
गठबंधन के इस फार्मूले से लग सकता है भाजपा को झटका, पहले हो चुका है यहां इस्तेमाल
बुलंदशहर। लोक सभा चुनाव 2019 के अंतर्गत दूसरे चरण का मतदान बुलंदशहर में शुरू हो गया है। गुरुवार की सुबह सात बजे से मतदान के लिए लंबी-लंबी लाइनें लग गर्इ। युवा आैर बुजुर्ग मतदाताआें ने उत्साह के साथ मतदान किया। बुलंदशहर लोक सभा सीट पर भाजपा, गठबंधन आैर कांग्रेस उम्मीदवारों के बीच त्रिकोणीय मुकाबला माना जा रहा है, लेकिन सीधी टक्कर भाजपा आैर गठबंधन की मानी जा रही है तो इसकी वजह जातीय समीकरण माने जा रहे हैं। एेसे में गठबंधन उम्मीदवार भाजपा को कड़ी चुनौती पेश करेंगे, क्यों कि जातीय समीकरण ही कुछ एेसे हैं, जिसे लेकर भाजपा बुलंदशहर ही नहीं पूरी वेस्ट यूपी को लेकर परेशान है।
भाजपा का रहा है दबदबा
बुलंदशहर लोक सभा सीट पर पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की वजह से शुरू से भाजपा का दबदबा माना गया। 2009 लोक सभा चुनाव में सपा के कमलेश वाल्मीकि सांसद बने थे तो 2014 में भाजपा के डा. भोला सिंह जीते थे। 2019 लोक सभा चुनाव में भी डा. भोला ही भाजपा प्रत्याशी हैं आैर अपनी जीत का मजबूत दावा कर रहे हैं। गठबंधन से उम्मीदवार हस्तिनापुर के पूर्व विधायक योगेश वर्मा हैं, जबकि वंशी सिंह कांग्रेस के उम्मीदवार हैं।
गठबंधन का यह है फार्मूला
गठबंधन के उम्मीदवार बसपा के पूर्व विधायक योगेश वर्मा को अपनी जीत का पूरा भरोसा है। दरअसल, पूर्व विधायक ने पिछले मेरठ के मेयर चुनाव में जो फार्मूला इस्तेमाल किया था, उसमें उन्हें बड़ी सफलता मिली थी। दरअसल, मेरठ मेयर चुनाव में ये पहला मौका था, जब योगेश वर्मा ने मुस्लिम आैर दलित वोटरों को एक मंच पर लाकर अपनी पत्नी सुनीता वर्मा को जीत दिलार्इ थी। यह फार्मूला इतना सटीक साबित हुआ कि भाजपा के गढ़ में भाजपा की मजबूत उम्मीदवार कांता कर्दम को पराजय झेलनी पड़ी थी। योगेश वर्मा का मुस्लिम-दलित वोटर समीकरण हिट हो गया। बुलंदशहर की सीट पर सामान्य जाति 31, एससी 22.05, आेबीसी 30 आैर मुस्लिम 16 फीसदी हैं। एेसे में अगर मेरठ मेयर चुनाव वाला फार्मूला बुलंदशहर में चल गया तो भाजपा को नुकसान उठाना पड़ सकता है।
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Published on:
18 Apr 2019 09:17 am
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