
सांकेतिक तस्वीर
बूंदी। ‘मुझे अभी पढ़ना है, इस दृढ़ फैसले ने एक 16 वर्षीय नाबालिग को समाज के लिए प्रेरणा बना दिया। कक्षा 12वीं में पढ़ रही इस किशोरी ने न सिर्फ अपने बाल विवाह के खिलाफ आवाज उठाई, बल्कि खुद आगे आकर उसे रुकवाकर एक मिसाल पेश की। जिले के एक थाना क्षेत्र की इस किशोरी ने अपने माता-पिता के निर्णय के खिलाफ प्रशासन से न्याय की मांग की।
उसने साफ कहा कि वह अभी शादी नहीं करना चाहती और अपनी पढ़ाई जारी रखना चाहती है। इस निर्णय के बाद उसने फिलहाल माता-पिता के पास रहने से भी इंकार कर दिया। जानकारी के अनुसार किशोरी का विवाह 1 मई को खानखेड़ा सम्मेलन में तय किया गया था। लेकिन उसने हिम्मत और दृढ़ संकल्प दिखाते हुए अलग-अलग स्तर पर संपर्क किया और अपने बाल विवाह को रुकवाने में सफल रही।
किशोर ने बाल कल्याण समिति से संपर्क कर अपना बाल विवाह किए जाने की शिकायत दी। सूचना मिलते ही चाइल्ड लाइन टीम और सदर थाना पुलिस किशोरी के घर पहुंची पहुंचे। टीम ने किशोरी से बातचीत कर स्थिति को समझा और आवश्यक कार्रवाई की। उसकी इच्छा और समिति के आदेश के अनुसार उसे शेल्टर होम में सुरक्षित प्रवेश दिलवाया गया, ताकि उसकी सुरक्षा के साथ-साथ शिक्षा भी जारी रह सके।
जिले में इस तरह का चौथा मामला है, जब किसी नाबालिग ने खुद आगे आकर बाल विवाह का विरोध किया है। बाल कल्याण समिति अध्यक्ष सीमा पौद्दार के अनुसार बालिका को शेल्टर होम में रखने के बाद उसके माता-पिता की काउंसलिंग की जाएगी।
जिले रायथल थाना क्षेत्र में दो किशोरियों का विवाह रुकवाकर उन्हें सुरक्षित शेल्टर होम भेज दिया। जानकारी के अनुसार 20 अप्रेल को दो नाबालिग लड़कियों और एक नाबालिग लड़के के विवाह की सूचना प्रशासन को मिली थी। इस पर टीम तुरंत मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। जांच में सामने आया कि दोनों लड़कियों की उम्र 17 और 15 वर्ष है, जबकि लड़के की उम्र 18 वर्ष पाई गई।
इनमें एक लड़की कक्षा 10वीं और दूसरी कक्षा 12वीं में अध्ययनरत है। मौके पर तहसीलदार नरोत्तम, थानाधिकारी हरलाल और चाइल्ड लाइन टीम के रामनारायण, बुद्धि प्रकाश व मनजीत कौर ने स्थिति का जायजा लिया। बाल विवाह की पुष्टि होने पर तुरंत कार्रवाई करते हुए दोनों लड़कियों को बाल कल्याण समिति के निर्देशानुसार शेल्टर होम में सुरक्षित आश्रय दिलाया गया।
Updated on:
15 Apr 2026, 2:26 PM IST
Published on:
15 Apr 2026, 2:24 PM IST
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