ऐसे में घायल को यहां पर्याप्त उपचार नहीं मिल पाता है। अन्य चिकित्सक कुछ देर प्राथमिक उपचार में लगा देते हैं, जिसमें समय लग जाता है। बाद में घायल को बूंदी, कोटा या देवली ले जाया जाता है लेकिन रास्ते में रक्त अधिक बहने से कई बार घायलों की मौत हो जाती है। दोनों राजमार्ग पर आमने-सामने, स्लिप, मवेशियों से टकराने, अनियंत्रित होकर हुई दुर्घटना में डेढ़ सौ से अधिक लोग घायल हो चुके हैं। घायलों को उपचार के लिए हिण्डोली ले जाया जाता है, लेकिन हड्डी रोग विशेषज्ञ नहीं होने से वहां से बूंदी या देवली भिजवा दिया जाता है।