ले जाकर के गाड़ी रोकी और वहां से उच्च अधिकारियों को फोन किया। फिर मैंने गाड़ियों में बुलेट देखी और मुझे भी उस समय गोली लगी हुई थी, उसके बाद अस्पताल गया।"

क्या पहले भी हुआ है ऐसा हमला?
चंद्रशेखर आजाद ने बताय, "कई बार घर पर रेकी की गई। ऊपर अफसरों को बताया भी था। 2 साल पहले भी ऐसी घटना हुई थी, लेकिन उन्होंने इस मामले को सीरियसली नहीं दिया। नोएडा में भी हमारी गाड़ी के आगे पीछे किसी ने कुछ किया है, जब मैं पिछले दिनों नोएडा गया था। मुझे ये उम्मीद नहीं थी कि मेरे खुद के जिले में ऐसा हो जाएगा, क्योंकि मेरे किसी से व्यक्तिगत कोई झगड़ा नहीं है। वैचारिक झगड़ा हो सकता है और मैं यह नहीं समझ पा रहा हूं कि कोई राजनीतिक लाभ के लिए ऐसा कर सकता है।"

चंद्रशेखर बोले-मुझेे डराया नहीं जा कसता
चंद्रशेखर आजाद ने बातचीत में बताया कि, ‘मेरे मन में भी उत्सुकता है, यह जानने की कि कौन मुझे मारना चाहता है और मेरे मरने से किसे लाभ है। गाड़ी जहां से बरामद हुई वह गुर्जर समाज का गांव है। मुझे लगता है कि वह दलित और गुर्जरों में झगड़ा करवाना चाहते थे, अगर मैं अपील नहीं करता तो परिणाम कुछ और हो सकता था। क्योंकि मेरे साथ ही मेरे लिए जान देने के लिए तैयार है। आज की सरकारें सीबीआई, ईडी, इनकम टैक्स और मुकदमों से डराते हैं और इन सब से मुझे तो नहीं डराया जा सकता है। क्योंकि कई सारे मुकदमे मेरे ऊपर हैं और मैं जेल भी जा चुका हूं तो बस एक गोली का डर रहा थ। वह गोली भी मेरे ऊपर चलवा दी।

मायावती के चुप्पी पर बोले चंद्रशेखर
चंद्रशेखर आजाद ने कहा, "मैं समझता हूं कि इसमें कुछ भलाई होगी कि मायावती ने मेरे हमले पर कुछ नहीं कहा और उनका प्यार आशीर्वाद मुझे पहले से मिलता रहा है। मुझे लगता है कि उनकी चुप में भी कुछ मेरी भलाई होगी।"