
बूंदी. स्वामी विवेकानंद मॉडल स्कूल।
बूंदी. राज्य के मॉडल कहे जाने वाले 134 सरकारी अंग्रेजी माध्यम के स्वामी विवेकानंद राजकीय मॉडल स्कूलों में शिक्षा का ढांचा लडख़ड़ाता दिख रहा है। इन स्कूलों में कला और वाणिज्य संकाय की कमी तथा शिक्षकों के अभाव के कारण 10वीं कक्षा के बाद विद्यार्थियों को अपना भविष्य दांव पर लगाना पड़ रहा है।
लगभग 40 फीसदी छात्र दसवीं के बाद स्कूल छोडऩे को मजबूर हैं। बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर होने के बावजूद, सीनियर सेकण्डरी स्तर पर सीमित विकल्प होने से विद्यार्थियों का भविष्य अनिश्चित है और कक्षा 11वीं व 12वीं में नामांकन घटता जा रहा है। जब से इन स्कूलों की शुरुआत हुई है, तब से अब तक इन मॉडल स्कूलों में केवल विज्ञान संकाय ही संचालित है, जिससे कला या वाणिज्य विषय में पढ़ाई करने के इच्छुक छात्रों को मजबूरी में अन्य स्कूलों में प्रवेश लेना पड़ता है। प्रदेश के मॉडल स्कूलों में लगभग 50 हजार विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। यदि सरकार इन स्कूलों में कला और वाणिज्य संकाय शुरू कर दे, तो विद्यार्थियों को स्कूल नहीं छोडऩा पड़ेगा और अभिभावकों को निजी विद्यालयों की महंगी फीस से राहत मिल सकेगी।
स्कूल छोडऩे को मजबूर
जिले के मॉडल स्कूलों में कक्षा दसवीं के बाद कला और वाणिज्य संकाय की अनुपलब्धता के कारण विद्यार्थियों को पढ़ाई छोडऩे की मजबूरी का सामना करना पड़ रहा है। शिक्षक संगठन भी इस स्थिति को स्वीकार करते हैं। शिक्षकों का कहना है कि लगभग 60 फीसदी बच्चों की रुचि कला और वाणिज्य विषयों में अधिक रहती है, लेकिन इन संकायों का न होना बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ जैसा प्रतीत होता है। जिले के ङ्क्षहडोली, नैनवां, केशवरायपाटन और तालेड़ा ब्लॉक में कुल चार मॉडल स्कूल संचालित हैं।
प्राइमरी भी की शुरू
सरकार ने सत्र 2024-25 से मॉडल स्कूलों में प्राइमरी स्तर (कक्षा 1-5) की पढ़ाई शुरू की है। हालांकि, संयोजक (सरकार) ने बड़े बच्चों के भविष्य से संबंधित विषय संबंधी समस्याओं का समाधान नहीं किया है। इस कारण इन कक्षाओं में लगातार नामांकन घटता जा रहा है।
नामांकन कम हो जाता
स्वामी विवेकानंद राजकीय मॉडल विद्यालयों में कक्षा 11 एवं 12 में केवल विज्ञान संकाय संचालित है। इसमें 40 सीट बायोलॉजी एवं 40 सीट ही मैथमेटिक्स की है। इसलिए वाणिज्य अथवा कला संकाय में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थी अन्य विद्यालयों में प्रवेश ले लेते हैं। इस कारण कक्षा 11 एवं 12 में नामांकन कम हो जाता है।
राजेश चतुर्वेदी, कार्यक्रम अधिकारी, समग्र शिक्षा बूंदी
Published on:
17 Apr 2026 11:53 am
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