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बूंदी के जलाशयों पर लगा प्रवासियों का मेला, लुभा रही है रंग-बिरंगे पक्षियों की जलक्रीड़ा

जिले की प्राकृतिक आबोहवा से आकृषित होकर आने वाले विदेशी मेहमान परिंदों के कलरव से जलाशय गूंजने लगे है।

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बूंदी

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pankaj joshi

Feb 06, 2025

बूंदी के जलाशयों पर लगा प्रवासियों का मेला,लुभा रही है रंग-बिरंगे पक्षियों की जलक्रीड़ा

गुढ़ानाथावतान. क्षेत्र के अभयपुरा बांध में जलक्रीड़ा करता प्रवासी लाल सिर बतख का समूह।

बूंदी.गुढ़ानाथावतान. जिले की प्राकृतिक आबोहवा से आकृषित होकर आने वाले विदेशी मेहमान परिंदों के कलरव से जलाशय गूंजने लगे है। इस साल जिले के जलस्रोतों पर प्रवासी पक्षियों के समूह पंहुचे है। जिले के प्रमुख वेट-लेंड बरधा सहित सभी बांधों व तालाबों पर इन दिनों प्रवासी व अन्तरप्रवासी पक्षियों का कलरव गूंज रहा है। इनमें चीन-मंगोलिया जैसे ठंडे प्रदेशों में बर्फबारी शुरू होने के साथ आने वाले बार- हेडेड गूज व ग्रे-लेग गूज प्रमुख है। योरोप महाद्वीप से आने वाले यूरोपियन पिनटेल व नोर्थन शोवलर भी बूंदी के अधिकांश जल-स्रोतों पर दस्तक दे चुके है। इसी प्रकार गुजरात में कच्छ के रण से आने वाले अंतरप्रवासी ग्रेटर-फ्लेमिंगो व जिले के बरधा बांध तक सिमटे सारस पक्षी भी आकर्षण का केंद्र बने हुए है।

पक्षियों के प्राकृतिक आवासों में खलल
जिले के सभी बांधों व तालाबों में मछली ठेका होने से पक्षियों के प्राकृतिक आश्रय-स्थल छिन से गए है। मछली ठेकेदार के कार्मिक मछलियों को पक्षियों से बचाने के लिए दिन भर बांध व तालाबों पर आतिशबाजी के धमाके कर पक्षियों की स्वच्छंदता में विघ्न पैदा कर रहे है। पेलिकन पक्षी को तो मछली ठेकेदार देखते ही मारने दोड़ते है। यह पक्षी जलीय-पक्षियों में सबसे बड़े आकार का होता है तथा एक दिन में करीब 5-6 किलो मछली खाता है। जिससे मछली ठेकेदारों के लिए एक चुनौती के रूप में होता है। विडम्बना ही है कि जिन जलाशयों पर परिंदों का अधिकार होना चाहिए। वहां पर चंद पैसों के लालच में मछली ठेके की आड़ में पक्षियों के प्राकृतिक आश्रय-स्थलों पर कब्जे कर लिए है। इसी प्रकार बांधों व तालाबों में अवैध पेटा-काश्त पर भी रोक नहीं लग पाना चिंता का विषय है।

पक्षियों के शिकार की आशंका
जिले का प्राकृतिक वातावरण पक्षियों के अनुकूल है,लेकिन मछली ठेके की आड़ में पक्षियों के शिकार की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। पक्षी प्रेमियों की लंबे समय से मांग है कि हर जले में कम से कम एक वेट-लेंड को मछली ठेके से मुक्त रखा जाना चाहिए,ताकि पक्षियों के प्राकृतिक आश्रय स्थलों को बचाया जा सके। भीमलत व अभयपुरा बांधों पर भी मछली ठेका होना गंभीर है। जिस पर तत्काल रोक लगनी चाहिए।

कुरजां व पेलिकन ने किया बूंदी से किनारा
जिले के रामनगर तालाब में कुछ समय के लिए आने वाली कुरजां या डेमोशाइल क्रेन पक्षी इस साल बूंदी के किसी भी वेटलैंड पर नजर नहीं आए तथा अपने बड़े आकार के लिए पहचाने जाने वाले पेलिकन की भी जिले के किसी भी वेट-लेंड पर उपस्थिति नहीं देखी गई है। इसके अलावा कई पक्षी प्रजातियों की बहुत कम उपस्थिति दर्ज की गई है।