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Bundi : दो माह से वाहन फिटनेस की जांच बंद, टोंक-शाहपुरा दौड़ रहे बूंदी के वाहन मालिक

परिवहन विभाग की लापरवाही का खामियाजा इन दिनों वाहन स्वामियों को भुगतना पड़ रहा है। पिछले करीब दो माह से जिले में वाहनों के फिटनेस प्रमाण पत्र बनना बंद है। फरवरी से यह सेवा ठप होने के कारण वाहन मालिकों को मजबूरन टोंक और शाहपुरा जाना पड़ रहा है

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Bundi : दो माह से वाहन फिटनेस की जांच बंद, टोंक-शाहपुरा दौड़ रहे बूंदी के वाहन मालिक

बूंदी. जिला परिवहन कार्यालय।

बूंदी. परिवहन विभाग की लापरवाही का खामियाजा इन दिनों वाहन स्वामियों को भुगतना पड़ रहा है। पिछले करीब दो माह से जिले में वाहनों के फिटनेस प्रमाण पत्र बनना बंद है। फरवरी से यह सेवा ठप होने के कारण वाहन मालिकों को मजबूरन टोंक और शाहपुरा जाना पड़ रहा है, जिससे समय और पैसा दोनों बर्बाद हो रहे हैं। फिटनेस नहीं होने के चलते वाहन चालकों को ऑनलाइन चालान का सामना भी करना पड़ रहा है, जिससे उन पर दोहरी मार पड़ रही है। पेट्रोल खर्च और टोल टैक्स के साथ जुर्माना अलग से देना पड़ रहा है, जिससे वाहन स्वामी खासे परेशान हैं।

जानकारी के अनुसार, अन्य जिलों में कुछ कर्मचारियों ने वाहनों का केवल फोटो देखकर ही फिटनेस प्रमाण पत्र जारी कर दिए थे। इस गड़बड़ी के बाद संबंधित कर्मचारियों पर कार्रवाई करने के बजाय मुख्यालय ने फिटनेस बनाने वाली व्यवस्था ही बंद कर दी। इसका सीधा असर अब बूंदी सहित कई जिलों के वाहन मालिकों पर पड़ा है। बूंदी जिले में करीब 6 हजार 472 वाहनों के फिटनेस लंबित हैं। परिवहन विभाग का कहना है कि मुख्यालय से आदेश मिलते ही सेवा दोबारा शुरू कर दी जाएगी।

न्यायालय के आदेश भी बेअसर
न्यायालय ने राहत देते हुए निर्देश दिए हैं कि जहां ऑटोमेटेड टेङ्क्षस्टग स्टेशन (एटीएस) संचालित नहीं हैं, वहां परिवहन कार्यालयों में ही फिटनेस की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है। इसके बावजूद स्थानीय स्तर पर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है, जिससे वाहन स्वामियों में नाराजगी है।

बिना परमिट बाहर कैसे जाएं
नगरपरिषद क्षेत्र में चलने वाले ऑटो रिक्शा चालकों की स्थिति और भी खराब है। उनके पास दूसरे जिलों में जाने का परमिट नहीं है, जबकि फिटनेस कराने के लिए बाहर जाना मजबूरी है। ऐसे में वे न तो नियमों का पालन कर पा रहे हैं और न ही रोजी-रोटी सही तरीके से चला पा रहे हैं। ऑटो चालक गजानंद महावर का कहना है कि ‘‘नगरपरिषद क्षेत्र का परमिट होने के कारण बाहर जाना मुश्किल है, वहीं बिना फिटनेस चालान का डर बना रहता है। परिवार चलाना भी मुश्किल हो गया है।

बूंदी में मिली थी गड़बड़ी
सरकार के उस आदेश, जिसमें किसी भी जिले में वाहन का फिटनेस कराने की छूट दी गई थी, का गलत फायदा उठाया गया। बूंदी में भी दिसंबर-जनवरी के बीच करीब 450 से 500 वाहनों के फिटनेस प्रमाण पत्र बिना भौतिक जांच के जारी कर दिए गए। अब उसी गड़बड़ी का असर आम वाहन मालिकों को झेलना पड़ रहा है।

मेरी दो गाडिय़ों का फिटनेस खत्म होने पर टोंक जाकर उनका फिटनेस कराया, लेकिन रास्ते में ही टोल पर जुर्माना लग गया। यह वाहन मालिकों पर दोहरी मार है। बूंदी में जल्द सेवा शुरू होनी चाहिए।
कमर मियां, पूर्व अध्यक्ष ट्रक यूनियन बूंदी

फरवरी से फिटनेस कार्य बंद है। न्यायालय से एटीएस सुविधा को लेकर निर्देश मिले हैं, लेकिन मुख्यालय से गाइडलाइन का इंतजार है। निर्देश मिलते ही कार्यालय में फिटनेस प्रक्रिया शुरू कर दी
जाएगी।
सौम्या शर्मा, जिला परिवहन अधिकारी बूंदी