
बुलंदशहर। लोग दीवाली की तैयारियों में जुटे हुए है। कुछ सालों से मिट्टी के दीपक की जगह बिजली की झालरों ने ले ली है। जिसकी वजह से मिट्टी से सामान बनाने वालों का कारोबार में मंदी आई है। लेकिन इस बार प्लास्टिक बैन होने के बाद उन्हें उम्मीद जगी है।
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सरकार के प्लास्टिक मुक्त भारत बनाने की मुहिम के बाद कारोबारियों ने बड़ी संख्या में हस्तकला से मिट्टी को बर्तन का आकार देने का कार्य तेज कर दिया है। कारोबारियों ने बताया कि इस बार मिट्टी से बने सामान की काफी डिमांड है। इनमें मिट्टी के दीये, गगरी आदि की मांग है।
दरअसल, आधुनिकता के इस युग में पिछले एक दशक में मिट्टी के बर्तनों की मांग कम हुई थी। मिट्टी के सामान की जगह प्लास्टिक ने ली है। यहां तक कि दिवाली में पहले की तरह दीयों की भी बिक्री भी कम ही दिखाई देेती थी।
Published on:
18 Oct 2019 03:30 pm
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