9 मई 2026,

शनिवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

Bundi : प्रशासन की अनदेखी से खारी बावड़ी बनी कचरा पात्र

कस्बे के तैलियों के मोहल्ले में स्थित प्राचीन खारी बावड़ी प्रशासनिक उदासीनता और लोगों की लापरवाही के चलते कचरा पात्र में तब्दील होती जा रही है।

2 min read
Google source verification

बूंदी

image

pankaj joshi

May 09, 2026

Bundi : प्रशासन की अनदेखी से खारी बावड़ी बनी कचरा पात्र

गेण्डोली. प्रशासन की अनदेखी से गंदगी एवं कचरे से अटी बावड़ी।

गेण्डोली. कस्बे के तैलियों के मोहल्ले में स्थित प्राचीन खारी बावड़ी प्रशासनिक उदासीनता और लोगों की लापरवाही के चलते कचरा पात्र में तब्दील होती जा रही है। कभी इस बावड़ी का स्वच्छ व मीठा पानी पीने के काम आता था तथा गंगा पूजन जैसे धार्मिक कार्यों में इसका विशेष महत्व था, लेकिन आज इसकी हालत बेहद दयनीय हो चुकी है।

बावड़ी का पानी अब इतना दूषित और बदबूदार हो गया है कि नहाने-धोने तो दूर, पशुओं को पिलाने या नहलाने लायक भी नहीं रहा। आसपास के लोगों द्वारा इसमें कूड़ा-कचरा डाले जाने और पंचायत प्रशासन की ओर से नियमित साफ-सफाई नहीं करवाए जाने के कारण यह ऐतिहासिक जल स्रोत पूरी तरह प्रदूषित हो चुका है। कभी यह मोहल्ले का प्रमुख जल स्रोत हुआ करता था, जहां दिनभर महिलाओं और पुरुषों की पानी भरने के लिए आवाजाही लगी रहती थी।

ग्रामीणों ने बताया कि कुछ वर्ष पहले तक शादी-विवाह एवं अन्य मांगलिक अवसरों पर गंगा पूजन, कलश यात्रा और जलाभिषेक के लिए पूरे गांव के लोग यहां एकत्रित होते थे, जिससे इसका धार्मिक और सामाजिक महत्व बना हुआ था। वर्तमान में बावड़ी के आसपास फैली गंदगी और दुर्गंध के कारण लोग यहां आने से भी कतराने लगे हैं। यदि समय रहते इसकी सफाई और जीर्णोद्धार नहीं कराया गया तो यह प्राचीन धरोहर पूरी तरह नष्ट हो जाएगी।

जीर्णोद्धार का बजट भी हुआ लैप्स
ग्रामीणों ने बताया कि बावड़ी की मरम्मत और विकास के लिए पूर्व में सरकार से स्वीकृति मिल चुकी थी, लेकिन पंचायत प्रशासन की उदासीनता के चलते कार्य शुरू नहीं हो पाया और स्वीकृत बजट भी लैप्स हो गया। इससे ग्रामीणों में रोष
व्याप्त है।

अतिक्रमण की चपेट में स्थल
देखरेख के अभाव में बावड़ी की भूमि पर आसपास के लोगों द्वारा अतिक्रमण भी कर लिया गया है, जिससे इसका स्वरूप और अधिक बिगड़ता जा रहा है। समय रहते अतिक्रमण नहीं हटाया गया तो भविष्य में इसके संरक्षण में और अधिक कठिनाई आएगी। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि बावड़ी की सफाई, अतिक्रमण हटाने, चारदीवारी निर्माण, सौंदर्यीकरण और जल संरक्षण की समुचित व्यवस्था की जाए, ताकि इसका पुराना गौरव वापस लौट सके और आने वाली पीढिय़ां भी इस ऐतिहासिक धरोहर के महत्व से परिचित हो सकें।

प्रस्ताव भेजे जाएंगे
प्रशासक पदमावती मीणा का कहना है कि उक्त बावड़ी चित्तौड़ा समाज की बताई जा रही है। समाज को यदि कोई आपत्ति नहीं है तो जीर्णोद्धार एवं विकास के लिए प्रस्ताव भेजे जाएंगे। वहीं चित्तौड़ा समाज के पवन चित्तौड़ा ने बताया कि बावड़ी के उपयोग और जीर्णोद्धार को लेकर समाज को कोई ऐतराज नहीं है तथा पूर्व में अनापत्ति पंचायत प्रशासन को दी जा चुकी है।