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Gurjar Vs Thakur: गुर्जर और राजपूत समाज ने BJP की बढ़ाई टेंशन, SP तलाश रही आपदा में अवसर

Gurjar Vs Thakur: सहारनपुर में राजपूत और गुर्जर समाज के‌ बीच तनाव बढ़ता जा रहा है। इससे बीजेपी की ‌‌टेंशन बढ़ गई है। पश्चिमी यूपी में जाट और गुर्जर दोनों बड़े वोट बैंक हैं। किसान आंदोलन के बाद जाट समाज का बीजेपी से मोहभंग हुआ। अब गुर्जर और राजपूत समाज के झगड़े से बीजेपी की ‌‌चिंता बढ़ गई है।

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राजपूत और गुर्जर समाज के बीच बढ़ रहा तनाव
राजपूत और गुर्जर समाज के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है। विवाद अब सड़कों पर पहुंच गया है। अब समाजवादी पार्टी आपदा में अवसर तलाश रही है। गुर्जर और राजपूत समाज के लोग एक-दूसरे को देख लेने की धमकी दे रहे हैं। लखनऊ से लेकर दिल्ली तक बीजेपी के नेता मामले को शांत करने में लगे हुए हैं। दोनों बीजेपी के कोर वोटर हैं। मामला शांत नहीं हुआ तो 2024 का लोकसभा चुनाव में भाजपा को नुकसान हो सकता है। एक तो जाट समाज पहले से ही भाजपा से नाराज चल रहे हैं। जाट समाज राष्ट्रीय लोकदल की तरफ बढ़ता जा रहा है।

सहारपुर में निकाली गई गुर्जर गौरव यात्रा
सहारनपुर में सोमवार को गुर्जर गौरव यात्रा निकाली गई। जिला प्रशासन ने इस यात्रा पर रोक लगा दी थी। इलाके के डीएम और एसएसपी अपने अफसरों संग बैरिकेडिंग लगाकर तैनात थे, लेकिन हजारों की संख्या में गुर्जर बिरादरी के लोग बाहर निकले। फिर पुलिस से कहासुनी के बीच यात्रा शुरू हुई। पूरे 25 किलोमीटर तक यात्रा निकली, जबकि करणी क्षत्रिय सेना ने इस यात्रा का विरोध किया था।

यात्रा के विरोध में धरने पर बैठ गया करणी सेना
यात्रा के विरोध में करणी क्षत्रिय सेना के लोग विरोध में धरने पर बैठ गए। पुलिस ने समझा बुझाकर धरना खत्म कराया। गुर्जरों की यात्रा को लेकर कुछ इलाकों में कुछ समय के लिए इंटरनेट सेवा भी बंद कर दी गई थी। इलाके में अब भी तनाव बना हुआ है।

सम्राट मिहिर भोज को लेकर ठाकुर-गुर्जर में विवाद
राजपूत और गुर्जरों के बीच विवाद नया नहीं है। सम्राट मिहिर भोज ठाकुर थे या फिर गुर्जर? इसी बात पद दोनों में तनातनी हो जाती है। सहारनपुर का विवाद भी वैसा ही है, कुछ महीने पहले भी नोएडा के दादरी इलाके में इसी बात पर लंबे समय तक तनाव बना रहा। पड़ोसी राज्यों राजस्थान और हरियाणा तक झगड़े की आंच पहुंच गई थी। यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को दादरी में सम्राट मिहिर भोज की मूर्ति का अनावरण करना था। ठाकुर समाज के लोग कहने लगे कि मिहिरभोज हमारे हैं तो गुर्जरों का अपना दावा था। उस समय गुर्जरों का पलड़ा भारी रहा।

2013 में मुजफ्फरनगर में हुए दंगों के बाद जाटों का रुझान भाजपा की तरफ बढ़ा। पश्चिमी उत्तर प्रदेश की 20 विधानसभा सीटें ऐसी हैं जहां जाटों की आबादी 14 प्रतिशत के आसपास है और इसलिए इन क्षेत्रों में उनका वोट भी बहुत मायने रखता है।


सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ डेवलपिंग सोसाइटीज यानी 'सीएसडीएस' की एक रिपोर्ट के अनुसार, “साल 2014 के लोकसभा चुनाव में BJP को 77% जाटों का वोट मिला था। साल 2019 के लोकसभा के चुनावों में बढ़कर 91% वोट मिला। विश्लेषक कहते हैं कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश की 110 सीटों में से लगभग 90 ऐसी सीटें हैं, जहां जाटों के वोट निर्णायक भूमिका निभाते हैं।


मुजफ्फरनगर के सिसौली में किसानों की महापंचायत में जाट और मुसलमान एक साथ आये। दोनों समुदायों ने अपनी-अपनी गलतियों को मानकर उन्हें सुधारने का संकल्प भी लिया। महापंचायत के मंच से जाट किसान नेताओं ने चौधरी अजीत सिंह का समर्थन नहीं करने के लिए ख़ेद भी जताया।इस महापंचायत के बाद से पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति ने करवट ले ली और भाजपा की चिंताएं बढ़ा दीं। अब गुर्जर और राजपूत समाज के विवाद ने बीजेपी टेंशन बढ़ा दी है।